Indore : प्रशासनिक डर दिखा हमारी निजी भूमि पर किया जा रहा कब्जा
बायपास व्यापारी संघ ने कमिश्नर को दिया ज्ञापनRavi Verma

Indore : प्रशासनिक डर दिखा हमारी निजी भूमि पर किया जा रहा कब्जा

इंदौर, मध्यप्रदेश : प्रशासनिक डर दिखाकर हमारी निजी भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। यदि भूमि अधिग्रहण इतना ही जरूरी है, तो नेशनल हाइवे एक्ट के तहत उचित मुआवजा भूमिधारकों को दिया जाए।

इंदौर, मध्यप्रदेश। बायपास के दोनों ओर 45-45 मीटर के कंट्रोल एरिया में स्थित कच्चे एवं पक्के निर्माण को हटाए जाने के लिए नगर पालिक निगम द्वारा नोटिस जारी किए हैं। इसको लेकर बायपास व्यापारी संघ ने विरोध जताते हुए, मंगलवार को नगर निगम प्रशासक और संभागायुक्त के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया। इसमें व्यापारियों ने मांग की है कि नगर निगम द्वारा नोटिसी कार्रवाई अवैध है और प्रशासनिक डर दिखाकर हमारी निजी भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। यदि भूमि अधिग्रहण इतना ही जरूरी है, तो नेशनल हाइवे एक्ट के तहत उचित मुआवजा भूमिधारकों को दिया जाए।

बड़ी संख्या में बायपास के व्यापारी कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन दिया। इसमें लिखा गया है कि जिन निर्माण को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं, वो बायपास के निर्माण के पूर्व के हैं और संबंधित पंचायत से अनुमति लेकर इनका निर्माण किया गया था। मप्र भूमि विकास अधिनियम 2012 के तहत स्वयं की भूमि पर कच्चे टीन शेड निर्माण के लिए किसी प्रकार की अनुज्ञा की जरूरत नहीं होती है। उसी प्रकार जैसे राजनीतिक आयोजन में लगाए जा रहे पंडालों पर भवन निर्माण की अनुमति नहीं ली जाती है।

व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम द्वारा जो नोटिस जारी किए गए हैं वो अवैधानिक हैं एवं भूमि का अधिग्रहण कर भूमि अधिग्रहण कानून के अनुरूप मुआवजा राशि न देना पड़े, इस कारण उक्त नोटिस जारी किए हैं। व्यापारियों का कहना है कि नेशनल हाईवे एक्ट के तहत भूमि के तहत किसी भी प्रकार का अधिग्रहण होता है तो उसके लिए मुआवजा दिया जाना आवश्यक है। इस नियम से बचने के लिए नगर पालिक निगम द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। नगर निगम सड़क चौड़ीकरण करती है तो भूधारकों को टीडीआर, एफएआर का वादा किया जाएगा, जो कि एक छल है। शहर में कई जगह भूमि अधिग्रहित करने के कई वर्षों बाद तक भी टीडीआर, एफएआर सार्टिफिकेट नहीं दिए हैं और बायपास की गाइड लाइन को देखते हुए यदि मुआवजा राशि नहीं दी जाती है, तो भूधारकों को गंभीर हानि होने की आशंका है।

बायपास के लिए केवल 60 मीटर भूमि का अधिग्रहण किया गया एवं शेष भूमि को निजी भूमि माना गया था। यदि मास्टर प्लान के अनुसार बायपास की चौड़ाई 150 मीटर रखी जाना थी, तो अधिग्रहण भी 150 मीटर भूमि का किया जाना चाहिए एवं उक्त भूमि को सरकारी खसरा बताकर रजिस्ट्री नामांतरण पर रोक लगाई जाना चाहिए थी। यह भूमि हमारे स्वामित्व की है एवं स्वकष्टोपार्जित है। चार गुना गाइड लाइन राशि देकर इसका मालिक हक प्राप्त किया है। प्रशानिक डर दिखाकर हमारी मालिकी हक की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, इसे शीघ्र रोके एवं हमारी रोजी रोटी से दूर न करें। शहर हित में भूमि लेना जरूरी है, तो भूमि अधिग्रहण कानून के नियमानुसार उचित मुआवजा राशि दी जाए। राऊ से मायाखेड़ी तक के बायपास को नेशनल हाइवे एक्त के तहत अधिगृहित किया जाए, जिससे भू-धारको को न्याय प्राप्त हो सके एवं नगर निगम जारी नोटिसी कार्रवाई को समाप्त किया जाए।

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