Indore : कल विश्व मगरमच्छ दिवस पर रात में घूम सकेंगे जू

इंदौर, मध्यप्रदेश : विश्व मगरमच्छ दिवस के मौके पर 17 जून को प्री बुकिंग के तहत 30 लोगों का दल रात्रि में दो घंटे वन्य प्राणियों के बीच बिता सकेगा।
Indore : कल विश्व मगरमच्छ दिवस पर रात में घूम सकेंगे जू
कल विश्व मगरमच्छ दिवस पर रात में घूम सकेंगे जूRaj Express

इंदौर, मध्यप्रदेश। जंगल में नाइट सफारी का जो आनंद आता है, उसका लुत्फ उठाने के लिए जगंल जाना होता है। जो लोग जंगल में नाइट सफारी के लिए नहीं जा सकते, उन्हें कमला नेहरू प्राणी संग्राहलय विश्व मगरमच्छ दिवस 17 जून को एक मौका दे रहा है। इसके तहत लोग पिंजरों में बंद वन्य प्राणियों के साथ रात्रि के दो घंटे गुजार सकेंगे।

वैसे तो इस तरह के आयोजन जू प्रबंधन पूर्व में भी कर चुका है, लेकिन बारिश के मौसम में इस तरह की जू नाइट सफारी का रोमांच ही अलग होता है। जू एज्युकेटर निहार पेरुलकर ने बताया कि विश्व मगरमच्छ दिवस के मौके पर 17 जून को प्री बुकिंग के तहत 30 लोगों को यह मौका दे रहे हैं। इसके लिए प्री-बुकिंग हो चुकी है।

सांप-बिच्छुओं के बीच घूमेंगे चिड़ियाघर :

श्री पेरुलकर के मुताबिक शाम 6:30 बजे लोगों को इसके लिए जू में रिपोर्टिंग करना होगा। इसके लिए प्री-बुकिंग की जाती है, जो इस बार की हो चुकी है। 30 लोगों को रात्रि में पहले मगरमच्छ से संबंधित रोचक जानकारी दी जाएगी। इसके बाद रात्रि 7:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक जू स्नूज इवेंट के तहत लोगों को रात्रि में जू में घूमाया जाएगा। बारिश के मौसम में रात्रि में निकलने वाले सांप, बिच्छु, मेंढक आदि को दिखाते हुए, इसके संबंध में लोगों को रोचक जानकारी दी जाएगी। साथ ही पिंजरों में बंद वन्य प्राणियों को भी लोग देख सकेंगे कि रात्रि में वो किस तरह से रहते हैं। जू नाइट स्नूज माह में दो बार कराया जाता है। इस बार लोगों में इसको लेकर उत्साह ज्यादा दिखा।

क्यूआर कोड स्केन कर ले सकते हैं पेड़ों की जानकारी :

चिड़ियाघर में नगर निगम ने एक अनोखा प्रयोग भी किया है। यहां लगे बड़े पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाया गया है। इसको स्केन कर लोग उस पेड़ के संबंध में पूरी जानकारी ले सकते हैं कि कहां पाया जाता है, कैसे फल लगते हैं आदि। निहार पेरुलकर ने बताया कि वैसे तो पेड़ों पर उनके नाम की तख्ती लगी हुई है, लेकिन अधिक जानकारी के लिए क्यूआर कोड को स्केन कर उनके बारे में अधिक जाना जा सकता है। अब तक करीब 18 पेड़ों पर इस तरह के क्यूआर कोड लगाए जा चुके हैं।

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