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मंत्रिमंडल में होगा विस्तार
मंत्रिमंडल में होगा विस्तार|Social Media
मध्य प्रदेश

झाबुआ उपचुनाव लाएगा मंत्रिमंडल में विस्तार, होगा मंत्रियों के विभागोें में बदलाव

भोपाल,मध्यप्रदेशः झाबुआ में उपचुनाव की तारीखें तय हो चुकी हैं लेकिन चुनाव से पहले मंत्रिमंडल के विस्तार की खबरे भी चर्चा में आ रही हैं।

Deepika Pal

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश में झाबुआ जिले में आगामी उपचुनाव की तारीखें तय हो चुकी हैं जो 21 अक्टूबर को हैं। मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में विस्तार और मंत्रियों के विभागों को लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।

मंत्रियों के कामकाज के आधार पर होगा बदलावः

मंत्रियों के पिछले 9 महीनों के कामकाज के लेखा-जोखा और कार्यानुभव के आधार पर मंत्रियों के विभाग बदले जाएगें। जिसके लिए प्रशासन विभाग से मंत्रियों का ब्यौरा मांगा गया है।

नगरीय निकाय चुनाव से पहले किया जाएगा कामः

यह काम आने वाले नगर निगम के चुनावों के ध्यान में रखते हुए पहले ही कर लिया जाना है। खास तौर पर सूत्रों की मानें तो यह काम असंतुष्टों को साधने और लापरवाही से कार्य करने वाले मंत्रियों की जांच करने के लिए किया जा रहा है। जिससे इसका लाभ आगामी नगर निगम चुनावों में मिल सकें। वहीं कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि कांतिलाल भूरिया अगर चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

मंत्रिमंडल में है पद खालीः

वर्तमान में कमलनाथ मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 28 मंत्रियों के पद होने के साथ ही 6 पद अब भी खाली हैं, जिन पदों पर नियुक्ति झाबुआ उपचुनाव के बाद होगी। नए चेहरों को शामिल करने के साथ ही एक से अधिक आधिक्य वाले विभाग जिन मंत्रियो के पास है उसमें भी कटौती होगी।

जिसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रियों के कार्यों की कार्यप्रणाली और रिपोर्ट कार्ड का अध्ययन किया जा रहा है और यह परखा जा रहा है कि किसे मंत्रिमंडल में रखा जाए और किसे बाहर किया जाए।

पार्टियों के समर्थन के आधार पर चल रही है सरकारः

बात करें तो मंत्रिमंडल के गठन के बाद से ही वरिष्ठ विधायक और समर्थन में खड़े निर्दलीय विधायक इस मंत्रिमंडल के संबंध में नाराजगी जता चुके हैं, जिससे आगामी उपचुनाव से पहले सरकार इन मंत्रियो के नामों पर विचार कर सकती है। साथ ही खराब प्रदर्शन दे रहे मंत्रियों को बाहर किया जा सकता है।

बता दें कि, सरकार बहुजन समाज पार्टी(बसपा), समाजवादी पार्टी(सपा) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन के आधार पर चल रही है।