Narmadapuram : राजनीति के चाणक्य विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा रणनीति रंग लाई

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश : लगभग 27 महीनों के अंतराल के बाद अंतत: नगर पालिका परिषद में निर्वाचित अध्यक्ष पद आसीन होगा। शनिवार को हुए चुनाव में भाजपा के एडवोकेट पंकज चौरे विजयी रहे।
भाजपा के पंकज चौरे विजयी रहे
भाजपा के पंकज चौरे विजयी रहेRaj Express

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश। लगभग 27 महीनों के अंतराल के बाद अंतत: नगर पालिका परिषद में निर्वाचित अध्यक्ष पद आसीन होगा। शनिवार को हुए चुनाव में भाजपा के एडवोकेट पंकज चौरे विजयी रहे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के निर्मल सिंह राजपूत विजय हुए। 34 पार्षदों वाली नगर पालिका में भाजपा के 20 पार्षद और कांग्रेस के 14 पार्षद विजयी हुए थे, लेकिन शनिवार को जब मतदान हुआ तो भाजपा के पंकज चौरे को 26 वोट मिले तो कांग्रेस की तुलसा वर्मा को मात्र 8 वोट मिले। कांग्रेस के 6 पार्षदों ने भाजपा के में पक्ष में क्रास वोटिंग की।

वहीं दोपहर बाद हुए उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के निर्मल सिंह राजपूत और कांग्रेस की रमा चंद्रवंशी के बीच मुकाबला था, जिसमें भाजपा के निर्मल राजपूत को 21 मत और रमा चंद्रवंशी को 13 मत मिले इस प्रकार निर्मल सिंह राजपूत चुनाव में विजयी रहे। इसके अलावा अपील समिति के चुनाव में श्रीमती राजेश्री एवं श्रीमती मनीषा अग्रवाल का निर्विरोध निर्वाचन हुआ।चुनाव होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस विजय अभियान के शिल्पकार विधायक डॉक्टर सीतासरन शर्मा, पीयूष शर्मा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष का फूल मालाओं से स्वागत किया तत्पश्चात भूल धमाकों ओर जोरदार आतिशबाजी के बीच भव्य जुलूस निकाला। शनिवार को नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में, अध्यक्ष पद पर पंकज चौरे की ताजपोशी होने के साथ ही शनिवार को राज एक्सप्रेस में प्रकाशित उस खबर पर मोहर लग गई जो कि एडवोकेट पंकज चौरे के सर सज सकता है अध्यक्षत का ताज प्रकाशित की गई थी। चुनाव के दौरान दिनभर इस खबर की चर्चा रही। नगर पालिका परिषद के पार्षदों के चुनाव हो या अध्यक्ष/उपाध्यक्ष चुनाव सही मायनों में क्षेत्र के विधायक डॉ सीतासरन शर्मा की रणनीति पूरी तरह सफल रही। संगठन के तमाम विरोध के बावजूद डॉ. शर्मा पंकज चौरे को अध्यक्ष बनाने में सफल रहें। उन्होंने संगठन को विश्वास दिलाया था कि भाजपा पार्षदों में किसी प्रकार की क्रास वोटिंग नहीं होगी और हुआ भी वही। डॉ. शर्मा की रणनीति से नगर पालिका में भाजपा के बीस पार्षद विजयी होकर आए थे और अध्यक्ष उपाध्यक्ष भी बहुमत से बने।

कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें :

भाजपा में अध्यक्ष को लेकर जिस प्रकार उहापोह की स्थिति बनी हुई थी, उससे कांग्रेस बहुत उत्साहित थी। कांग्रेस को लग रहा था कि वह भाजपा के पार्षदों को तोड़ कर अपना अध्यक्ष बना लेगी, लेकिन हुआ उसके उलट, कांग्रेस को भाजपा के पार्षदों का सपोर्ट मिलने के बजाय, कांग्रेस के 6 पार्षद ही भाजपा के साथ चले गए। कांग्रेस के पास 14 पार्षद होने के बाबजूद उसके अध्यक्ष प्रत्यासी तुलसा वर्मा को मात्र 8 वोट ही मिले। अध्यक्ष के लिए भाजपा के पार्षदो ने किसी प्रकार का सेबोटेज नहीं किया, अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के छह पार्षदों ने भाजपा को वोट दिया। जबकि उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की श्रीमती रमा चंद्रवंशी को कांग्रेस के 14 में से 13 वोट मिले, यहां भी कांग्रेस एक वोट भाजपा के खाते में गया। क्योंकि भाजपा निर्मल सिंह राजपूत को 21 वोट मिले। भाजपा के बीस पार्षद जीत कर आए हैं। चुनाव परिणामों के बाद स्पष्ट हो गया है कि गुटों-गुटों में बंटी कांग्रेस की फूट का फायदा दोनों चुनाव में भाजपा ने उठाया, लेकिन भाजपा सारे पार्षद एक जुट रहे। नतीजे देखकर कांग्रेस नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट नजर आने लगी है।

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