विदिशा में यूरिया के लिए रात भर से किसान लाइन में, पुलिसबल तैनात
विदिशा में यूरिया के लिए रात भर से किसान लाइन में, पुलिसबल तैनात |Social Media
मध्य प्रदेश

विदिशा में यूरिया के लिए रात भर से किसान लाइन में, पुलिसबल तैनात

मध्य प्रदेश में यूरिया का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसान यूरिया के लिए रात रात भर कतार में लगे हुए हैं ताकि उन्हें यूरिया प्राप्त हो सके। जानिए आखिर विदिशा में क्यों तैनात करना पड़ा पुलिसबल

Rishabh Jat

राज एक्सप्रेस। मध्य प्रदेश के किसानों के समाने यूरिया आपूर्ति का नया संकट सामने आ खड़ा हुआ है। विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील में सोमवार को यूरिया लूटने की घटना सामने आने के बाद विदिशा में मंगलवार को भारी पुलिसबल की मौजूदगी में यूरिया बांटा जा रहा है। यहां के रामलीला मैदान स्थित वेयर हाउस पर सुबह से हजारों किसान लाइन में लगे हैं।

परेशान किसानों का कहना है कि, वे कई दिन से सुबह से आकर लाइन में लग रहे हैं, इसके बाद भी उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रहा है। जैसे ही लोगों को खबर लगी की आज वेयर हाउस से यूरिया दी जाएगी हजारों किसान वेयर हाउस पहुंच गए। हजारों किसानों को वेयर हाउस पर देखकर प्रशासन ने भारी पुलिसबल यहां तैनात कर दिया।

वेयर हाउस पर बुजुर्ग किसानों की फजीहत हो रही है। धक्का-मुक्की के चलते किसान लाइन से बाहर आ गए हैं। किसानों ने बताया कि, वे कई दिन से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रहा है। युवा किसान बुर्जुग किसानों को लाइन से धक्का दे रहे हैं।

किसानों के दम पर चुनाव जीतने के लगता सरकार अब किसानों को भूल गयी है। कर्जमाफी ना होने के कारण किसान पहले से ही बहुत परेशान हैं। इस स्थिति में किसानों को सही समय पर यूरिया न मिलने से फसल पर असर पड़ सकता है।

सुबह रैक लगने के बाद यूरिया गंजबासौदा आया। तब देरी से आए किसानों ने अलग लाइन लगा ली। इस बात से पहले से खड़े किसान नाराज हो गए। उनका कहना था कि, जो पहले आए हैं उन्हें पहले यूरिया दिया जाए। इस बात को लेकर कई किसान रोड पर आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच भीड़ ज्यादा हुई तो पुलिस ने लाठियां बरसाना शुरू कर दिया। इससे किसान इधर-उधर भागे।

मध्य प्रदेश के बहुत से जिलों में यूरिया पुलिस बल की तैनाती के बाद ही दिया जा रहा है। प्रदेश में कई जगहों पर यूरिया की लूटपाट की खबरों का असर दूसरी जगहों पर भी दिख रहा है। हालत यह है कि, निजी कारोबारी अपने यहां से यूरिया बेचने का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। अब प्रदेश के किसानों की आखिरी उम्मीद प्रदेश सरकार ही है।

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