ग्वालियर : 2015 से पहले से गायब था रिकॉर्ड, तब क्यों नहीं हुई जांच
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ग्वालियर : 2015 से पहले से गायब था रिकॉर्ड, तब क्यों नहीं हुई जांच

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : 2018 में शिकायत के बाद हरकत में आए अधिकारी। मामला निपटाने के लिए अधिकारियों ने तैयार कराया है जवाब।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। नगर निगम की भवन निर्माण स्वीकृति शाखा से गायब हुई तीन फाईलों का मामला पेचीदा होता जा रहा है। इन प्रकरणों में नियम विरूद्ध स्वीकृति देने की शिकायत लोकायुक्त में की गई है और सोमवार को अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव जबाव देने के लिए भोपाल गए हैं। कार्यवाही से बचने के लिए नगर निगम द्वारा फाईलों की गुम होने पर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो यह फाईलें वर्ष 2015 से गायब थी और इनकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी थी। इसके बावजूद किसी ने कोई एक्शन नहीं लिया।

दरअसल नगर निगम ग्वालियर की भवन शाखा में वर्ष 2001 से ही घपला चल रहा है। उस समय भी कई फाईलों को लेकर शिकवे शिकायत की गई थी लेकिन स्थानीय स्तर पर ही मामलों को सुलटा दिया जाता था। लेकिन अब ईओडब्लू एवं लोकायुक्त के अस्तित्व में आने के बाद प्रकरण दबाना मुश्किल हो गया है। यह सब निगम अधिकारी भी जानते हैं इसलिए जो जिन निर्माण स्वीकृतियों में मोटा लेन देने होता है एवं नियम विरूद्ध कार्य किए जाते हैं उनकी मूल फाईलें स्वीकृति के साथ ही गायब कर दी जाती है। कई मामलों में डमी फाईल ही चलती रहती है। जैसे ही शिकायत होती है तो अधिकारी फाईल गुम होने का जबाव लिखकर दे देते हैं और ऐसे ही 5-6 साल का समय निकल जाता है। जब किसी मामले में हाईकोर्ट, लोकायुक्त एवं ईओडब्लू में सुनवाई होती है तो तत्काल अधिकारी एफआईआर दर्ज करा देते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। जिन तीन भवनों की निर्माण स्वीकृति की फाईलें गायब हुई हैं उसमें बिरला हॉस्पिटल, सालासर भवन एवं होटल लैण्डमार्क शामिल है। इन तीनों की इमारतों के निर्माण के समय जो अधिकारी पदस्थ थे उन्हें सारी जानकारी है लेकिन कोई अधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। सोमवार को भवन शाखा के अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव इस मामले में जबाव देने के लिए भोपाल पहुंचे। उन्होंने फाईलें गुम होने संबंधी पत्र एवं एफआईआर की कॉपी अपने जबाव में पेश की है। देखना है आगामी दिनों में लोकायुक्त द्वारा किस तरह का एक्शन लिया जाता है।

अन्य विभागों की गुम फाईलों में नहीं हुई एफआईआर :

नगर निगम में कई ऐसे विभाग हैं जिनकी फाईलें गुम हैं। इसमें जनकार्य, सम्पत्तिकर विभाग सहित अन्य विभाग शामिल हैं। लेकिन इन विभागों से अब भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। दिखावे के लिए अधिकारियों ने थानों में आवेदन दिए हैं लेकिन थानेदार द्वारा जो आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे वह उपलब्ध नहीं कराए गए। सिर्फ शिकायत आवेदन देकर खाना पूर्ति की गई है। इसे लेकर भी निगम में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

बड़े लेआउट क्यों नहीं होते ऑन लाईन :

ई नगर पालिका के तहत निर्माण स्वीकृति एवं सम्पत्तिकर को ऑन लाईन किया गया है। लेकिन जितने भी बड़े लेआउट हैं उन्हें ऑन लाईन नहीं किया जाता और सबसे बड़ा खेल इन्हीं लेआउटों में होता है। फिर चाहे वह हाईराईज इमारत की निर्माण स्वीकृति हो या कॉलोनी की। कई मामलों में दो से तीन करोड़ रुपय का भी लेनदेन होता है और यही वजह है कि सभी अधिकारी भवन अधिकारी एवं सीपी बनने के लिए सिफारिशें लगाते हैं।

इनका कहना है :

फाईलें गुम होने के मामले में पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह फाईलें कब से गुम थी इस मामले में जांच के बाद ही पता चल सकेगा। जहां तक लेआउट ऑन लाईन होने की बात है तो इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

नरोत्तम भार्गव, प्रभारी निगमायुक्त

बड़े लेआउट ऑन लाईन होने का कोई सिस्टम अब तक डबलप नहीं किया गया है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारी ही कोई जानकारी दे सकते हैं।

पवन सिंघल, सिटी प्लानर, नगर निगम

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