MP के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा- ''सामाजिक परिवर्तन की संवाहक होंगी द्रौपदी मुर्मू''
सामाजिक परिवर्तन की संवाहक होंगी द्रौपदी मुर्मूSocial Media

MP के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा- ''सामाजिक परिवर्तन की संवाहक होंगी द्रौपदी मुर्मू''

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज NDA की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू अपना नामांकन दाखिल करेंगी, नामांकन से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कही ये बात...

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू अपना नामांकन दाखिल करेंगी, इनके नामांकन से पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि, सामाजिक परिवर्तन की संवाहक द्रौपदी मुर्मू होंगी।

सीएम शिवराज ने किया ट्वीट :

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर लिखा- राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार, आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी भारतीय संविधान की सच्ची सेविका, सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक और आदिवासी उत्थान की प्रणेता बनेंगी। मेरे हृदय के उद्गार - ''सामाजिक परिवर्तन की संवाहक होंगी द्रौपदी मुर्मू''

आज मुख्यमंत्री ने कहा कि, BJP राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिये प्रत्याशी घोषित कर न केवल समाज के हर वर्ग के प्रति सम्मान को सिद्द किया है, बल्कि कांग्रेस शासन के अंधे युग के अंत की भी घोषणा की, जिसमें सम्मान और पद अपने लोगों को पहचान से बांटे जाते थे। सीएम चौहान ने अपने ब्लॉग में लिखा- भारतीय लोकतंत्र में पहली बार होगा जब कोई आदिवासी महिला सर्वोच्च पद को सुशोभित करेगी। भाजपा की सोच समरस समाज की स्थापना रही है। भाजपा को अपने शासन काल में तीन अवसर प्राप्त हुए और तीनों अवसरों पर उसने समाज के तीन अलग-अलग समुदायों से राष्ट्रपति का चयन किया। सर्वप्रथम अल्पसंख्यक वर्ग से महान वैज्ञानिक कर्मयोगी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, फिर दलित समुदाय के रामनाथ और अब जनजातीय समुदाय से मुर्मू।

द्रौपदी मुर्मू को उड़ीसा विस में सर्वश्रेष्ठ विधायक के सम्मान से सम्मानित किया : CM

उन्होंने कहा कि अभी सम्पन्न राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से दो महिलाओं को निर्विरोध निर्वाचित किया है, जिसमें वाल्मीकि समाज की सुमित्र वाल्मीकि भी हैं। CM ने स्मरण किया कि द्रौपदी मुर्मू को उड़ीसा विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ विधायक के सम्मान से सम्मानित किया, इस सम्मान का नाम था, नीलकंठ सम्मान। द्रौपदी मुर्मू समाज में सेवा का अमृत बांटती रही हैं। उन्होंने अपने जीवन में कठोरतम परीक्षायें दी हैं।

उन्होंने विपरीत आर्थिक परिस्थितियों में संघर्ष का मार्ग चुना और अपनी एक मात्र पुत्री के पालन पोषण के लिये शिक्षक और लिपिक जैसी नौकरियां कीं। कड़ी मेहनत से पुत्री को योग्य बनाया। रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद का चुनाव जीत कर सक्रिय राजनीति की शुरूआत की। उड़ीसा में बीजू जनता दल एवं भाजपा की सरकार में मंत्री रहीं और 2015 में झारखण्ड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। वे आदिवासी हितों की रक्षा के लिये इतनी प्रतिबद्ध रहीं कि तत्कालीन रघुवरदास सरकार के आदिवासियों की भूमि से संबंधित अध्यादेश पर इसलिये हस्ताक्षर नहीं किये क्योंकि उन्हें संदेह था कि इससे आदिवासियों का अहित हो सकता है। किसी प्रकार के दबाव के आगे नहीं झुकीं। यही कारण है कि उड़ीसा में लोग उन्हें आत्मबल, संघर्ष, न्याय तथा मूल्यों के प्रति समर्पित ऐसी सशक्त महिला के रूप में देखते हैं जिनसे समाज के लोग प्रेरणा लेते हैं।

आगे CM ने कहा कि भाजपा प्राचीन भारत में महिलाओं, दलितों और आदिवासियों को जो गौरव और सम्मान प्राप्त था उसे पुनर्स्थापित करना चाहती है। विदेशी आक्रान्ताओं और स्वतंत्रता के पश्चात स्वार्थी राजनीतिक दलों ने इस वर्ग को सेवक या वोट बैंक बना दिया था, भाजपा उन्हें पुन: सामाजिक सम्मान और आत्मगौरव प्रदान करना चाहती है। पार्टी चाहती है कि भारत में फिर अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी जैसी महिलाओं के ऋषित्व की पूजा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सत्ता में केवल शासन करने के लिये नहीं है। पार्टी का उद्देश्य है कि भ्रमित हो चुकी सामाजिक सोच को सही दिशा दी जाये।

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