जबलपुर : वेन्टीलेटर पर शहर के ब्लड बैंक
जबलपुर, मध्य प्रदेश : ब्लड बैंकों में नहीं है ब्लड, ब्लड न मिलने से मरीज व परिजन परेशान। कोरोना संक्रमण के चलते आई समस्या, सभी से रक्तदान करने की अपील।
जबलपुर : वेन्टीलेटर पर शहर के ब्लड बैंक
वेन्टीलेटर पर शहर के ब्लड बैंकRaj Express

जबलपुर, मध्य प्रदेश। वैश्विक बीमारी कोरोना संक्रमण के चलते कई प्रकार की समस्याएं सभी के सामने आ खड़ी हुई हैं, तो वहीं ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी आ जाने से सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी से लेकर निजी ब्लड बैंकों की हालात ऐसे हो गए हैं कि अब आसानी से भी मिलने वाला ब्लड ग्रुप का ब्लड भी मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिससे उपचार के लिए भर्ती मरीजों को ब्लड की व्यवस्था करने में ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, तब जाकर रक्तदान करने के लिए उन्हें डोनर उपलब्ध हो रहा है। नहीं तो नौबत यहां तक आ पहुंची है कि ब्लड बैंक वेन्टीलेटर पर आकर खड़े हो गए हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संकटकाल के चलते कॉलेज सहित अन्य संस्थानों का संचालन न होने से सरकारी ब्लड बैंकों के द्वारा स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सहित अन्य संस्थानों में रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं हो पा रहा है, जिससे ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी आ गई है, जबकि सामान्य दिनों में हर दिन या फिर एक दिन छोड़ एक दिन के अंतराल में ब्लड कैंप आयोजित हो जाते थे, लेकिन वर्तमान में ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा है, जिससे ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी आ गई है।

यह ब्लड बैंक करते हैं ब्लड संग्रहित :

प्राप्त जानकारी के अनुसार रक्तदान शिविर के आयोजन में ब्लड संग्रहित करने का काम जिले के सरकारी ब्लड बैंकों के द्वारा किया जाता है। जिसमें मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का ब्लड बैंक, जिला चिकित्सालय विक्टोरिया अस्पताल का ब्लड बैंक व एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंकों के द्वारा ही रक्तदान शिविर में ब्लड संग्रहित करने का काम किया जाता है।

रक्तदान करने से होते हैं कई फायदें :

विशेषज्ञ बताते हैं कि यही मौका है कि जब हम सभी विपदा के दौरान मिलकर हर किसी की जान को बचाने के लिए आगे आएं और रक्तदान खुद करें व अपने तमाम परिचितों से भी करवाएं, क्योंकि रक्तदान करने से पहले संबंधित रक्तदाता की सभी आवश्यक जांचें होती हैं, जिसके बाद उसकी विभिन्न बीमारियों की जानकारी का पता चल पाता है। अ'छी बात तो यह होती है कि कई बार हम बाहर से तो स्वस्थ्य दिखते हैं, लेकिन शरीर के अंदर हमें क्या परेशानी है इस बात की जानकारी भी नहीं होती है, अगर हम हर तीन माह में रक्तदान करते रहेंगे तो हमारी सभी जांच हर तीन माह में हो जाएगी, जिससे हमें हमारी बीमारी व स्वस्थ्य होने के संबंध की जानकारी मिलेगी। इसलिए रक्तदान करने से दो फायदे होते हैं एक आप किसी का जीवन बचाने के लिए आगे आते हैं तो वहीं दूसरी तरफ आप अपने आपको स्वस्थ्य महसूस करते हैं और कई प्रकार की बीमारियों से खुद को बचा पाते हैं।

कोरोना के कारण फैला हुआ है भ्रम :

जानकारी के अनुसार कोरोना का भय रक्तदाताओं व अन्य वर्ग के भीतर बैठ गया है। इस वजह से कोई भी व्यक्ति रक्तदान करने के लिए ब्लड बैंक में नहीं जा रहा है। जबकि यह केवल एक भय है कि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की बीमारी हो जाएगी, बल्कि रक्तदान करने से पीडि़त का जीवन बचेगा और खुद की बीमारी व स्वस्थ्य होने की जानकारी मिलेगी। इसलिए तमाम ब्लड बैंकों के प्रभारियों के द्वारा तमाम रक्तदाताओं से कोरोना का भय निकालते हुए अधिक से अधिक संख्या में आगे आकर रक्तदान करने की अपील की है।

सामाजिक संस्थाएं कर रही हैं अपने-अपने स्तर पर काम :

