Jabalpur : डेंगू के बढ़ते प्रकोप पर हाईकोर्ट सख्त
डेंगू के बढ़ते प्रकोप पर हाईकोर्ट सख्तRaj Expres

Jabalpur : डेंगू के बढ़ते प्रकोप पर हाईकोर्ट सख्त

जबलपुर, मध्यप्रदेश : मप्र हाईकोर्ट ने साफ-सफाई के अभाव में संक्रामक बीमारियों के फैलने व ग्वालियर में प्रभावित बच्चों को समुचित उपचार न मिलने संबंधी दोनों मामलों को काफी सख्ती से लिया।

जबलपुर, मध्यप्रदेश। मप्र हाईकोर्ट ने साफ-सफाई के अभाव में संक्रामक बीमारियों के फैलने व ग्वालियर में प्रभावित बच्चों को समुचित उपचार न मिलने संबंधी दोनों मामलों को काफी सख्ती से लिया। चीफ जस्टिस मोह. रफीक व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने दोनों मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए नगर निगम जबलपुर तथा ग्वालियर को डेंगू के रोकथाम के लिए 1 सितम्बर से अभी तक किये गए कार्यो की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हैं।

यह जनहित का मामला याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा की ओर से साल 2018 में दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि शहर में साफ-सफाई के अभाव में संक्रामक बीमारियां फैल रही है। सड़क व सीवर लाईन के गड्डों में पानी भरा रहता है। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ-सफाई व्यवस्था दुरूस्त किये जाने के संबंध में आदेश जारी किये थे। याचिकाकर्ता की ओर से युगलपीठ को बताया गया कि कोरोना महामारी के साथ शहर में डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की लाईन लगी हुई है। कोरोना काल के दौरान भंवरताल स्थित नगर निगम का स्विमिंग पुल बंद है। इसके बावजूद भी उसमें पानी भरा हुआ है, जिसके कारण पानी में लार्वा उत्पन्न हो गया है। नगर निगम के पास 5 फागिंग मशीन है जो कि खराब है। सिर्फ हैंडपंप मशीन का उपयोग छिड़काव में किया जा रहा है। आरोप है कि कीटनाशाक दवाईयों के साथ पर मिट्टी तेल डालकर छिड़काव किया जा रहा है। वहीं ग्वालियर खंडपीठ से सुनवाई के लिए स्थानांतरित की गयी अधिवक्ता संगीता पचौरी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि ग्वालियर में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हो रहे है। ग्वालियार मेडिकल कॉलेज व जीआर ग्रुप मेडिकल कॉलेज में एक पलंग में 10 से 15 बच्चों का उपचार किया जा रहा है। बच्चों को सिर्फ तत्कालीन उपचार किया जा रहा है। उनका सीटी स्कैन या एमआरआई, ब्रेन इमेजिंग, इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफ (ईईजी) रक्त परीक्षण, मस्तिष्क बायोप्सी नहीं किया जा रहा है। उनका कोविड टेस्ट भी नहीं कराया जा रहा है। अस्पतालों में वेंटिलेटर खराब पड़े हैं और पर्याप्त संख्या में पलंग व ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण कई बच्चों की मौत हो गयी है। याचिका में कहा गया था कि यह कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक है और उपचार में लापरवाही बरती जा रही है। युगलपीठ ने दोनों याचिकाओं की सुनवाई संयुक्त रूप से करते हुए उक्त निर्देश जारी किये हैं।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

No stories found.