Nagda : अस्पताल अधीक्षक ने बीमा अस्पताल का भवन देने से किया इंकार
अस्पताल अधीक्षक ने बीमा अस्पताल का भवन देने से किया इंकारRaj Express

Nagda : अस्पताल अधीक्षक ने बीमा अस्पताल का भवन देने से किया इंकार

नागदा जं., मध्यप्रदेश : शासकीय अस्पताल के नवीन भवन के निर्माण तो ठीक पुराने भवन को तोड़ने में ही कानूनी दाव पेंच फसा।

नागदा जं., मध्यप्रदेश। शासकीय अस्पताल के भवन तोड़कर अस्पताल इंगोरिया रोड स्थित बीमा अस्पताल में एक माह में स्थनांतरण करने के आदेश कलेक्टर ने दे दिए। दो दिन पूर्व बीएमओ ने पत्र देकर अनुमति मांगी तो बीमा अस्पताल के अधिकारी ने पत्र लिखकर मना कर दिया। जब तक इंदौर व दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति नहीं मिल जाती तब तक भवन नहीं दिया जा सकता। वहां से अनुमति नहीं मिलती है तो अस्पताल के नवीन भवन निर्माण का मामला फिर खटाई में पड़ सकता है।

शासकीय अस्पताल को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए नवीन निर्माण के लिए 7 करोड़ 50 लाख रूपये पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत ने 2018 में स्वीकृत करा दिए थे। इसके बाद राजनीतिक दाव पेंच के चलते अस्पताल भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने टीएल बैठक में एसडीएम को मौखिक आदेश दिए थे कि एक माह में शासकीय अस्पताल इंगोरिया रोड स्थित बीमा अस्पताल में स्थानांतरण किया जाकर पुराने भवन को तोडऩे का काम प्रारंभ किया जाकर नवीन भवन निर्माण प्रारंभ किया जाए। एसडीएम के आदेश पर बीएमओ डॉ. कमल सोलंकी ने बीमा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र माठे को शासकीय अस्पताल वहां स्थानांतरण करने को लेकर दो दिन पूर्व पत्र दिया था। पत्र का जवाब देते हुए माठे ने बीमा अस्पताल भवन शासकीय अस्पताल को देने के लिए स्पष्ट इंकार करते हुए बताया कि उनके विभाग के इंदौर व दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद भवन में शासकीय अस्पताल लग सकेगा। यदि वरिष्ठ अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी तो शासकीय अस्पताल भवन का निर्माण कार्य फिर खटाई में पड़ सकता है। बता दें कि बीमा अस्पताल केंद्र सरकार के अधिन आता है। कोरोना महामारी के समय आपात स्थिति होने पर राज्य सरकार ने कोविड सेंटर बना दिया था। अब यदि उस भवन का उपयोग शासकीय अस्पताल के लिए करना है तो इसकी अनुमति दिल्ली से विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेना पड़ेगी। केंद्र सरकार के अधिन आने वाली कोई भी संस्था पर रा'य सरकार का अधिकार नहीं होता है। इनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही रा'य सरकार उपयोग कर सकती है।

पहला अधिकार श्रमिकों का है :

बीमा अस्पताल पर पहला अधिकार श्रमिकों का होता है। श्रमिकों का प्रतिमाह उपचार के लिए पैसा काटा जाता है। इसमें हस्तक्षेप केंद्र श्रम विभाग का होता है। बीमा अस्पताल का जो भवन है यहां श्रमिकों के उपचार के लिए है। आधे भवन में भी शासकीय अस्पताल अस्थायी रूप से संचालित होता है तो इसकी अनुमति केंद्रीय मिनिस्ट्री से होगी। बुधवार को इंदौर में विभाग की मीटिंग हुई थी इसमें बीमा अस्पताल अधिक्षक डॉ. राजेंद्र माठे ने दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

इनका कहना :

शासकीय अस्पताल बीमा अस्पताल में स्थानांतरण करने के लिए बीमा के अधिकारियों को दो दिन पूर्व पत्र दिया था। उन्होंने फिलहाल भवन देने से मना करते हुए उनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद ही भवन देने की बात कही है। वह अनमुति नहीं देंगे तो अस्पताल शिफ्ट नहीं हो पाएगा।

डॉ. कमल सोलंकी, बीएमओ, शासकीय अस्पताल, नागदा

बीमा अस्पताल भवन अस्थायी तौर पर शासकीय अस्पताल के लिए देने का अधिकार मुझे व इंदौर के वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं है। इसकी अनुमति दिल्ली मिनिस्ट्री से होगी। गुरूवार को पत्र दिल्ली भेजा जाएगा। वहां से अनुमति आने के बाद ही शासकीय अस्पताल के लिए भवन दिया जा सकेगा।

डॉ. राजेंद्र माठे, अधिक्षक, बीमा अस्पताल, नागदा

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