शहर में रक्तदान के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विकास शुक्ला, शरद विश्वकर्मा, अजय घोष, सरबजीत सिंह नारंग, आयुष दीवान, रत्नेश राय, सुधीर रैकवार, राहुल तिवारी, डॉ ऋषि सागर, शैलेष जैन, डॉ संजय असाटी, नेहा शर्मा, रॉकी सेन, प्रिंसी सिंघई सहित अन्य बताया कि वह सभी हम हैं न फाउण्डेशन, माथुर वैश्य युवा मंच, अनुश्री वेलफेयर सोसायटी, दिशा वेलफेयर सोसायटी, मों रेवा रक्तदान सेवा, संत निरंकारी मण्डल, हेल्पिंग हैंड, ब्लड डोनर क्लब, जैन ब्लड ग्रुप, महादेव रक्तदान, रक्तदान महादान कर्तव्य ग्रुप, दर्पण रोटी बैंक , जबलपुर ब्लड डोनेसन सोसायटी, महाकौशल रक्तदान ग्रुप आदि संस्थाओं है। जिनका कहना है कि वह सभी समय-समय पर ब्लड की आवश्यकता की जानकारी आने पर अस्पतालों में भर्ती मरीजों की मदद करने का काम करते हैं और डोनेर उपलब्ध करवाते हुए समय-समय पर ब्लड कैंप भी आयोजित करवाते हैं। वहीं रक्तदान के लिए सभी को प्रेरित करने का भी काम उनके द्वारा अपने-अपने स्तर पर किया जा रहा है।

मेडिकल के ब्लड बैंक में है यह स्थिति :

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के ब्लड बैंक में सामान्य दिनों में जब कोरोना का संक्रमण नहीं था, तब करीब 100 से अधिक यूनिट ब्लड, ब्लड बैंकों में हुआ करता था, लेकिन वर्तमान करीब 1000 बिस्तर का जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने पर यहां पर मात्र वर्तमान समय 30 से 35 यूनिट ही ब्लड रहता है। जिससे मरीजों को ब्लड नहीं मिल पा रहा है और इस वजह से समय पर उनका इलाज भी नहीं हो रहा है। जिससे परिजनों, डॉक्टर व स्टॉफ आदि सभी को परेशान होना पड़ रहा है।

यह है विक्टोरिया अस्पताल के ब्लड बैंक की स्थिति :

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल विक्टोरिया में जिले सहित आसपास से भी उपचार के लिए यहां पर विभिन्न बीमारियों से पीडि़त होकर मरीज उपचार के लिए आते हैं। बताया गया है कि जिला अस्पताल विक्टोरिया करीब 300 बिस्तर का है। वर्तमान समय पर विक्टोरिया अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 35 से 40 यूनिट है और यह संख्या कभी 10 से 15 तक पहुंच जाती है। वहीं ब्लड बैंक से प्राप्त हुई जानकारी अनुसार सामान्य दिनों में ब्लड बैंक में करीब 100 या फिर इसके आसपास ब्लड रहते थे, लेकिन अब हालत चिंताजनक है, जिससे मरीजों को समय पर ब्लड नहीं मिल पा रहा है और उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंक में भी ब्लड कमी :

एल्गिन अस्पताल में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिलाओं के संबंध की बीमारी का उपचार होता है, यहां पर स्थित एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंक में भी ब्लड की कमी चल रही है, जिससे कई बार तो गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन में लगने वाला ब्लड भी नहीं मिल पाता है। जिससे परिजन, मरीज व डॉक्टर व अन्य स्टॉफ को परेशान होना पड़ता है। इसलिए सभी से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की जा रही है। वहीं डॉ संजय मिश्रा ने बताया कि सामान्य दिनों में एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंक में 100 से लेकर 150 यूनिट तक ब्लड संग्रहित रहता था, लेकिन वर्तमान समय में 30 से लेकर 45 यूनिट ब्लड ही ब्लड बैंक में रहता है।

थैलेसीमिया मरीजों की परेशानी बढ़ी :

जानकारी के अनुसार थैलेसीमिया की बीमारी से ग्रसित तमाम पीडि़त उपचार के लिए जिला अस्पताल विक्टोरिया में भर्ती होते हैं, जिन्हें सामान्य दिनों में विक्टोरिया अस्पताल व एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंकों से आसानी से ब्लड उपलब्ध हो जाया करता था, लेकिन वर्तमान समय पर उन्हें भी ब्लड नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से पीडि़त को हर माह दो से तीन यूनिट ब्लड चढ़ता है, इसी वजह से ब्लड चढ़वाने के लिए इस बीमारी से पीड़ित विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती होते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान समय पर आसानी से ब्लड नहीं मिल पा रहा है। वहीं थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को ब्लड दिलवाने का काम करने वाली सामाजिक संस्थाएं भी हर स्तर पर इनकी मदद करने का काम कर रही हैं।

सभी से रक्तदान करने की अपील :

डॉक्टर, ब्लड बैंक के प्रभारी, कर्मचारी, मरीज व उनके परिजन सहित सामाजिक संस्थाओं ने सभी वर्ग से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की है, ताकि कोई पीड़ित ब्लड की कमी से किसी गंभीर बीमारी की चपेट में न आ सके और उसके साथ किसी भी प्रकार से कोई आप्रिय घटना घटित न हो सके। इसलिए सभी ने रक्तदान करने की अपील करते हुए ब्लड कैंप का भी आयोजन किए जाने का आग्रह किया है, ताकि अस्पतालों में जिंदगी व मौत से जूझ रहे पीड़ितों के जीवन की रक्षा करने वाला ब्लड उन्हें पहले की तरह आसानी से ब्लड मिल सके।

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