Gwalior : अमृत योजना के ठेकेदारों के आगे बौने साबित हुए अधिकारी और मंत्री
कांती नगर में गढ्डे में फंसा ऑटो और मोतीलाल मिल रोड़ पर किया गया घटिया पेंच वर्कराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Gwalior : अमृत योजना के ठेकेदारों के आगे बौने साबित हुए अधिकारी और मंत्री

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : कार्यवाही की चेतावनी के बावजूद नहीं हुआ सड़कों का रेस्टोरेशन। जरा सी बारिश में खुदी सड़कों के गढ्ढों में फंस रहे वाहन। शिकायत के बावजूद गुणवत्ता हीन कार्य पर नहीं लगा अंकुश।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शहर की पेजयल एवं सीवर समस्या खत्म कराने के लिए 733 करोड़ की लागत से अमृत योजना के तहत कार्य कराए गए। इतना पैसा खर्च करने के बावजूद लोगों की समस्याएं तो हल नहीं हुई बल्कि मुसीबत और बढ़ गई। अमृत योजना में पानी एवं सीवर की लाईनें डालने के लिए पूरे शहर की सड़कें खोद दी गई लेकिन इनका रेस्टोरेशन नहीं हुआ। अब खुदी सड़कों में लोगों के वाहन फंस रहे हैं और दुर्घटना हो रही हैं। सड़कें सुधारने के लिए प्रभारी मंत्री तुलसी राम सिलावट, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, निगम प्रशासक आशीष सक्सेना और निगमायुक्त किशोर कन्याल कई बार निर्देश दे चुके हैं। लेकिन इन सभी पर अमृत योजना के ठेकेदार भारी पड़ रहे हैं।

शहर में गुरूवार को शुरू ही हल्की बारिश में खुदी हुई सड़कें मुसीबत बन गई हैं। हालात यह है कि गड्ढों में वाहन फंस रहे हैं जिससे आम जनता परेशान हैं। उपनगर ग्वालियर की सड़कों के हालात तो बहुत बुरे हैं। गुरूवार को हुई बारिश के बाद कांती नगर क्षेत्र में खुदी पड़ी सड़कें जल मग्न हो गई। इन सड़कों के गढ्डों में एक ऑटो फंसकर गिरने की स्थिति में आ गया। इस स्थिति से ऑटो में बैठी महिला एवं ब'चे डर गए। चूंकि पानी भरा था इसलिए वह ऑटो से नीचे भी नहीं उतर पा रहे थे। ऑटो के तिरछा होते देख राहगीरों ने मदद की तब जाकर सवारी नीचे उतरी और ऑटो को गड्ढे से बाहर निकाला गया। कांती नगर में लगभग 20 दिन पहले खुदाई हुई थी इसके बाद ठेकेदार ने दिखावे के लिए मिट्टी डालकर भराव कर दिया लेकिन चंद मिनिट की बारिश में सड़क गढ्डे में तब्दील हो गई।

निगम प्रशासक और निगमायुक्त हुए फेल :

अमृत योजना के ठेकेदार अधिकारियों पर भारी पड़ रहे हैं। दो सप्ताह पहले वार्ड 16 के मोतीमाल मिल रोड पर अमृत योजना के ठेकेदार विष्णु प्रसाद पुंगलिया कंपनी द्वारा सड़क का रेस्टोरेशन किया गया। हालात यह थे कि रेस्टोरेशन के बाद गिट्टी हाथ से उठाकर लोगों ने फेंकी। इस घटिया काम के वीडियो निगम प्रशासक आशीष सक्सैना, निगमायुक्त किशोर कन्याल, अमृत योजना के अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य, कार्यपालन यंत्री जागेश श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारियों को भेजे गए। लेकिन कोई भी ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सका। रेस्टोरेशन का भुगतान भी ठेकेदार के लोगों ने कराने की बात सरे आम लोगों से की थी। इस दौरान स्थानिय लोगों से ठेकेदार के गुर्गों का मुंहवाद भी हुआ और सभी काम छोड़कर चले गए। तब से आज तक काम शुरू नहीं हुआ।

इनका कहना है :

ठेकेदार को सड़कों को रेस्टोरेशन करना है। इसके लिए हम कई बाद निर्देश दे चुके हैं। लेकिन कुछ परेशानियां भी हैं जिन्हें दूर करने के प्रयास हम कर रहे हैं। ठेकेदार से जानकारी लेंगे कि रेस्टोरेशन में कहा परेशानी आ रही है।

आशीष सक्सैना, निगम प्रशासक एवं संभागायुक्त

हमने ठेकेदार को समय सीमा में सभी सड़कों का रेस्टारेशन करने के निर्देश दिए थे। अभी 25 से 30 किलोमीटर की सड़कें रेस्टारेशन के लिए बाकी है। इनकी जल्द मरम्मत करायेंगे। जहां काम हो चुका है फिर भी गढ्डे हैं वहां दोबारा काम कराया जाएगा।

जागेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, अमृत योजना

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