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महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही फिर आई सामने
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही फिर आई सामने|Syed Dabeer Hussain - RE
मध्य प्रदेश

खण्डवा: महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही फिर आई सामने

खण्डवा, मध्य प्रदेश: महिला एवं बाल विकास विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण मासूम बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार नाले में पहुंचा।

Gaurav Jain

हाइलाइट्स:

  • खण्डवा जिले में एक बार फिर लगा कुपोषण का कलंक

  • कुपोषण मिटाने वाली संस्था, महिला बाल विकास की लापरवाही आई सामने

  • बच्चों के हक का पोषण आहार को बहाया नालों में

  • जांच करने के लिए की गई मांग

राज एक्सप्रेस। कुपोषण के दहलीज पर खड़े खण्डवा जिले में हर माह कुपोषण के कारण बच्चों की मौतें हो रही है, वहीं कुपोषण मिटाने वाली संस्था महिला बाल विकास की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। देखिए किस तरह एक तरफ जिले में बच्चे खाने के लिए तरस रहे हैं, तो वहीं बच्चों के हक का पोषण आहार को नालों में बहा दिया जाता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही फिर आई सामने
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही फिर आई सामने
Gaurav Jain

की गई जांच करने की मांग :

ये खालवा क्षेत्र के वो बच्चे हैं, जो कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। ऐसे में इन मासूमों के हक का निवाला अगर इनका पोषण करने के बजाय नाले में पड़ा मिले तो, इसे आप अपराध नहीं तो और क्या कहेंगे? जी हाँ यही अपराध खण्डवा जिले में हुआ है। कुपोषण के लिए बदनाम खण्डवा जिले में महिला बाल विकास की बड़ी लापरवाही सामने आई है। खालवा के जंगलों में बच्चों को आंगनबाड़ियों से मिलने वाला पोषण आहार खेत के नाले में बड़े पैमाने पर फेंका हुआ पाया गया। स्थानीय लोगों ने जब इसे देखा तो चौंक गए। पोषण आहार के करीब 20 पैकेट नाले में तैर रहे थे। ये कोई एक्सपायर अवधि के नहीं बल्कि जुलाई माह के हैं, जिसकी अवधि नवंबर माह में समाप्त होगी। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर इन पोषण आहारों को जिस बेदर्दी से फेंका गया है। यह किसी के सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। पंधाना विधायक राम डांगोरे ने पूरे मामले में जांच की मांग की है। जब इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी, जिला प्रशासन को दी गई, तो उन्होंने मौके पर टीम भेजकर जांच का भरोसा दिलाया है।

महिला बाल विकास की लापरवाही का पहला मामला नहीं :

बहरहाल, कुपोषण के लिए बदनाम इस जिले में महिला बाल विकास की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बच्चों को बाँटने वाला दूध का पैकेट भी बड़े पैमाने पर जलाने के मामले में लीपापोती हो चुकी है। अब देखना यह है कि, क्या वाकई बच्चों को इन्साफ मिलेगा या नहीं?