पंचायत और निकाय चुनाव में हो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पंचायत और निकाय चुनाव में हो सुरक्षा के पुख्ता इंतजामSocial Media

पंचायत और निकाय चुनाव में हो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भोपाल, मध्यप्रदेश : कलेक्टरों के साथ बैठक के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने एसीएस गृह डॉ. राजेश राजौरा और डीजीपी सुधीर सक्सेना के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।

भोपाल, मध्यप्रदेश। कलेक्टरों के साथ बैठक के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने एसीएस गृह डॉ. राजेश राजौरा और डीजीपी सुधीर सक्सेना के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें चुनाव को लेकर सुरक्षा इंतजामों को लेकर विमर्श किया गया। इस दौरान आयुक्त ने दोनों ही आला अफसरों से कहा कि नगरीय निकाय एवं त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए समुचित सुरक्षा व्यवस्था करें। सिंह ने कहा कि संवेदनशील एवं अति संवेदनशील मतदान-केंद्रों पर विशेष ध्यान रखें। कहीं पर भी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नगरीय निकायों में पार्षदों का चुनाव करवाया जाएगा। महापौर अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाएगा।

पीएस पंचायत भी तलब :

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने गुरुवार को पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उमाकांत उमराव को भी तलब किया। इस दौरान पंचायतों में आरक्षण को लेकर ताजा स्थिति के बारे में फीडबैक लिया। इसी क्रम में शासकीय मुद्रणालय के कंट्रोलर के साथ भी आयोग ने देर शाम बैठक की। दरअसल पंचायतों के चुनाव बैलेट पेपर से होना है, जिसकी प्रिंटिंग की जिम्मेदारी शासकीय मुद्रणालय की होगी।

रिव्यू पिटीशन से राहत के आसार नहीं :

राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण के बगैर स्थानीय चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने जा रही है, लेकिन इससे कोई राहत मिलने के आसार कम ही है। यह इसलिए भी कि इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य के लिए भी ऐसा ही निर्णय दिया है। यदि राज्य सरकार वर्ष 2018 से पहले वाली स्थिति में चुनाव कराने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से मांगती है, तो फिर ओबीसी वर्ग को पुरानी स्थिति के हिसाब से 14 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल सकता है। इससे आरक्षण की सीमा 50 फीसदी के भीतर बनी रहेगी, लेकिन 27 फीसदी में यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए 50 फीसदी की सीमा से ज्यादा हो जाएगा। ऐसे में सरकार अपनी नाक बचाने के लिए वर्ष 2018 की स्थिति के मुताबिक ही चुनाव कराने की अनुमति देने का आग्रह सुप्रीम कोर्ट से कर सकती है। इन कयायों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना कम ही जताई जा रही है।

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