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मध्यप्रदेश में किसानों की आफत बनी भारी बारिश
मध्यप्रदेश में किसानों की आफत बनी भारी बारिश|Syed Dabeer Hussain - RE
मध्य प्रदेश

मानसून और महंगाई की किसानों पर दोहरी मार

मध्यप्रदेश में इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुयी 32 जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और इसके साथ प्रदेश के किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है। जानिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में किसानों की वास्तविक पीड़ा

Rishabh Jat

इस वर्ष हुयी भारी बरिश ने किसानों की समस्या बढ़ा दी है प्रदेश में अब तक सात लाख हेक्टेयर की फसलें बरबाद हो चुकी हैं और वर्षा रुकने के बाद ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है। इन परिस्थितियों में किसानों का एकमात्र सहारा सरकार ही है जो मुआवजा राशि प्रधान कर के किसानों की सहायता कर सकती है अन्यथा किसानों के लिए आने वाले समय में खेती करना बहुत मुश्किल हो जायेगा, इस बार सरकार भी एक्शन में दिख रही है। मुख्यमंत्री के आदेश समस्त बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के कलेक्टरों को दिए जा चुके हैं लगातार नुकसान का जमीनी स्तर पर आंकलन किया जा रहा है जिससे किसानों को जल्द से जल्द मदद प्रदान की जा सके।

आखिर कितना हुआ है नुकसान?

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में छह से सात लाख हेक्टेयर रकबे सोयाबीन, मूंग, उड़द और सब्जी की फसलें बर्बाद हो गई हैं। फसलें पानी में कई दिनों से डूबी हैं।

मूंग, उड़द और सब्जियां गल चुकी हैं, जबकि सोयाबीन के पत्ते पीले पड़ गए हैं। कई जगहों पर फली न आने या दाना नहीं पड़ने की शिकायतें मिली हैं तो कहीं पौधे में ही फलियां अंकुरित हो गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान मूंग-उड़द और सोयाबीन को हुआ है।