मध्यप्रेदश सरकार लाने जा रही "स्वास्थ्य का अधिकार कानून"
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मध्यप्रेदश सरकार लाने जा रही "स्वास्थ्य का अधिकार कानून"

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में इस एक्ट को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र कर्मचारियों ने चर्चा की।

राज एक्सप्रेस। प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ सुविधाएं मिल सकें इसके लिए प्रदेश सरकार जल्द ही राइट टू हेल्थ (स्वास्थ का अधिकार) कानून लागू करने जा रही है। सरकार कई महीनों से इस योजना को लागू करने की बात कर रही थी, लेकिन अब कमलनाथ सरकार ने इस योजना के लिए खाका तैयार कर लिया है।

शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में संभागी बैठक हुई, जिसमें डॉक्टर्स व मेन पॉवर की उपलब्धता, जाँच, मरीजों की सुविधा और रैफरल सिस्टम मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, शिशु स्वास्थ्य व स्वास्थ्य पर काम कर रहे एनजीओ और अधिकारियों ने एक्ट बनाने के लिए जरूरी प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की।

11 सदस्यों की समिति

स्वास्थ का अधिकार कानून लागू करने के लिए सरकार ने 11 सदस्यों की समिति का गठन किया है। ग्वालियर और जबलपुर में भी इस परियोजना को लेकर बैठक हो चुकी है। राज्य स्तरीय बैठक भी हो चुकी है, अब एक नवंबर को राष्ट्रीय कॉन्क्लेव किया जाएगा।

प्रदेश की 1 करोड़ 80 लाख आबादी को मिलेगा फायदा

जानकारी मिली है कि, इस योजना से प्रदेश के 1 करोड़ 80 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। खबरों के अनुसार प्रदेश के गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे लोगों को आयुष्मान योजना का सही ढंग से लाभ नहीं मिल रहा इसलिए प्रदेश सरकार राइट टू हेल्थ एक्ट पर काम कर रही है, ताकि यह जल्द से जल्द लागू हो सके।

क्या है स्वास्थ्य का अधिकार कानून

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है। जीने का अधिकार में स्वास्थ का अधिकार का भी वर्णन किया गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। 10 दिसंबर 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार का पक्ष रखते हुए यूनिवर्सल घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें स्वास्थ्य अधिकार को महत्ता दी गई थी।

मध्यप्रदेश के अलावा इस राज्य में भी होगा राइट टू हेल्थ

मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान भी स्वास्थ्य का अधिकार कानून लागू करने वाला है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस कानून पर काम कर रहे हैं। खबरों की मानें तो आगामी विधानसभा सत्र में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य का अधिकार बिल पेश कर सकती है। इस कानून के तहत राजस्थान के लोगों को सरकारी अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों में भी नि: शुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी।

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