मंदिर में लाउडस्पीकर पर ​प्रतिबंध से सियासी बवाल
मंदिर में लाउडस्पीकर पर ​प्रतिबंध से सियासी बवाल |Social Media
मध्य प्रदेश

मंदिर में लाउडस्पीकर पर ​प्रतिबंध से सियासी बवाल

मध्यप्रदेश के आष्टा में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच मंदिरो में लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाने से प्रदेश की सियासत गर्मा गई है।

Aditya Shrivastava

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के आष्टा में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच मंदिरो में लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को लेकर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर भाजपा के तमाम बड़े नेता ये मांग कर रहे हैं कि, प्रतिबंध सिर्फ मंदिरों पर ही लागू न किया जाए। पूर्व सीएम चौहान ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री कमलनाथ को चुनौती देते हुए कहा, क्या दूसरे धार्मिक स्थानों पर ये आदेश लागू कराएंगे।

मंदिरों में रात 10 बजे के बाद लाउड स्पीकर बंद रखने के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा, ये आदेश शर्मनाक तुष्टिकरण है। कमलनाथ जी, कोलाहल नियंत्रण के नाम पर मंदिर से स्पीकर हटाने का जो आदेश जारी हुआ है, क्या रात 10 से सुबह 6 के बीच स्पीकर का उपयोग करने वाले दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी आप यह लागू करवा पाएंगे ? प्रदेश के मुखिया की दृष्टि में तो सभी धर्म समान होने चाहिए, या नहीं ?

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने सीएम कमलनाथ पर तंज कसते हुए ट्वीट कर कहा, यदि कोलाहल नियंत्रण कानून है तो वह केवल मंदिरों के लिए नहीं हो सकता। आपके जीवन में यदि कोई पारदर्शिता बची है तो रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक इसे सभी धार्मिक स्थलों पर लागू करवाइए। वरना न आष्टा के मंदिर से स्पीकर हटेंगे, न किसी और मंदिर से।

दरअसल, आष्टा के एक प्राचीन मंदिर से प्रशासन ने यहां से लाउड स्पीकर हटाने का आदेश दिया था। मंदिर समिति का आरोप है कि प्रशासन की ओर से ये आदेश दिया गया है कि अगर प्रतिबंधित अवधि में लाउडस्पीकर मंदिर में बजा जो उसे जब्त कर लिया जाएगा।

प्रदेश के आष्टा में हिंदू उत्सव समिति द्वारा सीएम कमलनाथ को एक पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि प्रशासन ने प्राचीन शंकर मंदिर आष्टा के पंडित हेमंत गिरी और समिति सदस्यों को तहसील कार्यालय बुलाकर चेतावनी दी है। हमसे कहा गया कि हमें ऊपर से शासन का आदेश आया है कि मंदिर में लाऊडस्पीकर नहीं बजेगा, अन्यथा उसे जब्त कर लिया जाएगा। समिति की ओर से कहा गया है कि मंदिर में सुबह के वक्त भस्म आरती बरसों से होती आ रही है। इस प्रकार अचानक शासन के आदेश की बात कहकर उस परंपरा को बंद कराना कहां तक ठीक है। आदेश को निरस्त कराया जाए।

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