लैंक्सेस उद्योग प्रबंधक शहर की यातायात व्यवस्था के साथ कर रहा है खिलवाड़
सिर्फ अपने को पाक साफ दिखाने के लिए लैंक्सेस उद्योग प्रबंधक शहर की यातायात व्यवस्था के साथ कर रहा है खिलवाड़। भूसे के ट्रकों को लेकर लोगों में आक्रोश, दिन में प्रतिबंध नहीं लगा तो करेंगे आंदोलन।
लैंक्सेस उद्योग प्रबंधक शहर की यातायात व्यवस्था के साथ कर रहा है खिलवाड़
लैंक्सेस, नागदाSocial Media

नागदा जं., मध्य प्रदेश। शहर में यातायात व्यवस्था वैसे ही नहीं सुधर रही है और अब लैंक्सेस उद्योग मे आने वाले भूसे के ट्रालों के कारण उद्योग कि ओर जाने वाले मार्गो में यातायात तो बाधित हो रहा है आए दिन लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। एक विदेशी कंपनी के कारण इतना हो रहा है पर स्थानीय प्रशासन व पुलिस इस ओर ध्यान नहीं देने के कारण लोगों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। भूसे के ट्रालों पर दिन में शहर में घुसने पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो उद्योग के खिलाफ लोग मैदान में उतरेंगे।

लैंक्सेस उद्योग में बड़ी मात्रा में सोयाबीन का भूसा का उपयोग होता है पॉवर प्लांट में इसकी खपत होती है। सोयाबीन के भूसे की आवक की सीजन चल रही है। बड़ी मात्रा में भूसा लगने के कारण जिला ही नहीं आसपास के जिले सहित होशंगाबाद, भोपाल तक का भूसा उद्योग द्वारा खरीदा जाता है यह भूसा बड़े ट्राले ओर त्रिपाल लगाकर भूसा भरते हैं तो उसकी ऊंचाई और चौड़ाई भी काफी बढ़ जाती है। पीछे से आने वाले आगे का कुछ दिखाई नहीं देता है और ऐसे भूसे से भरे हुए ट्राले बेधड़क शहर के मुख्य मार्गो पर प्रतिदिन सैकड़ों ट्राले लैंक्सेस उद्योग में जा रहे है वैसे तो यातायात पुलिस जवान अन्य वाहनों पर कार्यवाही करते है पर लैंक्सेस उद्योग में जाने वाले ट्रालों कि ओर देखते ही नहीं है जबकि इन ट्रालों के कारण यातायात प्रभावित तो हो ही रहा है। प्रतिदिन इन ट्रालों के कारण दो चार लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे है। इसके बाद भी उद्योग प्रबंधक इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

लैंक्सेस के ट्राले हैं इसलिए :

यह ढर्रा एक दो दिन से नहीं पिछले दो माह से चल रहा है। यातायात बाधित तो प्रतिदिन हो ही रहा है शाम को बिरलाग्राम पेट्रोल पम्प के सामने लगभग 10-12 ट्राले एक साथ पहुंच गए। इसके कारण लगभग दो घंटे तक यातायात जाम हो गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि लैंक्सेस उद्योग बिड़ला समूह का नहीं है यदि इस उद्योग में आने जाने वाले वाहन के कारण कोई गड़बड़ी होती है तो ग्रेसिम व अन्य उद्योग के सुरक्षाकर्मी मदद नहीं करते हैं इसके कारण और ज्यादा यातायात प्रभावित होता है।

दिन में लगाना चाहिए प्रतिबंध :

पुलिस व प्रशासन को भूसे के ट्रालों को दिन में शहर में घुसने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। पर प्रशासन इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा है। प्रतिदिन हो रही दुर्घटनाओं को लेकर लोगों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है इकां नेता चेतन नामदेव ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उद्योग में आने वाले भूसे के बड़े ट्रालों पर दिन में प्रतिबंध लगाया जाए। यदि प्रशासन प्रतिबंध नहीं लगाता है तो हम इसको लेकर आंदोलन करेंगे। इसकी समस्त जवाबदारी प्रशासन की होगी।

अंदर घुसे तो चलेगा पता :

वैसे लैंक्सेस उद्योग जितना भी भूसा खरीदता है उसका एकत्रितकरण गांव उमरना में किया जाता है। इसके लिए वह बकायदा बाउंड्रीवाल बनाकर पानी का पाईप भी बीछा रखी है ताकि भूसे में आग लग जाए तो तुरंत काबू कर लिया जाए। भूसे के तौल के लिए ट्रालों को उद्योग में लाया जाता है ताकि उमरना में ट्राला खाली होतो तोल बराबर निकले, जबकि सूत्रों के अनुसार उद्योग के ही कुछ लोग भूसे के ट्रकों में बड़े बड़े पत्थर रखकर तौल करवाते हैं ताकि भूसे का वजन बढ़ जाए। उद्योग के अधिकारी दिखावे के लिए भले ही तौल के लिए ट्राले उद्योग में बुलाकर शहर की यातायात व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे है पर यह भी अंदर तक व्यक्ति जाए तो पता नहीं क्या क्या गुल अंदर खिला रहे हैं।

इनका कहना है :

भूसे के जो वाहन आ रहे हैं उसे दिखवाया जाएगा, नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

मनोज रत्नाकर, सीएसपी नागदा

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