अब गांवों की सड़कों से भी होगी टोल वसूली
अब गांवों की सड़कों से भी होगी टोल वसूलीसांकेतिक चित्र

अब गांवों की सड़कों से भी होगी टोल वसूली

नई सड़कों को बनाने के साथ पहले से बनी सड़कों की मरम्मत के लिए राशि जुटाई जा सके। इसके लिए अब प्रदेश की ग्रामीण सड़कों से टोल वसूली होगी। टोल ऐसी सड़कों से ही वसूला जाएगा जिससे कि भारी वाहन गुजरते हैं।

हाइलाइट्स :

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

  • सड़कें बनाने के लिए आमदनी जुटाने की कवायद

भोपाल, मध्यप्रदेश। वैसे तो मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शुमार है, जहां सबसे अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। प्रदेश में अब तक 87 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर लिया गया है, लेकिन अब भी सभी गांवों को बारहमासी सड़कों से नहीं जोड़ा जा सका है। ऐसे में अब सरकार की गांवों की इन सड़कों से आमदनी का नया जरिया निकालने की कोशिश है, जिससे कि नई सड़कों को बनाने के साथ पहले से बनी सड़कों की मरम्मत के लिए राशि जुटाई जा सके। इसके लिए अब प्रदेश की ग्रामीण सड़कों से टोल वसूली होगी। राहत की बात यह है कि ऐसी सड़कों से ही टोल वसूली होगी जिससे कि भारी वाहन गुजरते हैं। इन भारी वाहनों के कारण ही सड़कें खराब होती हैं और बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इसलिए अब सरकार मरम्मत और निर्माण में सरकारी पैसा लगाने के बाद उन सड़कों से टोल वसूल करेगी। प्रदेश में 4100 किलोमीटर से अधिक ऐसी सड़कें हैं, जिन्हें प्रारंभिक तौर पर ऐसी सड़कों के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब इस पर अमल करने की तैयारी है। मिले संकेतों के मुताबिक इसी वर्ष से इस पर अमल शुरू कर दिया जाएगा। सबसे पहले प्रदेश में ऐसे ग्रामीण सड़कों को चिन्हित किया जाएगा, जहां सबसे पहले टोल वसूली की व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्र जहां कि खनन का काम होता है। वहां डंपर जैसे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। इन डंपरों के कारण ग्रामीण सड़कों को भारी नुकसान पहुंचता है। इसका खामियाजा एेसे लोगों को भुगतना पड़ता है जो कि इन सड़कों का नियमित रूप से उपयोग आवागमन के लिए करते हैं। वहां सबसे पहले यह व्यवस्था लागू होगी।

पायलट रूप में होगा लागू :

प्रदेश में भारी वाहनों के परिवहन वाले ग्रामीण सड़कों की पहचान करने के बाद यहां सबसे पहले मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण सड़कों को सबसे पहले मरम्मत कर बेहतर बनाने की कोशिश करेगा। उसके बाद यहां टोल की वसूली होगी। इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। यह इसलिए कि टोल वसूली की स्थिति बनने के बाद स्थानीय लोगों पर इसका असर भी देखा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि ग्रामीणों के बीच इसे लेकर कोई विरोध की स्थिति तो नहीं बनती। यह व्यवस्था लागू होने पर किसानों के परिवहन से जुड़े ट्रेक्टर आदि अन्य उपकरणों को इन सड़कों से बगैर टोल के आने-जाने की सुविधा रहेगी। इसी तरह स्थानीय स्तर पर कार आदि का उपयोग करने वालों को पास की व्यवस्था की जाएगी। कोशिश यह होगी कि केवल भारी वाहनों से ही टोल की वसूली हो। दो पहिया वाहनों पर किसी तरह की रोक नहीं होगी। इस तरह की सुविधा होने के बाद भी कई बार टोल बूथ पर विवाद की स्थिति बन जाती है। इस पर भी निगरानी रखी जाएगी।

शुरू में सौ से अधिक सड़कों पर यह लागू होने की संभावना :

मिले संकेतों के मुताबिक शुरू में प्रदेश के सभी जिलों की एक या दो सड़कों का चयन टोल वसूली के लिए किया जाएगा। इससे जिले का रिस्पांस भी पता चल जाएगा। ऐसे में शुरुआत में प्रदेश की कम से कम 100 ग्रामीण सड़कों से टोल वसूली होगी। उसके बाद इसका दायरा बढ़ाया जाएगा।

आत्मनिर्भर मप्र के तहत भी मिले हैं सुझाव :

राज्य सरकार ने तीन वर्ष की अवधि में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। आत्मनिर्भर मप्र के लिए मंत्रियों की टास्क फोर्स भी बनाई गई थी। उससे पहले आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव भी लिए गए थे। लिहाजा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को इस तरह के सुझाव भी मिले थे। बाद में विभाग ने इस पर सहमति जताते हुए अनुशंसा में शामिल किया था। अब इन अनुशंसाओं पर अमल की तैयारी है, जिससे कि वर्ष 2023 तक विधासभा चुनाव से पहले प्रदेश के सभी मजरों, टोलों को भी पक्की सड़कों से जोड़ा जा सके।

ग्रामीण सड़कों के लेखा-जोखा पर एक नजर :

  • प्रदेश में कुल ग्रामीण सड़कें स्वीकृत - 96,114 किमी

  • अब तक कुल ग्रामीण सड़कों का निर्माण - 87,506 किमी

  • फिर से संधारण योग्य ग्रामीण सड़कें - 84,286 किमी

  • पांच वर्ष की परफार्मेंस गारंटी के दायरे में - 25,126 किमी

  • परफार्मेंस गारंटी की अवधि पूरी करने वाली - 63,380 किमी

  • दोबारा डामरीकरण वाली ग्रामीण सड़कें - 38,750 किमी

  • भारी वाहन वाली ग्रामीण सड़कें - 4,103 किमी

  • भारी वाहन वाली ग्रामीण सड़कें जिनको बेहतर बनाया गया - 3837 किमी

  • सुदृढ़ीकरण पर खर्च राशि - 1642 करोड़ रुपए

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

No stories found.
Top Hindi News Bhopal,Trending, Latest viral news,Breaking News - Raj Express
www.rajexpress.co