शहडोल : करोड़ों की भूमि, 61 दुकानें, किराया 51 हजार
करोड़ों की भूमि, 61 दुकानें, किराया 51 हजारRaj Express

शहडोल : करोड़ों की भूमि, 61 दुकानें, किराया 51 हजार

शहडोल, मध्य प्रदेश : दर्जनों ने अनुबंध से हटकर भाड़े पर दे दीं दुकानें। कृषि उपज मण्डी के बाबू और खादीधारी हो रहे उपकृत।

शहडोल, मध्य प्रदेश। दशकों पहले संभागीय मुख्यालय का ह्दय स्थल और व्यापार की आत्मा कहे जाने वाले गंज क्षेत्र की सब्जी व गल्ला मण्डी की दुकानें चंद लोगों की जागीर बन चुकी है, शुरूआती दिनों में जिन्होंने दुकाने ली थी, उनमें से इक्का-दुक्का ही वर्तमान में मौजूद हैं, किराये के नाम पर मण्डी के खजाने में लाखों की जगह चंद कौड़िया ही जमा हो रही हैं।

शहर के गंज और इससे सटे आवासीय और व्यवसायिक परिसरों की वर्तमान में मुख्यालय के अन्य स्थानों की तुलना में सार्वधिक मांग व कीमते हैं, दशकों पूर्व शासन द्वारा यहां कृषि उपज मण्डी कार्यालय की स्थापना की गई थी, मण्डी को मध्यप्रदेश शासन द्वारा 3 एकड़ 61 डिस्मिल भू-खण्ड आवंटित किया गया था, जिसमें मण्डी कार्यालय के साथ ही कृषि से जुड़ी गतिविधियों और उपजों के क्रय-विक्रय के लिए न सिर्फ स्थान निर्धारित किये गये थे, बल्कि काश्तकारों के बैठने और बड़े काश्तकारों से यहां आने वाली उपजों के लिए 16 गोदाम भी बने थे, मण्डी क्षेत्र का रख-रखाव होता रहे, इसके लिए शासन के खजाने से लाखों रूपये खर्च कर दुकानों का निर्माण किया गया और बाजार को विस्तृत रूप देने के लिए न्यूनतम किराये तय किये गये, शासन की यह मंशा तो, कई वर्ष पहले ही खण्डित हो गई, रही-सही कसर मण्डी के कर्मचारियों और समय-समय पर चुनकर आये जनप्रतिनिधियों ने पूरी कर दी।

करोड़ों की बेशकीमती जमीन :

कृषि उपज मण्डी को शासन द्वारा आवंटित की गई 3.61 एकड़ भूमि की वर्तमान में यदि कीमत आंकी जाये तो, वह 1 अरब से भी अधिक की होगी, वर्तमान में यहां जमीन के बाजार भाव 10 हजार स्क्वायर फिट के आस-पास है, यही नहीं 61 दुकानों का यदि दाम निकाला जाये तो, वह प्रति दुकान 40 से 50 लाख रूपये तक हो सकती है, शासन ने जिस मंशा से दुकानों का निर्माण किया था, वह तो कब की खण्डित हो चुकी और अब यह मण्डी के चंद लोगों की कमाई का जरिया बन चुकी है।

मूल हकदारों का पता नहीं :

कृषि उपज मण्डी द्वारा यहां बनाई गई कुल 61 दुकानों में 16 गोदाम, 40 दुकानें और बाकी दुकान व गोदाम का सामूहिक रूप था, प्रारंभ में जिन नियमों के तहत दुकानें आवंटित की गई थी, उस प्रारूप की तो, खुद मंडी के जिम्मेदारों और दुकानें उठाने वाले व्यापारियों ने धज्जियां उड़ा दी। शुरूआती दौर में दुकान लेने वाले लगभग व्यापारियों ने अब दुकानें या तो भाड़े पर उठा दी है या तो उनका सौदा कर वर्षाे पहले ही यहां से रवाना हो चुके हैं।

आय महज 51 हजार मासिक :

मण्डी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एक अरब से अधिक की संपत्ति का वर्तमान में महज 51 हजार के आस-पास मासिक भाड़ा मंडी को मिल रहा है, शुरूआत में तय हुई लगभग अनुबंध की शर्तें दम तोड़ चुकी हैं, समय-समय पर मंडी के चुनावों के बाद जो समिति सामने आई, उन्होंने अपने हित साधे, यही नहीं मंडी सचिव और अन्य कर्मचारियों ने भी कभी भी मंडी हित की जगह स्वहित पर ही ध्यान दिया।

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