इंदौर : अमानक गाजर के बीज से किसान को हुआ लाखों का नुकसान
अमानक गाजर के बीज से किसान को हुआ लाखों का नुकसानRaj Express

इंदौर : अमानक गाजर के बीज से किसान को हुआ लाखों का नुकसान

इंदौर, मध्य प्रदेश : अमानक गाजर के बीज से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मामला इंदौर जिले के नजदीक कम्पैल गांव का है।

इंदौर, मध्य प्रदेश। अमानक गाजर के बीज से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मामला इंदौर जिले के नजदीक कम्पैल गांव का है। गांव के किसान महेंद्र पिता प्रेमनारायण चौधरी ने गाजर का बीज गोल्डन सीड्स की वैरायटी गोल्डन रोजी के नाम का बीज कृषि सुधार बीज भंडार नंदलालपुरा बीज भवन इंदौर से खरीदा था। किसान को दुकानदार ने 600 रुपए प्रति किलो के हिसाब से 8 किलो बीज दिया जो कि 4800 रुपए का किसान ने दुकानदार से खरीदा। जब फसल पककर तैयार हुई तो गाजर की लंबाई तीन इंच के आसपास ही बनी जिसमें बीच में से जगह-जगह फुटाव किया गया जबकि देसी गाजर की लंबाई लगभग 1 फीट के आसपास होती है। इसमें इस तरह की समस्या भी नहीं आती लेकिन गोल्डन सीड्स गोल्डन रोजी का बीज किसान को खरीदना महंगा पड़ गया। जबकि किसान को प्रमाणित बीज व नामी कंपनी का बीज खरीदने पर भी लाखों रुपए का घाटा उठाना पड़ेगा।

लागत का 25 प्रतिशत ही मिल पाएगा :

किसान ने इसकी शिकायत उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ कृषि अधिकारी को की और बताया कि गाजर का साइज ना बनने के कारण जो नुकसान मुझे उठाना पड़ रहा है उसकी क्षतिपूर्ति की जाए। किसान ने बताया कि मेरे द्वारा लाखों रुपए की लागत गाजर में लगाई गई और अब जिस हिसाब से गाजर खेत में उगी है उसे बेचने पर सिर्फ लागत का 25 प्रतिशत ही मिल पाएगा जबकि 75 प्रतिशत के आसपास घाटा उठाना पड़ेगा। किसान का कहना है कि दुकानदार द्वारा सही बीज दिया जाता तो मुझे आज लाखों रुपए का मुनाफा होता। दुकानदार की वजह से मुझे गाजर के खरीददार नहीं मिल रहे हैं।

बिना कार्यवाही के छूट जाती हैं कंपनियां :

इस मामले में भारतीय किसान मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव ने बताया कि दुकानदार कई बार कमाने के चक्कर में किसान को घटिया क्वालिटी का बीज भी थमा देते हैं जो कि उपर से नामी कंपनी की छाप लगी रहती है जिससे किसान को लाखों रुपए की लागत लगाकर भी कुछ हासिल नहीं होता है। देखने वाली बात यह है कि अब किसान की वरिष्ठ कृषि अधिकारी द्वारा क्या मदद की जाती है, क्योंकि कई बार दुकानदार के साथ-साथ नामी बड़ी कंपनियां घटिया क्वालिटी का बीज किसान को देकर बिना कार्यवाही के छूट जाती है और किसान भी खाली हाथ रह जाता है, जिसकी कहीं सुनवाई नहीं होती।

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