Indore : रिक्शा चालकों को अब नहीं होना पड़ेगा चेकिंग के दौरान परेशान
रिक्शा चालकों को अब नहीं होना पड़ेगा चेकिंग के दौरान परेशानRavi Verma - RE

Indore : रिक्शा चालकों को अब नहीं होना पड़ेगा चेकिंग के दौरान परेशान

इंदौर, मध्यप्रदेश : शहर के ऑटो रिक्शा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष यूनिक नंबर की व्यवस्था की है। स्टीकर के रूप में लगने वाले इन नंबरों को ऑटो रिक्शा के कांच पर लगेगा।

इंदौर, मध्यप्रदेश। शहर के ऑटो रिक्शा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष यूनिक नंबर की व्यवस्था की है। इन यूनिक नंबरों को देखकर पुलिस चेकिंग के दौरान वाहनों को दस्तावेज चेक करने से छूट प्रदान करेगी। इस संबध में कुछ दिनों पूर्व यातायात कार्यालय पलासिया में हुई बैठक में चर्चा की गई थी। यूनिक नंबर लगाने की शुरूआत यातायात थाना पलासिया पर पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र और ट्रैफिक डीसीपी महेश जैन, रिक्शा महासंघ के अध्यक्ष राजेश बिडकर ने ऑटो रिक्शा पर स्टीकर लगाकर किया। इस दौरान कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और ऑटो रिक्शा महासंघ के सदस्य मौजूद थे। ऑटो रिक्शा ड्रायवर प्रतिदिन यातायात थाना सेंट्रल कोतवाली में अपने संपूर्ण कागज जमा कर स्टीगर प्राप्त कर सकते हैं।

इंदौर ऑटो रिक्शा चालक महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष राजेश बिडकर, अर्जुन काकडे, निलेश सूर्यवंशी, वैभव कर्णिक ने बताया कि यातायात पुलिस द्वारा दस्तावेज चेकिंग के नाम पर प्रत्येक चौराहे पर ऑटो रिक्शा वालों को रोक दिया जाता था। जिसके कारण सवारियों को परेशानी भी उठाना पड़ती है। स्टीकर लगे होने की वजह से अब यह परेशानी का सामना रिक्शा चालक को नहीं करना पड़ेगा।

डीसीपी महेशचंद्र जैन के अनुसार इंदौर के समस्त ऑटो रिक्शा का रिकॉर्ड सूचीबद्ध कर ऑटो रिक्शा चालक की जानकारी ट्रैफिक थाने में जमा की जा रही है। इस यूनिक नंबर पाने के लिए ऑटो रिक्शा का परमिट फिटनेस इंश्योरेंस रजिस्ट्रेशन पीयूसी कार्ड की फोटो कॉपी ऑटो रिक्शा ड्राइवर को यातायात थाने में जमा कराने होगी। डीआरपी लाइन में यातायात पुलिसकर्मी संपूर्ण दस्तावेज की फोटोकॉपी एकत्रित कर अपडेट करने का कार्य चल रहा है। इसमें इसके परमिट रजिस्ट्रेशन और पीयूसी वैधता की समय अवधि रहेगी। जिससे समय-समय पर ऑटो रिक्शा ड्रायवर अपडेट कराते रहेगें।

जानकारी के अनुसार इस प्रकार की व्यवस्था पूर्व में भी जारी की गई थी, लेकिन समय के साथ इसे बंद कर दिया गया था। दूसरी ओर शहर में चलने वाले रिक्शाओं में 35 प्रतिशत रिक्शा किराए पर लेकर चलाए जाते है। जो कि ड्रायवर प्रतिदिन की राशि तय कर के लेता है। इनके ड्रायवर बदलते रहते है। इस स्थिति में वाहन के दस्तावेज तो पूरे हो सकते है, लेकिन रिक्शा चालकों को रिकार्ड मैनेज करना मुश्किल होगा। वही इन यूनिक कोड वाले स्टीकरों का डुप्लीकेट बनाना भी असंभव नही है। इस स्थिति में युनिक कोड को आसानी से स्कैन कर चेक करने जैसी सुविधा होना चाहिए।

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