भोपाल में संक्रमण हजार के पार, पर लोग नहीं सिख रहे सोशल डिस्टेंसिंग
भोपाल में संक्रमण हजार के पार, पर लोग नहीं सिख रहे सोशल डिस्टेंसिंग|Kratik Sahu-RE
मध्य प्रदेश

भोपाल में संक्रमण हजार के पार, पर लोग नहीं सीख रहे सोशल डिस्टेंसिंग

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संक्रमण प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है लेकिन इससे बचना तो दूर लोग सोशल डिस्टिेंसिंग का पालन न करके जानलेवा लापरवाही कर रहे हैं।

राज एक्सप्रेस

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राजएक्सप्रेस। राजधानी में कोरोना को दस्तक दिए करीब दो माह का समय हो चुका है, मरीजों का आंकड़ा एक हजार को पार कर गया है, लेकिन इसके बाद भी लोग जानलेवा लापरवाही से बाज नहीं आ रहे हैं। शहर में बढ़ते संक्रमण के बीच रेल्वे स्टेषन से लेकर बाजारों की दुकानों तक कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग नजर नहीं आ रही है और लोग लापरवाही से घूमते देखे जा सकते हैं। लापरवाही का यह शहर में घूम रहे वाहनों से लेकर छोटी बड़ी दुकानों तक देखा जा सकता है। दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर लोग कई जगह सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ाते देखे जा सकते हैं, हालांकि प्रशासन और पुलिस ऐसे लोगों पर कार्यवाही भी कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही है, कि क्या महामारी के दौर में भी लोग के लिए जान से बढ़कर दूसरी चीजें जरूरी हैं।

छोटी-बड़ी दुकानों पर भी दूरी दरकिनार

प्रशासन और सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी राजधानी के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही करते नजर आ रहे हैं। दुकानों पर सामान लेने के दौरान 'ज्यादातर लोग सामाजिक दूरी का पालन करते नहीं दिख रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है, कई लोग तो मास्क तक लगाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इसका गंभीर नतीजा कई इलाकों में फैल रहे संक्रमण के तौर पर सामने आ रहा है। सब्जी और किराना दुकानों से लेकर दूध पार्लरों तक लापरवाही का यह मंजर देखा जा सकता है। हालांकि प्रशासन और पुलिस लगातार ऐसे लोगों और दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही कर रहा है। लेकिन दुखद यह है, कि राजधानी में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद भी लोग लापरवाही छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

घर जाने के लिए सावधानी ताक पर

मंगलवार को हबीबगंज रेल्वे स्टेशन से बिहार और यूपी के लिए रवाना होने वाली श्रमिक स्पेशल गाड़ी दोपहर 2 बजे रवाना होनी थी, लेकिन लोग यहां सुबह से ही सैकड़ों की तादाद में इक्कठे हो गए, इतना ही नहीं घर जाने के लिए उत्साहित इन लोगों की वजह से सावधानी भी ताक पर रखी नजर आई। स्टेशन के अंदर और बाहर अफरा-तफरी का माहौल था, और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती नजर आईं। लोग यहां लगाए गए टेंट के बाहर सड़क किनारें झुण्ड बनाकर खड़े नजर आए।

इतना ही नहीं इससे पहले मंडीदीप से जिन बसों में सुबह इन्हें यहां लाया गया उनमें भी कहीं सोशल डिस्टेंसिंग नजर नहीं आई। वहीं श्रमिकों को अन्य शहरों के लिए लेकर निकल रहे दूसरे वाहनों में भी क्षमता से 'ज्यादा लोग मजबूरी में बैठकर जाते दिखे। इन वाहनों में भी कहीं सोशल डिस्टेंसिंग नजर नहीं आ रही है। सोमवार की तरह मंगलवार को भी पूरे दिन शहर के बाहरी इलाकों से गुजरने वाले वाहनों में कोरोना को लेकर ना कोई सर्तकता और ना ही सावधानी नजर आई। लोग अपने घर जाने की खुशी में सावधानी की पूरी तरह अनदेखी करते नजर आए। ना डिस्टेंसिंग का पता है और ना ही कोई मास्क लगाए दिख रहा है।

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