Indore : स्वच्छता की तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इंदौर बनेगा नंबर वन
स्वच्छता की तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इंदौर बनेगा नंबर वनRaj Express

Indore : स्वच्छता की तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी इंदौर बनेगा नंबर वन

प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु पर डेथ ऑडिट कर लापरवाही दिखाने वालों के खिलाफ होगा एक्शन। जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने तथा परिवार कल्याण सेवाओं की उपलब्धता हेतु समीक्षा बैठक संपन्न।

इंदौर, मध्यप्रदेश। जिले में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर कम करने तथा परिवार कल्याण सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, कलेक्टर मनीष सिंह, डॉ. निशांत खरे, सभी ग्रामीण क्षेत्रों के एसडीएम, सीएमएचओ डॉ. बी.एस. सैत्या, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रामनिवास बुधोलिया, स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के सभी अधिकारी, समस्त आशा, एएनएम, सेक्टर डॉक्टर, बीएमओ, बीसीएम, सीडीपीओ, सुपरवाइजर्स एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यशाला में सभी उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में अपनाई गई रणनीति के संबंध में जानकारी दी गई। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा चिकित्सकों को सांसद श्री लालवानी एवं कलेक्टर श्री सिंह द्वारा प्रशंसा पत्र वितरित किये गए।

यह केवल शासकीय कार्य नहीं है बल्कि मानवीय कार्य है :

सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि देश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है। प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यदि हमें शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना है तो छोटे कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की जवाबदेही निर्धारित करनी होगी। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सीडीपीओ, सुपरवाइजर, आशा, एएनएम एवं सेक्टर डॉक्टर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करें। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने में हर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों का पूरी संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करें। ये केवल शासकीय कार्य नहीं है बल्कि मानवीय कार्य है। उन्होंने कहा कि, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए हमें इस कार्य की गंभीरता को समझना जरूरी है। जिस तरह से हम अपने बच्चों का ध्यान रखते हैं उसी तरह से गर्भवती महिला और उनके बच्चों का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है।

एएनएम और डॉक्टर के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश :

कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि इंदौर जिले में शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो इसको प्राथमिकता दी जाए। कुपोषण, इनेमिया एवं अन्य बीमारियों से ग्रस्त महिलाओं एवं बच्चों को सही उपचार मिले इसकी जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की है। उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे प्रतिमाह इस संबंध में नियमित रुप से बैठक लेकर मातृ तथा शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिये किये जा रहे कार्यों की समीक्षा करें। कलेक्टर श्री सिंह द्वारा कार्यशाला में उपस्थित सेक्टर डॉक्टर्स एवं महिला बाल विकास विभाग की सीडीपीओ/ सुपरवाइजर की जि़म्मेदारी निर्धारित की गयी है कि मातृ मृत्यु/ शिशु मृत्यु होने पर उन्होंने अपने मॉनिटरिंग दायित्वों का निर्वहन किया है या नहीं। हर मृत्यु पर गम्भीरता से डेथ ऑडिट किया जाएगा और जिम्मेदार व्यक्ति जिसके द्वारा लापरवाही दिखाई गई है उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। कार्यक्रम में डेट ऑडिट के दौरान पाई गई दो केस स्टडीज में संबंधित एएनएम एवं सेक्टर डॉक्टर के विरुद्ध कलेक्टर मनीष सिंह ने डिसीप्लिनरी एक्शन लेने के भी निर्देश दिए। डॉ निशांत खरे ने कहा कि मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जन जागरण अभियान चलाया जाना आवश्यक है।

देश की मातृ मृत्यु दर 103, तो मप्र की 163 :

कार्यशाला में बताया गया कि एसआरएस 2017-19 के अनुसार भारत की मातृ मृत्यु दर 103 तथा मध्यप्रदेश की 163 है एवं एन्युअल हेल्थ सर्वे 2012-13 के अनुसार इंदौर संभाग की मातृ मृत्यु दर 164 है। इसी तरह एसआरएस (अक्टूबर 2021) के अनुसार भारत की शिशु मृत्यु दर 30 तथा नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर 41.3 है एवं एन्युअल हेल्थ सर्वे 2012-13 के अनुसार इंदौर जिले की शिशु मृत्यु दर 37 है। इसी तरह एसआरएस 2016-18 के अनुसार भारत की कुल प्रजन्न दर 2.2, नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार मध्यप्रदेश कुल प्रजन्न दर 2 तथा एन्युअल हेल्थ सर्वे 2012-13 के अनुसार इंदौर जिले की कुल प्रजनन दर 2.2 है।

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