केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में आएगी खुशहाली : तुलसीराम सिलावट
केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में आएगी खुशहाली : तुलसीराम सिलावटSocial Media

केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में आएगी खुशहाली : तुलसीराम सिलावट

भोपाल, मध्यप्रदेश : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत-रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वप्न के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना एक महत्वकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। संसार के प्रत्येक प्रांणी के जीवन का आधार जल है। जिस तीव्र गति से विश्व की आबादी बढ़ रही है, उसे देखते हुए यदि प्राकृतिक जल संसाधनों का समुचित संग्रहण नहीं किया गया तो आने वाली भावी पीढ़ियों को भयावह जल संकट के दौर से गुजरना पड़ेगा। उपलब्ध आंकड़ों का आंकलन करें, तो हम पायेंगे कि वर्ष-2001 में हमारे देश में प्रतिव्यक्ति 1800 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध था, जो वर्ष-2050 में घट कर 1050 क्यूबिक मीटर हो जायेगा। हमारा देश इस समय कृषि उपयोग हेतु एवं पेयजल के गंभीर संकट से गुजर रहा है। इस संकट के निवारण हेतु यह आवश्यक है कि देश में उपलब्ध जल स्त्रोतों एवं संसाधनों के बूंद-बूंद जल को संग्रहित किया जाये। मध्यप्रदेश के भी कई हिस्से जलाभाव ग्रस्त हैं, जहां सिंचाई एवं पेयजल हेतु जल संकट व्याप्त है। प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र ऐसा ही एक जलाभाव ग्रस्त क्षेत्र है। जहां मानव समुदाय के समुचित उत्थान के लिये जल की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस दिशा में केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना को मील का पत्थर माना जा सकता है।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत-रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वप्न के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना एक महत्वकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है। इस परियोजना में केन, बेतवा एवं इनकी सहायक नदियों पर बांधों का निर्माण कर जल संग्रहित किया जाएगा, जिससे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी।

जैसा कि हम जानते हैं, भारत वर्ष अत्यधिक भौगोलिक विविधता वाला देश है। यहां अनेक राज्य ऐसे हैं, जहां अत्यधिक वर्षा के कारण प्रतिवर्ष बाढ़ आती है, तो कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां स्थायी रूप से सूखा विद्यमान होता है। देश में बाढ़ एवं सूखे की आपदाओं से निपटने के लिये एकीकृत रूप से जल संसाधनों का विकास कर लघु एवं दीर्घ अवधि के उपायों का अपनाया जाना चाहिये। इन उपायों का यदि समयबद्ध रूप से एवं सही ढंग से लागू किया जाये, तो एक नदी घाटी क्षेत्र से दूसरे नदी घाटी क्षेत्र में पानी पहूंचाने वाली जल संसाधन परियोजनाऐं पानी की उपलब्धता के असंतुलन को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही जल-वायु परिवर्तन के संभावित प्रतिकूल प्रभावों के निराकरण में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

नदियां मानव और समस्त जीव-जगत की जीवन रेखा मानी जाती हैं। शायद इसलिये विश्व की सभी बड़ी मानव सभ्यताऐं किसी न किसी नदी के किनारे विकसित हुई हैं। सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्त्रोत् नदियां ही होती हैं, इसके अलावा नदियों के साथ लाखों लोगों की आजीविका भी जुड़ी रहती है।

हमारे देश में कुछ नदियां ऐसी हैं, जहां वर्षभर आवश्यकता से अधिक जल रहता है, जबकि अधिकांश नदियां ऐसी हैं, जो वर्षाऋतु को छोड़कर वर्षभर सूखी ही रहती हैं या उनमें जल की मात्रा बहुत कम रहती हैं। ज्ञात आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में सतह पर मौजूद पानी की कुल मात्रा 690 बिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिवर्ष है, लेकिन इसका केवल 65 प्रतिशत पानी ही उपयोग हो पाता है। शेष पानी बह कर समुद्र में चला जाता है। नदियों में जल की असंतुलित मात्रा एवं उपलब्ध जल का समुचित उपयोग न होने के कारण हमारे देश में सूखा और बाढ़ के हालात साथ-साथ चलते हैं। ऐसे में जहां एक तरफ कृषि सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पाता है, वहीं दूसरी तरफ आबादी का एक बड़ा हिस्सा स्वच्छ पेयजल से वंचित रह जाता है, यह अत्यधिक चिंतनीय विषय है।

चिंतन के इसी दृष्टिकोण को समक्ष में रखकर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. श्री अजल बिहारी वाजपेयी जी ने देश की नदियों को जोड़कर एकीकृत जल प्रबंधन का स्वप्न देखा था। वाजपेयी जी की नदी जोड़ो परियोजना सकारात्मक रूप से अत्यधिक प्रगतिशील एवं दूरदर्शी विचार है। इससे देश में जहां एक तरफ बाढ़ एवं सूखा की आपदाऐं समाप्त होंगी, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई एवं पेयजल की समुचित उपलब्धता हो सकेगी। देश में समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकेगा और हमारा आत्मनिर्भर हो सकेगा।

हमारी केन-बेतवा लिंक परियोजना वाजपेयी जी के इसी प्रगतिशील विचार का प्रथम पायदान है। इससे बुन्देलखण्ड क्षेत्र का नवीन भाग्योदय होगा। सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जहां एक तरफ पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी वहीं दूसरी तरफ पेयजल संकट भी दूर हो सकेगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना के मूर्तरूप लेने पर अभावग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र को अनेक अप्रत्याशित लाभ होंगे :

