कोरोना का खौफ कम करेंगे कैदी
कोरोना का खौफ कम करेंगे कैदी|Social Media
मध्य प्रदेश

कोरोना का खौफ कम करेंगे कैदी, जानिए कैसे...

जबलपुर, मध्यप्रदेश: कोरोना वायरस के खतरे की खबरें जहां सामने आती जा रही है वहीं इनसे उलट एक सकारात्मक खबर आई सामने, कैदियों की मेहनत दिलाएगी वायरस से निजात।

Deepika Pal

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राज एक्सप्रेस। दुनिया से देश में पहुंचें प्राणघातक कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता ही जहां है जिसके चलते इसके प्रकोप की खबरें आए दिन सामने आती जा रही हैं जहां कोरोना ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है वहीं इसके बचाव के लिए प्रयोग किए जाने वाले मास्क और सैनेटाइजर की बिक्री पर भी भ्रष्टाचार की मार पड़ रही है। इसके विपरीत मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक सकारात्मक खबर सामने आई हैं जिसमें जिले की सेंट्रल जेल में कैदियों द्वारा फेस मास्क का निर्माण किया जा रहा है ताकि बाजारों में मास्क की कमी पर पूर्ति हो जाए।

कैदियों की पहल दिलाएगी वायरस से निजात

बताया जा रहा है कि, कोरोना वायरस के खतरे और बाजारों समेत मेडिकल स्टोर में फेस मास्क की कमी के चलते सैंट्रल जेल के कैदी इस पहल को आकार दे रहे हैं। जिसमें जहां पूर्व में कैदियों द्वारा 2000 मास्क तैयार किए जा रहे थे अब बढ़ती मांग के चलते इसमें बढ़ोत्तरी की जा रही है। जिसकी आपूर्ति स्वास्‍थ्य विभाग को की जाएगी। इस संबंध में जेल विभाग के डीआईजी गोपाल ताम्रकर ने मीडिया को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि, 50 कैदियों का एक दल इसके लिए काम कर रहा है। इसके निर्माण के बाद 16 मार्च को इसकी आपूर्ति की जाने वाली है। इन कैदियों द्वारा बनाए गए एक मास्क की कीमत सिर्फ 7 रुपये है। उन्होंने बताया कि मास्क के निर्माण में उपयोग होने वाला सूती कपड़ा भी जेल में स्थापित पावरलूम में बनाया जाता है। वहीं अब बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के मुंबई से 50,000 हजार मास्क की मांग के चलते 100 कैदी निर्माण कार्य में लगे हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने किया था संपर्क

इस संबंध में आगे बताते हुए डीआईजी ताम्रकर ने बताया कि, मास्क निर्माण की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मास्क की आपूर्ति के लिए हमसे संपर्क किया था इसके बाद मास्क के कुछ नमूने परीक्षण के लिए उन्हें हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए। अधिकारियों ने इन मास्क के नमूनों का परीक्षण कर लिया है तथा उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों के अनुरुप पाया है अधिकारियों की स्वीकृति के बाद मास्क का निर्माण शुरु किया गया जबकि 1000 मास्क पहले से ही तैयार थे।

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