कैलाश सत्यार्थी की संस्था व चाइल्ड लाइन ने पुलिस के साथ 12 बच्चों का रेस्क्यू किया
कैलाश सत्यार्थी की संस्था व चाइल्ड लाइन ने पुलिस के साथ 12 बच्चों का रेस्क्यू किया
सांकेतिक चित्र

कैलाश सत्यार्थी की संस्था व चाइल्ड लाइन ने पुलिस के साथ 12 बच्चों का रेस्क्यू किया

होशंगाबाद, मध्यप्रदेश : नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की बचपन बचाओ संस्था दिल्ली और होशंगाबाद की चाइल्ड लाइन ने जीआरपी के साथ मिलकर इटारसी रेल जंक्शन पर 12 बच्चों का रेस्क्यू किया।

हाइलाइट्स :

  • बाल कल्याण समिति ने की काउंसलिंग।

  • शाम को बच्चों को परिजनों को सौंपा।

होशंगाबाद, मध्यप्रदेश। नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की बचपन बचाओ संस्था दिल्ली और होशंगाबाद की चाइल्ड लाइन ने जीआरपी के साथ मिलकर इटारसी रेल जंक्शन पर 12 बच्चों का रेस्क्यू किया। सुबह लगभग पांच बजे दिल्ली से आई सत्यार्थी की टीम के सदस्य इटारसी पहुंच गए थे। पुलिस ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका और सर्चिंग की। रेस्क्यू किये गए सभी बच्चों को होशंगाबाद की बाल कल्याण समिति के पास लाया गया। जहाँ देर शाम तक बच्चों की काउंसलिंग की गई।

होशंगाबाद चाइल्ड लाइन के सुनील दीक्षित ने बताया कि "नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की संस्था बचपन बचाओ को गोवाहटी मुंबई एक्सप्रेस में बाल श्रमिक होने की सूचना थी। इसके लिए संस्था के सदस्य सलमान और बबन दिल्ली से इटारसी पहुंचे थे। उन्हीं ने मामले की जानकारी भी दी। इस पर हमने जीआरपी इटारसी की टीम के साथ गोवाहटी एक्सप्रेस की सर्चिंग की। ट्रेन का स्टापेज कम था। इसलिए ट्रेन की सभी बोगियों को सर्च करना संभव नहीं था। इसलिये जीआरपी ने ट्रेन को रुकवाया और बिहार से मुम्बई जा रहे 12 बच्चों को रेस्क्यू किया।"

दिनभर चली काउंसलिंग :

रेस्क्यू किये गए सभी बच्चों को बाल संलयन समिति के पास लाया गया। समिति ने बच्चों की काउंसलिंग की। जानकारी के मुताबिक रेस्क्यू किये गए 12 बच्चों में आठ बच्चे 18 वर्ष से कम उम्र के थे। चार बच्चों की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा थी। समिति ने बच्चों के आधार कार्ड और अन्य जरूरी जानकारी की तफ्तीश की। उनके गांव के प्रधानों से भी बात की गई। इसके बाद बच्चों को उनके परिजनों की सुपुर्दगी में दिया गया है।

बाल कल्याण के लिए काम करती है संस्था :

होशंगाबाद की चाइल्ड लाइन भी लगातार बाल संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। बाल श्रमिक को तलाशने के लिए लगातार संस्था के सदस्य काम कर रहे हैं। संस्था के सुनील दीक्षित ने बताया कि "पहले भी सत्यार्थी की संस्था के साथ बाल श्रमिक का रेस्क्यू किया गया था।"

इनका कहना है :

12 बच्चों की कांउन्सलिंग की गई थी। कोई भी बाल श्रमिक नहीं था। उनके गांव के प्रधानों से भी बात की गई। बच्चे अपनें परिचितों के साथ मुम्बई जा रहे थे। सम्पूर्ण तफ्तीश करने के बाद बच्चों को उनके परिजनों को सौंपने की कार्रवाई की गई।

ममता गहलोत, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, होशंगाबाद

गोवाहटी एस्क्सप्रेस से 12 बच्चों का रेस्क्यू करने के बाद CWC के सामने पेश किया गया। यह रेस्क्यू चाइल्ड लाइफ लाइन की सूचना पर था।

बी.एस. चौहान, टीआई, जीआरपी, होशंगाबाद

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