एनएचएआई अधिकारी
एनएचएआई अधिकारी |Pankaj Yadav
मध्य प्रदेश

रिश्वत लेने वाला एनएचएआई अधिकारी जेल पहुंचा

छतरपुर, मध्यप्रदेश : रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मैनेजर को छतरपुर स्थित लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने जेल भेज दिया है।

Pankaj Yadav

राज एक्सप्रेस। छतरपुर में शुक्रवार की रात एक लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मैनेजर सुरेश कुमार अग्निहोत्री को छतरपुर स्थित लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने जेल भेज दिया है। अग्निहोत्री पर आरोप है कि वे सागर-कानपुर फोर लेन निर्माण पर खुलने वाले एक पेट्रोल पंप के आवेदक से अनापत्ति प्रमाण देने के एवज में डेढ़ लाख रुपए मांग रहे थे और रिश्वत की प्रारंभिक किश्त एक लाख रुपए के साथ उन्हें पकड़ा गया था।

अपनी गाड़ी में चाय पिलाने गए और ले लिए 1 लाख रुपए

सागर जिले के मकरोनियां के निवासी गणेश प्रसाद कोरी पिता घनश्याम कोरी ने बताया कि उसके पेट्रोल पंप की एनओसी के लिए अग्निहोत्री के द्वारा लंबे समय से डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत उसने 23 दिसंबर को सागर लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए जाल बिछाया और 27 दिसंबर की शाम आवेदक रिश्वत की पहली किश्त 1 लाख रुपए की रकम देने के लिए छतरपुर के नौगांव रोड पर स्थित एनएचएआई के कार्यालय में गया था।

यहां अग्निहोत्री के द्वारा आवेदक से रिश्वत नहीं ली गई बल्कि वे आवेदक को अपनी बोलेरो गाड़ी में चाय पिलाने के लिए ऑफिस से बाहर निकल आए। बस स्टैंड पर बुंदेलखंड गैरेज के समीप जैसे ही आरोपी के द्वारा 1 लाख रुपए की रिश्वत ली गई लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया। बाद में आरोपी को एनएचएआई के कार्यालय एवं इसके बाद सिटी कोतवाली ले जाकर उनके हाथ धुलाए गए जिससे रुपए में लगा रंग उनके हाथों में निकल कर आ गया।

लोकायुक्त ने 4 आवेदकों पर लंबित एनओसी कराई

लोकायुक्त की यह टीम आरोपी सुरेश कुमार अग्निहोत्री को गिरफ्तार कर पहले एनएचएआई के नौगांव रोड स्थित दफ्तर में लेकर पहुंची। यहां लंबित पड़े अनापत्ति प्रमाण पत्रों की जानकारी ली गई तो पता लगा कि, विभाग के पास ऐसे 4 आवेदन पड़े हैं। इस मामले के शिकायतकर्ता सहित चारों पेट्रोल पंप संचालकों के अनापत्ति प्रमाण पत्र रात को ही लोकायुक्त के डीएसपी राजेश खेड़े के द्वारा कराए गए।

उक्त कार्यवाही में टीआई अभिषेक वर्मा सहित 8 सदस्यीय लोकायुक्त टीम मौजूद रही। मैनेजर अग्निहोत्री को रात कोतवाली में काटनी पड़ी। सुबह उन्हें छतरपुर में लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश सुधांशु सिन्हा की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 50 हजार से अधिक भ्रष्टाचार का मामला होने के कारण जमानत खारिज करते हुए जेल भेज दिया गया।

आवेदक मुझे चाय पिलाने ले गया और साजिश के तहत मेरी गाड़ी में पैसे रख दिए गए। मैंने किसी तरह की रिश्वत नहीं मांगी थी।

सुरेश चंद्र अग्निहोत्री, आरोपी मैनेजर

यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, हमारे विभाग के मैनेजर के द्वारा मांगी गई यह रिश्वत गलत है। विभाग को इसकी कोई जानकारी नहीं थी।

जे. बालाचंद्रन, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

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