Madhya Pradesh : कमलनाथ के फरमान से कांग्रेस दावेदारों की टूटी आस
कमलनाथ के फरमान से कांग्रेस दावेदारों की टूटी आसSocial Media

Madhya Pradesh : कमलनाथ के फरमान से कांग्रेस दावेदारों की टूटी आस

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : अब दूसरे वार्ड से नहीं लड़ सकेगें पार्षद का चुनाव। जिस वार्ड का निवासी उसी वार्ड के रहने वाले को दिया जाएगा टिकट।

मध्यप्रदेश। नगर निगम में पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदार अभी अपना वार्ड रिजर्व कोटे मेें जाने के बाद दूसरे वार्ड से दावेदारी कर रहे थे और चुनावी तैयारी भी कर दी थी, लेकिन कमलनाथ के एक फरमान ने ऐसे दावेदारों की आस तोड़ कर रख दी। आरक्षण प्रक्रिया होने के बाद कई दावेदार दूसरे वार्ड से तैयारी कर रहे थे और उनको टिकट दिलाने का भरोसा भी विधायक व अन्य बड़े नेताओं ने दिया था।

कांग्रेस की तरफ से नगर निगम के 66 वार्डो के लिए पार्षद पद के प्रत्याशियो की घोषणा अभी होना है और इसको लेकर शहर व ग्रामीण अध्यक्ष के अलावा अन्य कुछ कांग्रेस नेता भोपाल में डेरा डाले हुए है। महापौर पद पर अपने पत्नी को टिकट दिलाने में नाकाम रहने के बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष को हर विधानसभा में कुछ वार्डों में अपने हिसाब से प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी देकर उनको संतुष्ट किया जा सकता है, क्योंकि वह विधायक की पत्नी शोभा सिकरवार के टिकट मिलने के बाद से खासे नाराज बताएं जा रहे हैं। अब उनकी नाराजगी कितने दिन रहती है यह तो समय ही बताएगा, लेकिन कुछ हद तक वह जिसके लिए लड़ रहे थे उसमें सफल भी दिखाई दिए। वार्ड पार्षद प्रत्याशी के लिए विधायक से लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष व अन्य बड़े कांग्रेस नेताओं ने अपनी-अपनी सूची बना रखी थी, लेकिन इस सूची में दूसरे वार्ड के दावेदारों के नाम शामिल थे, परन्तु अब ऐसे दावेदार दूसरे वार्ड में चुनाव नहीं लड़ सकेगें इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने रविवार को एक आवश्यक आदेश जारी किया।

कमलनाथ का आदेश
कमलनाथ का आदेशRaj Express

सूची बनाकर रखी थी अब करना होगा बदलाव :

विधायक व अन्य बड़े नेताओं ने पार्षद प्रत्याशियों के लिए नाम तय कर सूची बना रखी थी, लेकिन कमलनाथ के फरमान के बाद अब उनको इस सूची में बदलाव करना पड़ सकेगा। सूत्र का कहना है कि कमलनाथ के पास इस तरह की शिकायते पहुंची थी कि जिस वार्ड में कांग्रेस कार्यकर्ता रहते है उनको नजरअंदाज किया जा रहा है और दूसरे वार्ड से प्रत्याशी लाकर उनके वार्ड में खड़ा किया जा रहा है। सूत्र का कहना है कि कमलनाथ के पास यह भी शिकायत की गई थी कि पार्षद प्रत्याशी के लिए लेन-देन भी किया गया है, लेकिन इस शिकायत में कितना दम है यह तो पता नहीं, लेकिन कमलनाथ ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वार्ड में रहने वाले कार्यकर्ताओ को महत्व देने का काम करते हुए एक आदेश जारी किया है कि अब जिस वार्ड में कांग्रेस कार्यकर्ता है उसी वार्ड के कार्यकर्ता को टिकट दिया जाएं दूसरे वार्ड में रहने वाला दूसरे वार्ड में चुनाव नहीं लड़ सकेगा।

अब आदेश का पालन कितना होगा :

कांग्रेस मे आदेश तो निकाले जाते है, लेकिन उसका पालन कितना होता है यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। फिलहाल इस आदेश के आने के बाद से कई पार्षद पद के दावेदारो के अरमानों पर पानी जरूर फिर गया है, क्योंकि उन्होंने पहले से ही अपना वार्ड आरक्षित होने के बाद दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी थी। इसमें विकास जैन, गंगा अलबेल घुरैया, चतुभुर्ज धनोलिया, इब्राहिम पठान, उपासना सिंह, हेवरन कंसाना, तरुण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित सहित कई दावेदार ऐसे है जिनकी दावेदारी कमलनाथ के आदेश के फेर में फंस गई है।

कमलनाथ के आदेश का होने लगा विरोध :

इधर कमलनाथ ने वार्ड के निवासी को ही पार्षद प्रत्याशी बनाने का आदेश जारी किया तो उधर कांग्रेस के अंदर ही इसका विरोध होने लगा है। गोपीलाल भारतीय ने इस आदेश को तानाशाहपूर्ण बताया। भारतीय ने कहा कि कमलनाथ को इस तरह का आदेश वापिस लेना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस के अंदर इस आदेश के बाद से विरोध काफी बढेगा। फिलहाल अभी को भारतीय की ही प्रतिक्रिया सामने आई है, लेकिन आगे चलकर इस आदेश के विरोध में काफी कांग्रेसी सामने आ सकते है, क्योंकि इस आदेश से कई दावेदार जो लम्बे समय से कांग्रेस की राजनीति कर रहे है उनको घर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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