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3 माह में दर्ज हुई 10 हजार से अधिक शिकायत
3 माह में दर्ज हुई 10 हजार से अधिक शिकायत|Raj Express
मध्य प्रदेश

भोपाल: 3 माह में दर्ज हुईं 10 हजार से अधिक शिकायतों का कोई निराकरण नहीं

भोपाल: शहर में जनता खराब सड़क, पानी व आवारा कुत्‍तों के आतंक से परेशान है, हर महीने 2000 से अधिक शिकायतें नगर निगम कॉल सेंटर में की जाती हैं, लेकिन शिकायतों का निराकरण नहीं, बल्कि आश्वासन मिलता है।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

राज एक्‍सप्रेस। एक जून से अब तक शहरभर से खराब सड़कों से लेकर आवारा कुत्‍तों, बिजली, पानी और साफ-सफाई की दर्जनों, सैंकड़ों नहीं, बल्कि हजारों की संख्‍या में नगर निगम तक शिकायतें पहुंची, लेकिन मौके की बजाय कागजों में ही इन समस्याओं का समाधान हो गया। हालत है कि, हर महीनें लगभग 2 हजार से अधिक शिकायतें निगम के कॉल सेंटर में की जा रहीं हैं, लेकिन शिकायतों का निराकरण करने की जगह सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। कहीं झाड़ू नहीं लगी, तो कहीं सीवेज का पानी सड़क पर बह रहा है। कहीं स्ट्रीट लाईट एक सप्ताह से बंद है, तो कहीं आवारा कुत्‍तों का आतंक है।

आवारा कुत्‍तों का आतंक
आवारा कुत्‍तों का आतंक
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दर्ज शिकायतों का निराकरण नहीं :

इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए आम आदमी नगर निगम के कॉल सेंटर से लेकर सीएम हेल्प लाइन में अपनी शिकायत दर्ज कराता है। नगर निगम का भी दावा है कि, हमारे कॉल सेंटर में शिकायत दर्ज होते ही उसका निराकरण किया जाता है, लेकिन निगम के शिकायती आंकड़े बताते हैं कि, शिकायतों पर कितना अमल हुआ।

हर दिन 100 से अधिक शिकायतें दर्ज :

जून से लेकर अब तक हर दिन 100 से अधिक शिकायतें नगर निगम में दर्ज हो रही हैं। वर्तमान में सबसे अधिक शिकायतें शहर की खराब सड़कों को लेकर दर्ज की जा रही हैं। वहीं सीवेज से संबंधित शिकायतें निगम में पहुंचती हैं। इसके अलावा दूसरे नंबर पर साफ-सफाई और आवारा कुत्‍तों का आतंक, फिर नंबर आता है वॉटर सप्‍लाई और स्ट्रीट लाईट का।

यहां करें शिकायत :

नगर निगम के कॉल सेंटर नंबर 2701000, 2701012, 2701013, 2701014 से लेकर 18002330014 पर सड़क, बिजली, पानी और साफ-सफाई से लेकर आवारा कुत्‍तों से परेशान नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

इनका कहना है-

निगम के कॉल सेंटर में जो भी शिकायतें दर्ज होतीं हैं, उनका समय-सीमा में निराकरण कराया जाता है। बड़ी समस्या होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा जाता है, ताकि जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराया जा सके।

पीएस शुक्‍ला, पीआरओ, बीएमसी