चंबल से पानी लाने की योजना ठंडे बस्ते में, शिवराज से मिले तोमर
चंबल से पानी लाने की योजना ठंडे बस्ते में, शिवराज से मिले तोमर|Raj Express
मध्य प्रदेश

चंबल से पानी लाने की योजना ठंडे बस्ते में, शिवराज से मिले तोमर

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस पर चंबल से पानी लाने की योजना को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए सीएम चौहान से मांग की कि वे चंबल से पानी लाने के लिए शीघ्र कार्रवाई करें।

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए चंबल से पानी लाने के लिए दशकों से चर्चा की जा रही है, लेकिन यह योजना आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। विधानसभा का उपचुनाव नजदीक आते ही चंबल के पानी को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस पर चंबल से पानी लाने की योजना को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए सीएम शिवराज से मुलाकात के दौरान शिवराज सिंह चौहान से मांग की वे चंबल से पानी लाने के लिए शीघ्र कार्रवाई करें।

केन्द्रीय मंत्री तोमर की शिवराजसिंह चौहान से 2018 में हुई थी चर्चा :

केन्द्रीय मंत्री तोमर ने 2018 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से विस्तृत चर्चा के बाद कहा कि ग्वालियर निगम क्षेत्र की जनता की प्यास बुझाने के लिए दीर्घकालीन पेयजल पूर्ति योजना तैयार करवाकर राज्य सरकार को भिजवायी थी, लेकिन दुर्भाग्य से राज्य में कांग्रेस सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही उक्त जनहितैषी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, लेकिन अब इस योजना के क्रियान्वयन की दिशा में मुरैना से नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए हैं।

तोमर ने भोपाल प्रवास के दौरान ग्वालियर, मुरैना व श्योपुर की पेयजलापूर्ति योजनाओं पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तथा मुख्यसचिव इकबाल सिंह बैस के साथ बैठक कर अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री चौहान ने उपरोक्त परियोजनाओं पर सहमति व्यक्त करते हुए समयबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

अगले दस साल में जनसंख्या होगी 26 लाख :

केन्द्रीय मंत्री तोमर ने एक अर्धशासकीय पत्र लिखकर मुख्यमंत्री चौहान से कहा है कि शहर की आबादी अनुमानित आबादी 15 लाख है। वर्तमान में ग्वालियर महानगर क्षेत्र को 200 एमएलडी जल शोधन कर निगम क्षेत्र में प्रदाय किया जा रहा है, लेकिन आवश्यकता 215 एमएलडी की है। आगामी 10 वर्षों में यह जनसंख्या बढ़कर 26.5 लाख होना संभावित है। आज भी ग्रीष्म ऋतु में नागरिकों को एक समय ही पेयजल उपलब्ध हो पाता है और हर वर्ष पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि रहती है। 2018 में जलसंकट के स्थाई समाधान के लिए चंबल नदी से तिघरा डैम तक पानी लाने की योजना बनाई गई थी। परियोजना की डीपीआर राष्ट्रीय राजधानी परियोजना बोर्ड में प्रस्तुत योजना को 25 जुलाई 2018 को 398.45 करोड़ की विस्तृत परियोजना का 75 प्रतिशत, 298 करोड़ के रूप में उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ग्वालियर की इस ज्वलंत समस्या की अनदेखी की तथा जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया।

घड़ियाल सैंचुरी की वजह से लटका मामला :

तोमर ने प्रस्ताव का प्रशासकीय अनुमोदन करने का अनुरोध करते हुए सीएम से कहा है कि चंबल नदी का क्षेत्र घड़ियाल सेंचुरी के अंतर्गत आता है, इसलिए राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में उपरोक्त विषय की अनुशंसा कर राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड, नई दिल्ली को भिजवायेंगे तो भारत सरकार से अनापत्ति जारी करवाने की कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ की जा सकेगी, जिसके फलस्वरूप इस कार्य को मूर्त रूप दिया जा दिया जा सकेगा।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Raj Express
www.rajexpress.co