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"प्लास्टिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं रैगपिकर्स उत्थान परियोजना, 'भोपाल मॉडल'" को अपना रहे देश-विदेश के लोग।
"प्लास्टिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं रैगपिकर्स उत्थान परियोजना, 'भोपाल मॉडल'" को अपना रहे देश-विदेश के लोग।|सयैद दबीर हुसैन
मध्य प्रदेश

'भोपाल मॉडल' क्यों हुआ 5000 शहरों में लागू?

2007 से सार्थक संस्था और भोपाल नगर निगम 'भोपाल मॉडल' पर काम कर रहे हैं। इनके द्वारा शुरू हुई इस योजना को देश के 5000 शहर अपना रहे हैं, ऐसा क्या खास है योजना में?

प्रज्ञा

प्रज्ञा

राज एक्सप्रेस। जनवरी 2019 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Program) ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में की जा रही कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने की सलाह दी। भोपाल में कार्य करने वाली गैर सरकारी संस्था "सार्थक सामुदायिक विकास एवं जन कल्याण संस्था" के साथ मिलकर नगर निगम ने सड़क निर्माण और सीमेंट फैक्ट्रीज़ में प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल कर, एक बेहतर मुहीम शुरू की है।

2 अक्टूबर 2019 से एक बार इस्तेमाल में आने वाली प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने के बाद इस योजना का महत्व और बढ़ जाता है।

सार्थक संस्था ने यूएनडीपी से मदद लेकर एक परियोजना शुरू की। जिसके तहत निम्न माइक्रॉन्स(50 माइक्रॉन्स से कम) की प्लास्टिक को अलग कर, छोटे-छोटे टुकड़े कर सड़क निर्माण और सीमेंट फैक्ट्रीज़ में उपयोग करने के लिए भेजा जाता है। इसके लिए नगर निगम ने प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण केन्द्रों की स्थापना की है, जिनका संचालन सार्थक के ज़रिए किया जाता है।