निगम कर्मियों के ईपीएफ के 12 करोड़ डकारने वालों पर अब तक नहीं हुई कार्यवाही
नगर निगम मुख्यालय, ग्वालियरSocial Media

निगम कर्मियों के ईपीएफ के 12 करोड़ डकारने वालों पर अब तक नहीं हुई कार्यवाही

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : नगर निगम में ठेके पर काम करने वाले 1882 कर्मचारियों के ईपीएफ का 12 करोड़ रुपय ठेकेदार एवं निगम अधिकारी डकार गए हैं। इस मामले में जल्द ही प्रभावित कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे।

हाइलाइट्स :

  • 1882 कर्मचारियों की राशि हड़पी, घपले में निगम अधिकारी भी शामिल

  • प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई थी शिकायत

  • ठेके पर कर्मचारी रखने वाली तीन कपंनियों की हुई है शिकायत

  • 2016 से निगम में ठेकेदारी करने वाली कपंनियों ने डकारा ईपीएफ का पैसा

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। नगर निगम में ठेके पर काम करने वाले 1882 कर्मचारियों के ईपीएफ का 12 करोड़ रुपय ठेकेदार एवं निगम अधिकारी डकार गए हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की गई और एक पत्र भी प्रधानमंत्री कार्यालय से आया था। लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक न तो ठेका लेने वाली कपंनियों पर कार्यवाही की गई और न ही भुगतान करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया। इस मामले में जल्द ही प्रभावित कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे।

देश की विभिन्न फैक्ट्री एवं संस्थानों में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि(ईपीएफ) के रूप में पैसा काटा जाता है। इसमें वेतन की12.5 प्रतिशत राशि कर्मचारी के वेतन से एवं इतना ही पैसा ठेकेदार द्वारा ईपीएफ फण्ड में जमा कराया जाता है। यह पैसा इसलिए जमा कराया जाता है ताकि किसी भी विपदा एवं आपत्ति में कर्मचारी पैसा निकालकर अपना काम चला सके। नगर निगम में कलेक्ट्रेट दर पर कर्मचारी रखे गए हैं। इसमें कुशल, अकुशल का अलग-अलग वेतन है। इन कर्मचारियों का लगभग एक हजार रुपय महीना वेतन से कटता है और इतनी ही राशि ठेकेदार को ईपीएफ में जमा करनी होती है। दो हजार रुपय महीना एक कर्मचारी का ईपीएफ होता है जो 24 हजार रुपये एक साल का हो जाता है। नगर निगम में 1882 कर्मचारियों का ईपीएफ 2016 से जमा नहीं कराया गया। एक साल का 24 हजार रुपये के हिसाब से चार साल में एक कर्मचारी का 96 हजार रुपये ईपीएफ के रूप में जमा होना था। लेकिन अब तक सभी कर्मचारियों के ईपीएफ खाते तक नहीं खुले। इन संबंध में 2019 से लगातार शिकायत की जा रही है। लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने ईओडब्लू में शिकायत दर्ज कराई और प्रधानमंत्री कार्यालय भी पत्र लिखा गया। लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई।

ग्वालियर प्रवास के दौरान सीएम से की थी शिकायत :

कांग्रेस के बाद फिर से सत्ता में लौटने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीन दिन के लिए ग्वालियर प्रवास पर आए थे। तब कर्मचारी संगठनों ने मुलाकात कर शिकायत की थी। इस मामले में मुख्यमंत्री ने कार्यवाही के आदेश दिए थे लेकिन अब तक किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया गया। लगातार शिकायत के बावजूद कार्यवाही न होने पर कर्मचारी नाराज हैं और अब प्रदर्शन की कवायद की जा रही है।

ईओडब्लू जांच में बरत रहा है लापरवाही :

ईपीएफ घोटाले की जांच ईओडब्लू ने शुरू कर दी है। दस्तावेजों के आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है और हर स्तर पर जांच की जा रही है। ईओडब्लू ने प्रथम दृष्टया मामले में फर्जीवाड़े को भांप लिया है और निगम अधिकारी एवं ठेकेदारों से दस्तावेज मांगे हैं। भोपाल में ईपीएफ कार्यालय से भी सभी जानकारी जुटाई गई। लेकिन निगम अधिकारियों के दबाव में अब तक कार्यवाही नहीं हो सकी है।

मात्र 531 कर्मचारियों के ईपीएफ खाते खुले :

2019 में हुई शिकायत के बाद राज सिक्योरिटी कंपनी द्वारा 531 कर्मचारियों के ईपीएफ खोलने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा अन्य किसी भी कर्मचारी का खाता नहीं खुला है। जो खाते खोले गए हैं उसमें भी सभी कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं किया गया है। बाकी बचे कर्मचारियों ने भी ईपीएफ खाता खोलने की मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन किया है।

इन तीन कपंनियों ने ठेके पर रखे थे कर्मचारी :

वर्ष 2015 में सेंगर सिक्योरिटी, 2016-17 में ग्लोबल सिक्योरिटी एवं इसके बाद राज सिक्योरिटी कंपनी द्वारा ठेके पर कर्मचारी रखे गए थे। इन तीनों कपंनियों पर पीएफ का पैसा डकारने के आरोप लगे हैं। हद तो यह है कि निगम अधिकारियों ने पैसा जमा न करने पर भी सिक्योरिटी कपंनियों को पूरा भुगतान कर दिया और कंपनियों को ब्लेक लिस्टेड करने की कार्यवाही भी नहीं की गई।

इनका कहना है :

कर्मचारियों के ईपीएफ का भुगतान नहीं होना गंभीर मामला है। मैंने भी अधिकारियों से चर्चा की थी और जांच कर कार्यवाही के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद क्या हुआ इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मैं अधिकारियों से फिर चर्चा करूंगा। जो भी इसके लिए दोषी है उसके खिलाफ कार्यवाही आवश्यक है।

विवेक शेजवलकर, सांसद, ग्वालियर

इस मामले में मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर ऐसा हुआ है तो निगम प्रशासक एवं नगर निगम कमिश्नर को इस मामले में कार्यवाही करनी चाहिए। मैं भी इस मामले में चर्चा करता हूं।

निकुंज श्रीवास्तव, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मप्र

इस मामले को लेकर हम 2019 से लगातार शिकायत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री तक को हमनें इस घोटाले से अवगत कराया है। वहां से पत्र भी आया लेकिन निगम अधिकारी इस मामले में एक्शन नहीं ले रहे। अब हम प्रदर्शन को मजबूर हैं। जल्द ही निगम प्रशासक को ज्ञापन सौंपने के साथ प्रदर्शन शुरू किया जायेगा।

विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश महामंत्री, स्वंय सेवक अधिकारी कर्मचारी संघ मप्र

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