Gwalior : आज निकलेगा पथ संचलन, मोहन भागवत आएंगे
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Gwalior : आज निकलेगा पथ संचलन, मोहन भागवत आएंगे

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के तीन दिवसीय स्वर साधक संगम का गुरूवार को केदारधाम स्वरस्वती शिशुमंदिर परिसर में शुभारंभ हो गया।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के तीन दिवसीय स्वर साधक संगम का गुरूवार को केदारधाम स्वरस्वती शिशुमंदिर परिसर में शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर पारम्परिक अति प्राचीन एवं दुर्लभ वाद्य यंत्रो, भारतीय शास्त्रीय गायकों एवं वादकों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक अशोक पांडेय ने किया। 26 नवम्बर 4:45 बजे से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से पथ संचलन निकाला जाएगा।

उन्होंने इस अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए इस तीन दिवसीय घोष वर्ग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तुत प्रदर्शनी मूलत: भारतीय शास़्त्रीय गायकों एवं वादकों पर आधारित है। प्राचीन भारतीय राग न केवल प्रभावी बल्कि अपनी विशिष्ठ शैली व निहित शक्ति के कारण पूरे विश्व में जाने जाते हैं। इन्हीं पर आधारित प्रस्तुत प्रदर्शनी में चार प्रकार की विधाओं को लेकर प्रदर्शन किया गया है। पहले भाग में पारम्परिक अति प्राचीन एवं दुर्लभ वाद्य यंत्रो का प्रदर्शन किया गया है। दूसरे भाग में देश के प्रख्यात गायकों एवं वादकों का जीवन परिचय चित्रांकित किया गया है, तीसरे भाग में ग्वालियर घराने के प्रसिद्व संगीतज्ञों का जीवन परिचय चित्रमय झांकी के द्वारा किया गया है। चतुर्थ भाग में देशभर के प्राचीन वाद्यों का चित्रमय प्रदर्शन किया गया है, साथ ही पांचवे भाग में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की घोष यात्रा का इतिहास एवं रचनाओं के वादन को डिजीटल के माध्यम से दिखाया गया है।

एक सवाल के जवाब में पांडेय ने बताया कि स्वंयसेवकों को कदम से कदम मिलाकर चलने की प्रेरणा घोष के द्वारा दी जाती है।संघ में घोष की यात्रा 1927 से प्रारम्भ हुई। प्रारंभ में शंख, वंशी और आनक जैसे मूल वाद्यों से शुरूआत हुई। संघ के स्वंयसेवको द्वारा अपने अथक प्रयासों से शास्त्रीय रागों के आधार पर रचनाओं का निमार्ण किया गया। आज लगभग साठ से अधिक रचनाओं का वादन संघ में हो रहा है। 1982 के एशियार्ड खेलो में शिवराज भूप रचना का वादन हुआ जिसका निमार्ण संघ के कार्यकर्ताओ ने किया है। मध्यभारत प्रांत में घोष के अच्छे वादक तैयार हो इस निमित्त स्वर साधक संगम घोष शिविर ग्वालियर में हो रहा है।

500 घोष वादक बजायेंगे पांच रचनाएं :

पांडेय ने बताया कि इस शिविर में लगभग 500 घोष वादक, जिन्हें न्यूनतम पांच रचनाओं का वादन उत्कृष्ठ आता है उन्हें ही शामिल किया गया है। पांच रचनाएं इस प्रकार है। ध्वजारोपण, मीरा, भूप, शिवरंजनी एवं तिलंग । इस शिविर स्थल में आवास व्यवस्था दो परिसरों में की गई है, एक को स्वरद परिसर एवं दूसरे को तूर्य परिसर का नाम दिया गया है।

26 को निकलेगा संचलन :

यह संचलन महारानी लक्ष्मीबाई की समाधी स्थल से प्रारंभ होकर फूलबाग, गुरूद्वारा, नदीगेट, इंदरगंज चौराहा होते हुए जी.वाय.एम.सी. मैदान समाप्त होगा। 28 नवम्बर को शिविर स्थल केदारधाम में समापन 4:30 बजे होगा, जिसमें घोष वादकों द्वारा व्यूह रचनाओं के माध्यम से उत्कृष्ठ वादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वर साधक संगम सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन होगा। भागवत 26 नवम्बर से 28 नवम्बर तक शिविर में रहेंगे। अंत में सरसंघचालक मोहन भागवत का सम्बोधन होगा। इस मौके पर कार्यवाह हेमंत सेठिया व प्रांत प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसोदिया भी उपस्थित थे।

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