एंटीबायोटिक प्रतिरोध को लेकर एक्शन प्लान बनाने वाला मप्र देश में पहला राज्य
एंटीबायोटिक प्रतिरोध को लेकर एक्शन प्लान बनाने वाला मप्र देश में पहला राज्यSocial Media

एंटीबायोटिक प्रतिरोध को लेकर एक्शन प्लान बनाने वाला मप्र देश में पहला राज्य

भोपाल, मध्यप्रदेश : प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि एंटीबॉयोटिक प्रतिरोध जलवायु परिवर्तन की तरह ही विश्व की बड़ी समस्या के रूप में तेजी से उभर रहा है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि एंटीबॉयोटिक प्रतिरोध जलवायु परिवर्तन की तरह ही विश्व की बड़ी समस्या के रूप में तेजी से उभर रहा है। अब से इस मामले में सचेत होने की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण प्रतिवर्ष दुनिया में सात लाख मौतें हो रही हैं। यदि रोकथाम के लिए अभी से कदम नहीं उठाए तो वर्ष 2050 तक मौत का आंकड़ा प्रतिवर्ष एक करोड़ तक पहुंच सकता है। राहत की बात है कि मप्र में पिछले दो वर्षों से लगातार काम हो रहा है और मप्र देश का पहला राज्य है, जिसने एंटीबॉयोटिक प्रतिरोध को लेकर एक्शन प्लान तैयार किया है।

यह बात उन्होंने गुरुवार को पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उस हिसाब से पहले जिस एंटीबॉयोटिक से जो बैक्टीरिया मर जाते थे, अब नहीं मरते। एंटीबॉयोटिक से वर्ष 2015 में बैक्टीरिया के मरने का प्रतिशत 45 फीसदी था। अब यह घटकर 20 से 30 फीसदी तक सीमित हो गया है। उन्होंने कहा कि मल्टी ड्रग रजिस्टेंस से भी बहुत मौतें हो रही हैं। डॉ. चौधरी ने हाल ही में कोविड-19 से संक्रतिमों को निमोनिया होने और उससे मौत को भी मल्टी ड्रग्स रजिस्टेंस की मुख्य वजह बताया। इस मामल में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ ही आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। इसी कड़ी में एंटीबॉयोटिक के सही उपयोग को लेकर एक हजार सरकारी अस्पतालों और 500 निजी अस्पतालों में ट्रेनिंग दी गई है। उन्होंने बताया कि जागरूकता के लिए एम्स भोपाल को लीड पार्टनर बनाया गया है। उनके सहयोग से जागरूकता अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश और प्रदेश में अभी इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि एक वर्ष में देश में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से कितनी मौतें हुई हैं। उन्होंने बताया कि बैक्टीरिया के स्वरूप में लगातार बदलाव के कारण पिछले दस वर्षों से कोई एंटीबॉयोटिक नहीं पाया है। मप्र में वर्ष 2018 से रूट प्लान तैयार किया गया है।

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