पालकों ने कहा हमें सेलरी नहीं मिली, बच्चों की फीस में कुछ राहत दो
पालकों ने कहा हमें सेलरी नहीं मिली, बच्चों की फीस में कुछ राहत दो|Social Media
मध्य प्रदेश

पालकों ने कहा हमें सेलरी नहीं मिली, बच्चों की फीस में कुछ राहत दो

इंदौर, मध्य प्रदेश। लॉकडाउन के कारण कई पालकों के धंधे बंद हैं, सेलरी नहीं मिल रही है, लेकिन स्कूल प्रबंधन इतना सख्त है कि वह कुछ भी रियायत देने को तैयार नहीं है, 15 जुलाई तक पहली किश्त भरने को कहा।

राज एक्सप्रेस

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इंदौर, मध्य प्रदेश। लॉकडाउन के कारण कई पालकों के धंधे बंद हैं, सेलरी नहीं मिल रही है, लेकिन स्कूल प्रबंधन इतना सख्त है कि वह कुछ भी रियायत देने को तैयार नहीं है। सैकड़ों पालक सोमवार को सिका स्कूल में प्रबंधकों से मिलने पहुंचे, और उनके गुहार लगाई, लेकिन प्रबंधन एक रुपया भी कम करने को तैयार नहीं है। बल्की 15 जुलाई तक फीस जमा करने का आदेश भी दे दिया।

पालकों ने कहा कि हमने आपकी स्कूल में क्वालिटी एजुकेशन के लिए बच्चों को भर्ती किया था, लेकिन तीन माह से न तो ठीक से पढ़ाई हो रही है और न ही स्कूल लग रहा है तो हम फीस क्यों दे। कई पालकों की माली हालत ठीक नहीं है, कई पालकों के एक से ज्यादा बच्चे हैं, ऐसे में वे घर का खर्च नहीं निकाल पा रहे वे बच्चों की फीस कैसे भर पाएंगे। लेकिन प्रबंधन ने पालकों की एक नहीं सुनी और पूरी फीस भरने को फरमान जारी कर दिया। पहले 30 जून तक भरनी थी, लेकिन अब उसे 15 जुलाई तक भरने को कहा है। पालकों का कहना है कि नो स्कूल नो फीस। लेकिन प्रबंधन टस से मस नहीं हुआ। एक पालक राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार को सुबह लगभग 250 पालक सिका स्कूल 78 में एकत्रित हुए थे। सभी की एक ही मांग थी, कि नो स्कूल तो नो फीस। सभी का कहना था कि आप तीन माह की फीस माफ कर दें। हमें कुछ रियायत दे, कई स्कूल वाले फीस कम कर रहे हैं आप भी करें। लेकिन प्रबंधन नहीं माना, जिससे पालकों की बात नहीं बनी।

पालकों का कहना है कि जब बच्चे स्कूल में ठीक से नहीं पढ़ते तो ऑनलाइन क्लास में घर पर बैठकर क्या सीख पाएंगे? ऐसे में जो पढ़ाई हो रही है, वह पूरी तरह व्यर्थ है। लगातार मोबाइल-लेपटॉप देखने से भी बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। थक हार कर पालकों ने प्रबंधन को आवेदन दिया है, जो ले भी लिया गया है। लेकिन अब पालकों का कहना है कि हम ट्रस्ट के लोगों से मिलेंगे और उनसे बात कर हल निकालने की कोशिश करेंगे।

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