Indore : शुरू हुई ऑफलाइन पढ़ाई, पहले दिन 25 प्रतिशत रही उपस्थिति

इंदौर, मध्यप्रदेश: बुधवार से प्रदेश भर में कक्षा 6ठीं से 12वीं तक के स्कूल पूरी तरह खुल गए हैं। 50 प्रतिशत की उपस्थिति के साथ इन स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है। पहले दिन उपस्थिति लगभग 25 प्रतिशत रही
Indore : शुरू हुई ऑफलाइन पढ़ाई, पहले दिन 25 प्रतिशत रही उपस्थिति
शुरू हुई ऑफलाइन पढ़ाई, पहले दिन 25 प्रतिशत रही उपस्थितिRavi Verma

इंदौर, मध्यप्रदेश। बुधवार से प्रदेश भर में कक्षा 6ठीं से 12वीं तक के स्कूल पूरी तरह खुल गए हैं। 50 प्रतिशत की उपस्थिति के साथ इन स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है। पहले दिन उपस्थिति लगभग 25 प्रतिशत रही। छात्रों से पालकों की अनुमति लाने को कहा गया था, उसके बिना उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।

प्रदेश में कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद 1 सितंबर से छठीं से 8वीं तक के स्कूल भी खोलने का निर्णय लिया गया था, साथ ही 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों को भी नियमित रूप से प्रतिदिन खोलने की अनुमति दी थी। बुधवार को पहले दिन मीडिल स्कूल में छात्रों की उपस्थिति कम रही। पालक बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे। जो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे वे स्कूलों में पहुंचे। सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों में भी छात्रों की चहल-पहल शुरू हुई।

स्कूलों में पहुचते ही थर्मल स्केन से जांचा तापमान, हाथों को सेनिटाइज करवाया :

लगभग डेढ़ साल के लंबे समय बाद बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर पालकों में डर और संशय जरूर था लेकिन फिर भी हिम्मत कर सहमति पत्र के साथ बच्चों को स्कूल भेजा तो कई पालक खुद स्कूल तक छोड़ने गए और बाहर से ही स्कूल की स्वास्थ्य सुरक्षा जानी। खास बात यह कि सामूहिक रूप से एकत्र न हो इसके लिए स्कूलों में प्रार्थना सभाएं नहीं हुईं। उधर, हर साल बच्चों को जो स्कूल वाहन से भेजा जाता था, इस बार उनकी संख्या बहुत कम रही। सरकारी के साथ एमपी बोर्ड के कई स्कूल तो खुले, लेकिन सीबीएसई के कई स्कूल अभी तक नहीं खुले हैं।

पालक संघ ने कहा बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी :

पालक संघ के अनुरोध जैन ने स्कूल खोलने को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल खोलने की इतनी जल्दी क्यों है। स्कूलों में सुरक्षा को लेकर क्या उपाय किए जा रहे है, यदि कोई बच्चा संक्रमित हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, क्या स्कूल संचालक उसकी जिम्मेदारी लेगा। उन्होंने कहा कि हम भी मानते है कि ऑनलाइन पढ़ाई का ज्यादा औचित्य नहीं है, कई बच्चे इसमें शामिल ही नहीं होते। लेकिन सरकार या स्कूल संचालक को इसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी।

बिना पालकों की अनुमति के प्रवेश नहीं दिया :

बुधवार को स्कूल तो खुल गए, लेकिन पालकों का अनुमति पत्र साथ लाए बिना बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया गया। मप्र प्राइवेट स्कूल एसो. के गोपाल सोनी ने बताया कि पहले दिन छात्रों की उपस्थिति लगभग 25 से 30 प्रतिशत कर रही। जो काफी अच्छी कहीं जा रही है। 9वीं से 12वीं तक के छात्र तो आ रहे है, लेकिन मीडिल स्कूल के छात्रों को पालकों ने स्कूल भेजने में थोड़ी हिचकिचाहट दिखाई दी।

लंबे समय बाद मिले दोस्तों से, कक्षा में बैठकर पढ़ने पर खुशी जताई :

पिछले मार्च के बाद से छोटे बच्चों के स्कूल नहीं खुले थे, लगातार ऑनलाइन पढ़ाई कर थक चुके बच्चों ने कक्षा में बैठकर पढ़ाई करने की खुशी जताई। लंबे सयम बाद दोस्तों से मिले। टीचरों को भी साक्षात देखा और कक्षा में बैठ कर पढऩे की खुशी जताई। स्कूलों में सामूहिक रूप से एकत्र न हो इसके लिए प्रार्थना सभाएं नहीं हुई। कई बच्चे रिक्शा या बस से स्कूल जाते थे, लेकिन फिलहाल बच्चों को स्कूल पालकों ने ही छोड़ा। स्कूल वाहनों की संख्या काफी कम रही।

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