बंद फैक्ट्रियों पर लाखों के बिल, औद्योगिक संगठन देंगे ई-धरना
बंद फैक्ट्रियों पर लाखों के बिल, औद्योगिक संगठन देंगे ई-धरना|Kratik Sahu-RE
मध्य प्रदेश

बंद फैक्ट्रियों पर लाखों के बिल, औद्योगिक संगठन देंगे ई-धरना

देशव्यापी लॉकडाउन के बीच पिछले 60 दिनों से उद्योग कारखाने बंद हैं फिर भी बिजली बिल लाखों का आ रहा है। इसी के विरोध में ई-धरना देंगे औद्योगिक संगठन।

राज एक्सप्रेस

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राजएक्सप्रेस। विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में फैल रही है। भारत भी इस महामारी से अछूता नहीं है, पिछले 60 दिनों से उद्योग कारखाने बंद पड़े हैं। उद्योगों में विद्युत उपभोग नहीं के बराबर है लेकिन विद्युत वितरण कंपनियों के तानाशाही रवैये के कारण 100 यूनिट विद्युत उपभोग पर भी लाखों के बिल थमाये जा रहे हैं। विद्युत कंपनियों के द्वारा वसूले जा रहे फिक्स चार्ज, न्यूनतम मिनिट्स और पॉवर फैक्टर का विरोध पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। अब इसके विरोध में प्रदेश के 150 से अधिक औद्योगिक संगठन ई-धरना दे कर करेंगे। इसके लिए इंदौर का औद्योगिक संगठन एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के संयोजन में पूरे प्रदेश के औद्योगिक संगठन 21 मई को सुबह 11 बजे ई-धरना देेगें।

जुड़ेंगे प्रदेश के औद्योगिक संगठन

ई-धरना के संयोजक और एआईएमपी के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया ने बताया कि लॉकडाउन के बाद लगभग सभी उद्योग 5 मिनिट भी नहीं चले हैं, लेकिन उनके बिजली के बिल लाखों में आ रहे हैं। ये बिल उद्योगों को मारने के जैसे हैं। उन्होनें कहा कि अप्रैल और मई माह में कोई उत्पादन नहीं होने के बाद भी विद्युत बिल में फिक्स चार्ज, न्यूनतम यूनिट्स और पॉवर फैक्टर के चलते लाखों रूपए के बिल आ रहे हैं।

उन्होनें बताया कि इसके लिए औद्योगिक संगठनों ने बिजली कंपनी सीएमडी, डिस्कॉम कंपनी और इलेक्ट्रिक सिटी रेग्युलेटरी और प्रमुख सचिव उर्जा को भी पत्र लिखे हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला है। ऐसे में अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुचानें के लिए प्रदेश के सभी संगठन ई-धरना देगेंं। यदि शासन उद्योगों को राहत नहीं देगा को कई उद्योग स्थाई रूप से बंद हो जाएगें। इस दिशा में देश के 8 राज्यों ने समय पर एक्शन लेकर वहां के उद्योगों को बचाने के लिए काम किया है।

बंद उद्योगों के लाखों के बिल

एआईएमपी उपाध्यक्ष प्रकाश जैन भटेवरा और योगेश मेहता ने बताया कि फिक्स चार्जेस जो कि जितना किलोवाट का विद्युत संयोजन है उतना भुगतान करना पड़ता है। यह 33 केवी के कनेक्शन पर 560 रूपए प्रति किलो वॉट का शुल्क लिया जाता है जोकि लॉकडाउन अवधि में लिया जाना सरासर गलत है। न्यूनतम यूनिट्स जो प्रतिमाह उपभोग करना जरूरी है वो लॉकडाउन में उद्योग बिजली उपभोग नहीं कर पाये उसका भी शुल्क विद्युत कंपनी द्वारा लिया जा रहा है। इसे पूरा समाप्त करने की मांग की जा रही है।

वहीं पॉवर शस्ति फैक्टर शुल्क बंद उद्योगों में लाईन लॉस का शुल्क है। बंद उद्योग में पावर फेक्टर संभाल पाना असंभव है, इसे उद्योग संचालित करते हुए संभाला जा सकता है। इससे भी छूट की मांग भी की जा रही है। यह तीनों शुल्क लगाकर विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा जो बिल उद्योगों को जारी किये गये हैं वे अव्यावहारिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है।

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