Raj Express
www.rajexpress.co
बुरहानपुर में सड़कों पर हो रहें प्रसव
बुरहानपुर में सड़कों पर हो रहें प्रसव|Syed Dabeer - RE
मध्य प्रदेश

बुरहानपुर में सड़कों पर हो रहें प्रसव

बुरहानपुर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण फिर एक महिला का सड़क पर प्रसव हो गया। प्रसूता के साथ आईं महिला ने उसकी मदद की।

Ganesh Dunge

Ganesh Dunge

बुरहानपुर। शहर में मंगलवार को एक ऐसी घटना हुई, जिसने हर किसी को अंदर तक झंकझोर कर रख दिया है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण फिर एक महिला का सड़क पर प्रसव हो गया। प्रसूता के साथ आईं महिला ने उसकी मदद की। बच्चे के जन्म के बाद मां ने ही बच्चे की नाल काटी और सीने से लगाकर दूध पिलाना शुरू कर दिया। जिसने भी ये दृश्य देखा सिहर गया। ये सब स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से हुआ है। अब विभाग के अफसरों को आंखे खोलकर प्रसूताओं को होने वाली परेशानी को दूर करने की जरूरत है।

क्या था मामला :

फोपनार निवासी एक गर्भवती महिला को जब सुबह पेट में दर्द शुरू हुआ। तब परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में भर्ती करने के बाद महिला को दोपहर में सोनोग्राफी करवाने के लिए कहा गया। महिला किराए का ऑटो करके शहर से लगभग पांच किमी दूर बड़ा पोस्ट आफिस के पास देवाशीष अस्पताल में पहुंचीं। गर्भवती के पास आधार कार्ड न होने के कारण डॉक्टर ने सोनोग्राफी करने से मना कर दिया। गर्भवती रोड पर तड़पती रही, लेकिन डॉक्टर ने उसे अंदर तक नहीं बुलाया। महिला ने तड़पते हुए रोड पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। मां और बच्चा स्वस्थ हैं।

बुरहानपुर में सड़कों पर हो रहें प्रसव

मानवता हुई शर्मसार :

इस तरह के प्रसव के मामले पहले भी सामने आ चुके है। हालांकि, माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ है परन्तु इस तरह प्रसव होने में कोई अनहोनी भी हो सकती थी। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ही पूरी तरह जिम्मेदार होता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई है। पूरी स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही है।

जननी सुरक्षा वाहन भी नहीं दिया :

जब अस्पताल से डॉक्टरों ने गर्भवती को सोनोग्राफी करवाने को कहा, तब न ही किसी ने उसे यह पूछा कि, कैसे जाओगी, रुपए है या नहीं। जबकि अस्पताल से ही जननी सुरक्षा वाहन में भिजवाया जाना चाहिए था। अस्पताल से वाहन नहीं मिलने के कारण मजदूर गर्भवती को खुद के खर्च से ऑटो करके शहर तक जाना पड़ा। सवाल ये उठता है कि, गर्भवतियों को सोनोग्राफी के लिए भिजवाने की जिम्मेदारी किसकी है।

32 करोड़ के अस्पताल में गर्भवतियों के लिए नहीं है सुविधाएं :

जिला अस्पताल का निर्माण 32 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। इस 32 करोड़ के जिला अस्पताल में गर्भवतियों के लिए ही सुविधाएं नहीं है तो, अन्य मरीजों के क्या हाल होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। होना ये चाहिए कि, जिला अस्पताल में ही सोनोग्राफी मशीन होना चाहिए। जिला अस्पताल में पिछले लगभग 6 साल से सोनोग्राफी मशीन नहीं है। स्वास्थ्य विभाग सबसे ज्यादा जरूरत वाले संसाधन के लिए प्रयास नहीं कर रहा है। जिला अस्पताल में आने वाली हर गर्भवती को अस्पताल से पांच किमी दूर शहर में जाकर सोनोग्राफी करवाना पड़ रही है। परेशान होना पड़ रहा है।

कहीं कमीशन का खेल तो नहीं :

जिला अस्पताल से सोनोग्राफी के लिए गई गर्भवती का प्रसव होने का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई मामले हो चुके है। करीब 3 साल पहले राजपुरा में सोनोग्राफी सेंटर के टायलेट में ही गर्भवती ने बच्चे को जन्म दे दिया था। बच्चे की मौत हो गई थी। घटनाओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने सबक नहीं लिया है। जिला अस्पताल में पिछले कई सालों से सोनोग्राफी मशीन नहीं लगाई जाना कई संदेह को जन्म देता है। बताते हैं निजी सोनोग्राफी सेंटरों से कमीशन का खेल चल रहा है। जितनी ज्यादा सोनोग्राफी निजी सेंटरों पर होगी, उतना कमीशन स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों, अफसरों को मिलेगा।

क्या कहना है इनका :

जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत ही खराब हालत में पहुच गई है, डाक्टरों की कमी को दूर करने विधानसभा में भी सवाल उठाया गया है, स्वास्थ्य मंत्री से भेंट कर इसे दूर करने हेतु ठोस कदम उठाये जायेगें।