लोचन प्रसाद पांडेय और गोपालदास नीरज की जयंती पर याद करते हुए सीएम ने किया नमन
लोचन प्रसाद पांडेय और गोपालदास नीरज की जयंती Social Media

लोचन प्रसाद पांडेय और गोपालदास नीरज की जयंती पर याद करते हुए सीएम ने किया नमन

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज लोचन प्रसाद पाण्डेय और पद्मश्री एवं गोपालदास नीरज की जयंती है, इस मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर उन्हें नमन किया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय लोचन प्रसाद पाण्डेय और पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित, महाकवि गोपालदास नीरज की आज जयंती है, लोचन प्रसाद और नीरज की जयंती पर उन्हें देश याद कर रहा है। इस मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर उन्हें नमन किया है।

लोचन प्रसाद पांडेय की जयंती पर CM ने किया सादर नमन

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- हिंन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार लोचन प्रसाद पांडेय (Lochan Prasad Pandey) की जयंती पर उन्हें सादर नमन। मध्य प्रदेश के साहित्यकारों में विशेष प्रतिष्ठा रखने वाले पांडेय का स्मरण 'दो मित्र' और 'त्यागवीर भ्राता लक्ष्मण' जैसी कृतियों के लिए सदैव किया जाएगा

4 जनवरी, 1887 को हुआ था लोचन प्रसाद पाण्डेय का जन्म :

आज के दिन (4 जनवरी, 1887) को लोचन प्रसाद पाण्डेय का जन्म हुआ था। लोचन प्रसाद पाण्डेय हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। इन्होंने हिन्दी एवं उड़िया दोनों भाषाओं में काव्य रचनाएँ भी की हैं। सन 1905 से ही इनकी कविताएँ 'सरस्वती' तथा अन्य मासिक पत्रिकाओं में निकलने लगी थीं।

गोपालदास नीरज को सीएम ने किया याद

वहीं, मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गोपालदास नीरज (Gopaldas Neeraj) को जयंती पर याद करते हुए उन्हें नमन किया है। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कहा- पद्मश्री व पद्मभूषण से अलंकृत हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षक गोपालदास नीरज जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। 'संघर्ष', 'बादर बरस गयो' और 'गीत भी अगीत भी' जैसी आपकी कृतियां साहित्य जगत को सदैव सुवासित करती रहेंगी।

गोपालदास नीरज का जन्म 04 जनवरी 1924 हुआ था, गोपालदास नीरज हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से। यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला।

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