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मध्य प्रदेश

आफताब जहां के नाम से हिबा इनायतनामों, पॉवर अटार्नी और नामांतरण की होगी जांच

भोपाल, मध्य प्रदेश : जूनियर बेगम आफताब जहां के 2 मई 1977 के खत से सरकारी महकमें में मची खलबली।

राज एक्सप्रेस

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भोपाल, मध्य प्रदेश। राजधानी में नवाब भोपाल की जूनियर बेगम आफताब जहां के 2 मई 1977 के खत से सरकारी महकमें में खलबली मची हुई है। राष्ट्रीय अभिलेखागार (नेशनल आर्काइव) में रिकार्ड खंगालने के बाद पता चला है कि नवाब हमीदुल्ला खान ने अपनी जूनियर बेगम के नामे प्रापर्टी का कोई इनायतनामा नहीं किया। अब नए सिरे से जांच पड़ताल की जा रही है कि आखिर आफ ताब जहां के नाम पर जमीन जायदाद सरकारी रिकार्ड में दर्ज कैसे हो गई। इसके लिए उन सभी हिबानामों, इनायतनामों और पावर ऑफ एटार्नी के रिकार्ड को तलाशा जा रहा है। जिसके आधार पर बेगम आफताब जहां के नाम पर जमीन दर्ज हुई और उनके नाम पर जमीन नामांतरित भी हुई।

पत्र की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल घर बचाओ संघर्ष समिति के उप संयोजक अधिवक्ता जगदीश छावानी ने इस कथित पत्र को संदेहास्पद बताया है। उन्होंने बताया कि यह कथित पत्र 15 फ रवरी 1977 को भारत सरकार की ओर से भेजे गए पत्र का जवाब होना प्रतीत होता है। इस तिथि के लेटर का संदर्भ पत्र में है। अब सवाल यह है कि जो पत्र भारत सरकार की ओर से आफ ताब जहां को लिखे गए थे, वे कहां हैं। सिर्फ 2 मई 1977 का खत ही सामने क्यों सामने लाया गया है। पिछले 43 सालों से आफ ताब के पत्र व्यवहार कहां दबे रहे और अब कहां हैं। जब कोई संतान नहीं है, तो उनकी नागरिकता पाकिस्तान की थी या नहीं, ये कौन सिद्ध करेगा। ऐसे और भी कई कारण हैं जो कथित पत्र की वैधानिकता को संदेह के घेरे में लेते हैं। अगर पत्र का असर निरपराध लोगों की प्रापर्टी पर हुआ तो घर बचाओ संघर्ष समिति विरोध करेगी और लोगों के मालिकाना हक बचाने कानूनी लड़ाई लड़ेगी, जैसा मर्जर एग्रीमेंट मामले में किया और जैसा आबिदा सुल्तान के नाम पर शत्रु सम्पत्ती को लेकर संघर्ष किया था।

किस-किस को और क्यों भेजा है पत्र :

यह पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, चीफ जस्टिस आफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट, चीफ जस्टिस आफ एमपी हाईकोर्ट, चीफ सेक्रेटरी आफ एमपी, भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और जिला कलेक्टर को भेजकर मधुदास बैरागी ने कहा है कि 15 हजार करोड़ की प्रापर्टी जिसकी असली मालिक केन्द्र सरकार को होना चाहिए, लेकिन उसे भू-माफि या और नवाब व आफ ताब जहां के रिश्तेदार अपनी होना बताकर बेच रहे हैं। इसलिए उसे शत्रु सम्पत्ति घोषित करके केन्द्र सरकार अपने अधीन ले।

आफ ताब जहां के पत्र में ये है लिखा :

आफ ताब जहां के पत्र में 15 फ रवरी 1977 के पत्र का हवाला देते हुए बताया गया है कि नवाब हमीदुल्ला खान की मृत्यु 4 फ रवरी 1960 को होने के बाद भोपाल, भारत छोड़कर कराची पाकिस्तान आ गई। नवाब की बेगम की हैसियत से जो भी प्रापर्टी, जमीन, जायदाद, हक, अधिकार मिले थे, उसे वहीं छोड़ दिया था। इसमें विशेषकर खानूगांव, रियाज मंजिल, कोहेफिजा, लाउखेड़ी, बोरवन, बेहटा, हलालपुर, भोपाल, सीहोर और रायसेन की जमीन, जायदादें शामिल हैं, जो नवाब ने उन्हें दी थीं। पाकिस्तान आने के बाद इन्हें हिबा, दान, इनायत और पावर आफ अटार्नी के माध्यम से किसी को भी नहीं दी है। यदि कोई ऐसा क्लेम करता है तो वे गलत, फर्जी और अवैध मानी जाएं। उन पर विश्वास न किया जाए।

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