शैलेंद्र तिवारी की नई किताब "लंका रावण की नगरी" लांच
शैलेंद्र तिवारी की नई किताब "लंका रावण की नगरी" लांचShahid Kamil

शैलेंद्र तिवारी की नई किताब "लंका रावण की नगरी" लांच

भोपाल, मध्यप्रदेश: राम, रावण और रामायण से जुड़ी घटनाओं को बनाया हिस्सा, उन घटनाओं पर व्यापक तरीके से बात की, जो कम लोगों को मालूम हैं।

भोपाल, मध्यप्रदेश। राम, रावण और रामायण को केंद्रित कर लिखी गई किताब "लंका रावण की नगरी" लांच हो गई है। इस किताब में राम और रावण के बीच चले युद्ध को करीब से देखने की कोशिश की गई है। इसमें बताने का प्रयास किया गया है कि युद्ध के दौरान लंका से लेकर अयोध्या के बीच में क्या हो रहा था। किताब में कई चौंकाने वाली बातों पर भी प्रकाश डाला गया है।

लंका रावण की नगरी किताब के लेखक शैलेंद्र तिवारी के मुताबिक, किताब में युद्ध को करीब से बताने का प्रयास किया है कि आखिर राम और रावण के बीच का यह युद्ध कितने दिन चला और इस बीच में क्या घटनाएं हुईं? आखिर क्यों सीता लंका के भीतर राम पर क्रोधित हो गईं? क्यों राम ने सीता को विभीषण के साथ रहने के लिए बोल दिया? यह वह सभी घटनाएं हैं, जो रामायण में कहीं न कहीं लिखी हुई हैं लेकिन उन पर विस्तार से बात नहीं हुई है। जैसे कैकेयी को हमेशा एक नकारात्मक छवि में ही देखा जाता है, लेकिन मैंने उस घटना के सभी संदर्भों को तलाशकर दावा किया है कि कैकेयी ने राम को वनवास भेजकर अल्पायु होने से बचाया था। भरत को राजगद्दी देने के पीछे खुद राम थे, क्योंकि वह अपने पिता का एक वचन पूरा करना चाहते थे।

दरअसल, "लंका रावण की नगरी" किताब "रावण एक अपराजित योद्धा" का अगला भाग है, जिसमें लेखक ने दावा किया था कि रावण ने राम के पैदा होने से 32 पीढ़ी पहले अयोध्या पर विजयपताका फहराई थी। जहां उसे मृत्यु का श्राप मिला था। ठीक उसी तरह से यह भी बताया कि सीता कभी लंका नहीं गईं, सीता के रूप में लंका कौन गया और उसका राम और रावण से क्या रिश्ता था। शैलेंद्र कहते हैं, दोनों किताबें रामायण को एक अलग अंदाज में बताने की कोशिश करती हैं। वह घटनाएं जिन्हें बाबा तुलसीदास और बाबा बाल्मीकि से लेकर बाबा कम्बन ने विस्तार से बताने के बजाय सिर्फ इशारों में कहकर आगे बढ़ गए, उन्हें विस्तार देने की कोशिश की है। समझाने का प्रयास किया है कि राम और रावण होने का मतलब क्या है? रावण के जीवन की वो घटनाएं जो सामान्य तौर पर किसी को मालूम नहीं हैं, उन्हें बताने की कोशिश की है।

शैलेंद्र तिवारी कहते हैं कि इस किरदार के सहारे मेरी कोशिश थी कि मैं रामायण, राम और रावण को नई पीढ़ी को करीब से दिखाने का प्रयास करूं। आज लिखने के लिए किस्से, कहानियां और कुछ भी लिखा जा सकता है, लेकिन बेहतर है कि हम अपनी नई पीढ़ी को नई दिशा दिखाएं। महाशक्तिशाली योद्धा रावण ने भी अपने जीवन में प्रेम विवाह किया, अवसाद को देखा, परिवार में धोखा खाया...बावजूद इसके वह फिर से मजबूत होकर खड़ा हुआ। यही जीवन है और इसी को समझने की जरूरत है। राम को समझने के लिए रावण को समझना जरूरी है। राम और रावण को लेकर उठते कई सवालों का जवाब इस किताब में देने की कोशिश की है।

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