  • प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।

  • मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 08 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषि उत्पादन बढे़गा तथा खुशहाली आएगी। इसके अतिरिक्त उत्तरप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 02 लाख 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रकार दोनों राज्यों को कुल 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

  • जल संकट से प्रभावित मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र की 41 लाख एवं उत्तरप्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी।

  • परियोजना से भू-जल स्तर की स्थिति सुधरेगी।

  • परियोजना से प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर, दतिया, शिवपुरी, विदिशा, रायसेन जिले लाभांवित होंगे।

  • परियोजना से 103 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग पूर्णरूप से मध्यप्रदेश करेगा।

  • जल आपूर्ति होने पर बुन्देलखण्ड क्षेत्र में औद्योगीकरण एवं निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

  • स्थानीय स्तर पर आमजन में आत्मनिर्भरता आएगी तथा क्षेत्र से लोगों का पलायन रुकेगा।

  • बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

  • परियोजना से उत्तरप्रदेश को सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी।

केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से पन्ना जिले का 70,000 हेक्टेयर, छतरपुर जिले का 3,11,151 हेक्टेयर, दमोह जिले का 20,101 हेक्टेयर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ीजिले का 50,112 हेक्टेयर, सागरजिले का 90,000 हेक्टेयर, रायसेन जिले का 6,000 हेक्टेयर, विदिशा जिले का 20,000 हेक्टेयर, शिवपुरी जिले का 76,000 हेक्टेयर एवं दतिया जिले का 14,000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो सकेगा तथा पर्याप्त पेयजल भी उपलब्ध हो सकेगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना एक अत्यन्त महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिसकी कुल लागत का 90 प्रतिशत भार केन्द्र सरकार द्वारा तथा 10 प्रतिशत भार राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाना है। परियोजना के संबंध में वर्ष-2005 में भारत सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन निष्पादित किया गया था, किन्तु दोनों राज्यों के मध्य जल के बटवारे को लेकर सहमति न बनने के कारण अभी तक परियोजना का कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के दृढ़संकल्प एवं मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के सार्थक प्रयासों से जल बटवारे के संबंध में दोनों राज्यों के मध्य सहमति हो गयी है। इस समझौते को साकार रूप देने में उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ होने की आशा की जा सकती है।

इस संबंध में दिनांक 22.03.2021 को माननीय प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति में परियोजना के संबंध में मध्यप्रदेश शासन, उत्तरप्रदेश सरकार एवं भारत सरकार के मध्य त्रिपक्षीय समझौता अनुबंध निष्पादित हुआ है। इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत् सामान्य वर्षाकाल में दौधन बांध से मध्यप्रदेश को 2350 एम.सी.एम. एवं उत्तरप्रदेश को 1700 एम.सी.एम. वार्षिक जल केन सिस्टम से प्राप्त होगा। जबकि गैर-वर्षाकाल (नवम्बर से मई तक) में दौधन बांध से मध्यप्रदेश को 1834 एम.सी.एम. तथा उत्तरप्रदेश को 750 एम.सी.एम. जल प्राप्त होगा।

परियोजना की वर्तमान लागत 35,101 करोड़ रूपये है। परियोजना के अंतर्गत बेतवा कछार में बीना काम्पलेक्स, कोठा बैराज तथा लोअर ओर परियोजनाओं का निर्माण किया जाना है। परियोजना से मध्यप्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ एवं दमोह जिलों में माइक्रो इरीगेशन से केन कछार में 4.51 लाख हेक्टेयर, बेतवा कछार में 2.06 लाख हेक्टेयर तथा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र के बांदा, महोबा और झांसी जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर सैंच्य क्षेत्रों में सिंचाई तथा पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जावेगी।

निःसंदेह केन-बेतवा लिंक परियोजना सूखाग्र्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिये आत्मनिर्भरता और समृद्धि के नये आयाम विकसित करेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, लोगों की आय में वृद्धि होगी तथा जीवन स्तर सुधरेगा। समावेशी विकास की परिकल्पना साकार होगी तथा आमजन में खुशहाली आयेगी।

यहां यह भी उल्लेखनीय है, कि परियोजना का कुल डूब क्षेत्र 9,000 हेक्टेयर है। डूब क्षेत्र में मध्यप्रदेश के 10 गांवों 1913 परिवारों का विस्थापन अपेक्षित है। निःसंदेह मानव समुदाय को उसके इच्छा के विरूद्ध उसके नैसर्गिक स्थान से विस्थापित किया जाना उचित नहीं है, किन्तु व्यापक दृष्टिकोण से विकास और समृद्धि को ध्यान में रखते हुए यह अपरिहार्य है। मध्यप्रदेश की लोक कल्याणकारी सरकार सर्वदा जनहित के कार्यों में संलग्न है। सरकार विश्वास दिलाती है, कि परियोजना के अन्तर्गत किये जाने वाले भूमि अधिग्रहण का समुचित प्रतिकर प्रभावितों को प्रदान किया जावेगा तथा डूब क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले विस्थापितों के पुनर्वास हेतु विधिवत् समुचित प्रबंध किये जावेंगे।

केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक परियोजना के संबंध में त्रिपक्षीय समझौता अनुबंध होना निश्चित ही मध्यप्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इससे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खुशहाली के नये द्वार खुलेंगे। प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के सार्थक प्रयासों एवं कुशल मार्गदर्शन में हम उम्मीद कर सकते हैं कि शीघ्र ही प्रदेश बुन्देलखण्ड क्षेत्र को एक सुखद् सौगात प्राप्त होगी।

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