मध्य प्रदेश : भारत की पैडवुमन 'माया विश्कर्मा' बनी मेहरागांव की सरपंच
मध्य प्रदेश : भारत की पैडवुमन माया विश्कर्मा बनी मेहरागांव की सरपंच Social Media

मध्य प्रदेश : भारत की पैडवुमन 'माया विश्कर्मा' बनी मेहरागांव की सरपंच

मध्य प्रदेश के मेहरागांव या कहें गाडरवारा में सरपंच पद के लिए भारत की पैडवुमन कही जाने वाली माया विश्कर्मा को चुना गया है। हालांकि, उनके साथ अन्य 11 महिलाओं को भी पंच निर्विरोध के रूप में चुना गया है।

मध्य प्रदेश, भारत। आज हर क्षेत्र में चाहे वो प्राइवेट सेक्टर हो या सरकारी सेक्टर महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। महिलांए आज ऊंचे से ऊंचे पद पर पोस्टेड हैं। कहने का मतलब है कि, आज महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। इसी कड़ी में अब मध्य प्रदेश के मेहरागांव या कहें गाडरवारा में सरपंच पद के लिए भारत की पैडवुमन (Padwomen of India) कही जाने वाली 'माया विश्कर्मा' (Maya Vishwarama) को चुना गया है। हालांकि, उनके साथ ही अन्य 11 महिलाओं को भी पंच निर्विरोध के रूप में चुना गया है।

भारत की पैडवुमन बनी गाडरवारा की सरपंच :

दरअसल, भारत की मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक गांव की रहने वाली, माया विश्वकर्मा, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से इस देश में एक अलग ही स्थान पाया है। उन्हें भारत की पैडवुमन के रूप में जाना जाता है। वहीं, अब उन्हें एक नई पहचान मिल गई है,जो कि, मध्य प्रदेश के मेहरागांव या कहें गाडरवारा में सरपंच के रूप में मिली है। जी हां, मेहरागांव (गाडरवारा) के नए सरपंच के रूप में माया विश्वकर्मा को चुना गया है। साथ ही अन्य 11 महिलाओं को पंच निर्विरोध के पद पर नियुक्त किया गया है।

कौन है माया विश्कर्मा :

आप भारत के पैडमेन को तो अक्षय कुमार की फिल्म पैडमेन के जरिए भी जान गए होंगे, लेकिन क्या आप भारत की पैडवुमन को जानते है। यदि नहीं तो हम आपको बताते है, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक गांव की रहने वाली, माया विश्वकर्मा महिलाओं को हर महीने होने वाले पीरियडस (मासिक धर्म) से जुड़े तमाम मिथक को समाज से मिटा कर लोगों तक सही ज्ञान पहुंचाने की कोशिश में लगी हैं। इतना ही नहीं माया विश्वकर्मा ने बचपन से कई तरह की समस्याओं को देखा था, इसलिए उन्होंने ठान ली थी कि, वह ग्रामीण महिलाओं में मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर जागरूकता फैलाएंगी और उन्हें इस बारे में शिक्षित करेंगी। इसी उद्देश्य के साथ वह कैलिफोर्निया से भारत वापिस आ गई थी। आज वह किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। इस कार्य को करने के लिए उन्होंने सुकर्मा फाउंडेशन की स्थापना की। इसके माध्यम से वह महिलाओं को हाइजीन के बारे में शिक्षित करने का कार्य कर रहीं है। साथ ही महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर रही है।

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