अवैध कोयले से लदे ट्रक पर जुर्माना प्रस्तावित
अवैध कोयले से लदे ट्रक पर जुर्माना प्रस्तावित|Shubham Tiwari
मध्य प्रदेश

खनिज विभाग कोयले से जुड़े दस्तावेज और सैम्पल रहा खंगाल

शहडोल, मध्यप्रदेश : अवैध कोयले से लदे ट्रक पर जुर्माना प्रस्तावित, 31 जनवरी को कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण की होगी सुनवाई।

Shubham Tiwari

राज एक्सप्रेस। सोहागपुर पुलिस ने 19 जनवरी को अवैध कोयले से लदे ट्रेलर क्रमांक-सीजी 10 ए एम 5312 जो कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले कोल माफिया राजेश कोटवानी के नाम से पंजीकृत था, उसे अनूपपुर जिले के संजय नगर में रहने वाले चंद्रशेखर नामदेव के द्वारा कोयले के अवैध कारोबार में कोटवानी सहित अन्य लोगों के साथ इस्तेमाल किया जा रहा था।

सोहागपुर पुलिस ने उक्त वाहन को पकड़ने के साथ धारा 379 के साथ खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए खनिज विभाग को प्रकरण भेजा था। न्यायालय ने उक्त वाहन को सुपुर्दगी में धारा 379 के तहत दे दिया था, जिसके बाद कथित माफिया ने पुलिस अधिकारियों से वाहन छोड़ने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया था।

विभाग ने प्रस्तावित किया जुर्माना

बताया गया है कि जांच के बाद खनिज विभाग के द्वारा वाहन में कोई दस्तावेज न मिलने पर 04 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही प्रकरण को अग्रिम कार्यवाही के लिये कलेक्टर न्यायालय में पेश किया है, इस मामले में सुनवाई 31 जनवरी को प्रस्तावित की गई है, साथ ही विभाग कोयले के सैम्पल की जांच के साथ ही बिलासपुर से जिस डिपो से कोयला निकलकर कैमोर जा रहा था, उससे जुड़ी हुई जानकारी भी एकत्रित करने में जुटा हुआ है ताकि कोयले के इस अवैध कारोबार से पर्दाफाश हो सके।

माफियाओं को किसका संरक्षण

सूत्र बताते हैं कि बिलासपुर के माफिया ने कोयलांचल में अपने पैर पहले एक लाइजनर के माध्यम से फैलाये हुए थे धीरे-धीरे करके शहडोल तक पहुंच गया, चंद्रशेखर नामदेव के नाम से कागजों में मुख्तियारनामा कोटवानी के द्वारा बनवाया गया है, सूत्रों की मानें तो चंद्रशेखर छोटे-मोटे कोल माफियाओं से मिलकर लम्बे समय से कोयले के अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था, लेकिन पुलिस की तत्परता से मामले का खुलासा तो हुआ, लेकिन अभी भी न तो प्रशासन और पुलिस चंद्रशेखर से कोई पूछतांछ कर रही है, न ही उसे गिरफ्त में लेकर कार्यवाही कर रही है।

बताया गया है कि राजनैतिक संरक्षण के चलते मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि चंद्रशेखर इस पूरे कारोबार का राजदार है, उसे मोहरा बनाकर कथित लोग काफी महीनों से कोयला तस्करी के काम को अंजाम दे रहे थे, अगर उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई तो, इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

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