पहाड़ से गिरते थे पत्थर तब नहीं दिया किसी ने ध्यान, लापरवाही से धसक गया पहाड़
लापरवाही से धसक गया पहाड़राज एक्सप्रेस, संवाददाता

पहाड़ से गिरते थे पत्थर तब नहीं दिया किसी ने ध्यान, लापरवाही से धसक गया पहाड़

सागर, मध्य प्रदेश : पहाड़ों को काटकर चौड़े मार्ग बनाने में लगे प्रशासन को मार्ग बनाने वाली एजेंसियों की बड़ी लापरवाहियों का अंदाजा नहीं होता जिसके कारण कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सागर, मध्य प्रदेश। संवाददाता पहाड़ों को काटकर चौड़े मार्ग बनाने में लगे प्रशासन को मार्ग बनाने वाली एजेंसियों की बड़ी लापरवाहियों का अंदाजा नहीं होता जिसके कारण कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। एसा ही कुछ गढ़पहरा-धामौनी मार्ग पर शुक्रवार रात हुआ जहां राष्ट्रीय राज मार्ग से जोडऩे वाली एक वैकल्पिक सड़क पर पहाड़ आ गिरा। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह सिर्फ एक संयोग ही था कि जनहानि नहीं हुई अन्यथा यह मार्ग भी निरंतर चलता रहता है।

पत्थर न गिरें इसकी कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की

गौरतलब है कि आस पास बने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई बार पहाड़ों से गिरने वाले पत्थर देखे गए हैं। उस समय से लेकर अब तक प्रशासनिक अधिकारियों ने यह पत्थर तो हटवाए लेकिन यह पत्थर न गिरें इसकी कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की जिसका परिणाम यह हुआ कि पहाड़ ही धंसकर नीचे आ गया और 12 घंटे तक यह मार्ग बंद रहा। अगर इस तरह की लापरवाही चलती रही तो पास में ही बने राष्ट्रीय राजमार्ग पर इसी तरह की बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है क्योंकि वहां पर आए दिन बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ से नीचे गिरते रहते हैं।

हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती

नरयावली व बंडा विस क्षेत्र को जोडऩे वाले गढ़पहरा-धामौनी मार्ग का भोजपुरा घाट अब भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है। एमपीआरडीसी ने भोजपुरा घाट पर गिरने वाले पत्थरों की घटनाओं को रोकने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये से काम कराया लेकिन अब भी घाट के पत्थर व मलबा जमीन पर गिर रहा है। इससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। शुक्रवार की रात भी घाट धंसकने की वजह से बड़े पत्थर सड़क पर आ गए। इससे करीब 12 घंटे तक यह मार्ग बंद रहा। यह गनीमत रही कि पहाड़ धंसकने के दौरान कोई वाहन वहां से आ-जा नहीं रहा था, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।

ध्यान नहीं दिया गया तो बढ़ी घटना हो सकती है

लोगों का कहना है कि घाट पर पत्थर गिरने की घटनाओं को बंद करने के लिए एक साल पहले घाट कटाई का शुरू किया गया था। इसके लिए उत्तराखंड से इंजीनियरों का दल बुलाया गया था। इस दल के मार्गदर्शन में ठेकेदार ने काम को किया। इस पर डेढ़ करोड़ रुपये व एक साल का वक्त लगाए लेकिन घाट के पत्थर गिरने की घटनाएं अब भी नहीं रुक रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बढ़ी घटना हो सकती है।

पत्थर के साथ मिट्टी होने से बन रही समस्या

एमपीआरडीसी के जीएम अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि भोजपुरा घाट में कठोर पत्थर होने के साथ मिट्टी है। इसी वजह से यहां बरसात में लैंड स्लाडडिंग की समस्या आ रही है। अभी केवल पत्थर कटिंग का काम हुआ है। आगे पानी निकासी के लिए नालियां बनाई जाना है। जहां मिट्टी अधिक है, वहां घास उगाई जाएगी। अभी इसी साल घाट कटिंग का काम हुआ है, इसीलिए यह समस्या आ रही है। आने वाले दिनों में इसमें सुधार होगा।

प्रशासन ने आनन-फानन में शुरू किया मार्ग बहाल करने का कार्य

गढ़पहरा से धामोनी जाने वाले सड़क मार्ग पर शुक्रवार रात तेज बारिश होने के कारण भोजपुरा पहाड़ी धसकने से मार्ग अवरुद्ध हो गया था। मामले की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर दीपक आर्य ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया। कलेक्टर के निर्देश पर एमपी एमपीआरडीसी के अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए गढ़पहरा धामोनी मार्ग जोकि पहाड़ी धसकने से अवरुद्ध हो गया था उसको साफ करा कर आवागमन हेतु चालू कराया गया।

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