नागदा जं. : रिपोर्ट पहुँची नहीं और तहसीलदार ने अतिक्रमण होने से किया इनकार
रिपोर्ट पहुँची नहीं और तहसीलदार ने अतिक्रमण हिने से किया इनकार राज एक्सप्रेस

नागदा जं. : रिपोर्ट पहुँची नहीं और तहसीलदार ने अतिक्रमण होने से किया इनकार

नागदा जं., मध्य प्रदेश : प्रथम ट्रेडर्स अतिक्रमण मामले को लेकर अधिकारियों में मचा हड़कंप, बुधवार को एसडीएम ने चैंबर में बुलाकर लगाई लताड़। अवैध कॉलोनी काटने वालो पर 12 में से 8 पर नहीं हुई कार्यवाही।

नागदा जं., मध्य प्रदेश। रसूखदारों से अतिक्रमण मुक्त कराना तो दूर नपती करने में ही राजनीतिक दबाव इतना आ गया की मामला अधिकारियों के गले की हड्डी बन गया। मौके पर नपती करने वाले ने अतिक्रमण बताया, तहसीलदार के पास इसकी रिपोर्ट ही नहीं मिली और अतिक्रमण नहीं पाए जाने की बात कर रहे हैं। अवैध कॉलोनी काटने वाले 12 के खिलाफ प्रकरण दर्ज के कलेक्टर के आदेश के बाद भी दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। 13 ऐसे लोगों के भी प्रतिवेदन एसडीएम के पास 5 जनवरी को पहुंच गए थे। 8 दिन बाद भी उन्हें नोटिस जारी नहीं होना अधिकारियों पर भारी दबाव होना दर्शा रहा है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश है की गुंडे, बदमाश, भू-माफिया, अवैध कॉलोनी काटने वाले के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए। जिले के बाद शहर में वैसे सबसे ज्यादा कार्यवाही हुई है। राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारी कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं। इंका नेता बसंत मालपानी की शिकायत की थी की प्रथम ट्रेडर्स प्रतिष्ठान अतिक्रमण में बना हुआ है इसकी नपती की जाए। तहसीलदार ने एक माह पूर्व नपती के आदेश दे दिए थे। कार्यवाही नहीं हो रही थी। नईदुनिया ने मंगलवार के संस्करण में खबर छपने के बाद जांच दल ने सुबह ही जाकर नपती की। मौके पर ही मीडिया को नपती दल ने अतिक्रमण होने की पुष्टि कर दी। जानकारी लगने के बाद अधिकारियों पर इतना दबाव आ गया की तहसीलदार को नपती का प्रतिवेदन नहीं मिला और उन्होंने अतिक्रमण नहीं होने के बयान जारी कर दिए। बुधवार को सुबह अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

सूत्रों के अनुसार एसडीएम आशुतोष गोस्वामी ने नपती करने गए दल के सदस्यों व तहसीलदार को कार्यालय में तलप कर लताड़ लगाई तो पटवारी, आरआई व तहसीलदार के सुर ही बदल गए। जबकी पूर्व में कुछ वर्षो पूर्व इसी भूमि पर दुकानो का निर्माण हो रहा था। नपा ने पूर्व के भूमि स्वामी को नोटिस देकर सूचित किया था की यह शासकीय भूमि है, इससे बड़ा प्रमाण नहीं हो सकता। मंगलवार को हुई नपती का प्रतिवेदन बुधवार की शाम तक तहसीलदार के पास नहीं पहुंचा था। इसके बाद भी तहसीलदार बयान दे रहे है कि वहां अतिक्रमण नहीं है। नपती तो ठीक वैसे ही देखा जाए तो नपा द्वारा बनाया गया काम्प्लेक्स व प्रथम ट्रेडर्स के आगे जितनी भी दुकानें व मकान बने हैं, वह सब प्रथम ट्रेडर्स की दुकान से पीछे बने हुए हैं। मौके पर जाकर यदि कोई व्यक्ति देखेगा तो सामने ही दिख जाएगा की अतिक्रमण है इसके बाद भी प्रशासन शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाना तो दूर इसकी पुष्टि ही नहीं कर रहा है।

इधर अधिकारी नाराज तो उधर स्थानीय सत्तापक्ष के नेता :

मुख्यमंत्री के अवैध धंधे, गुंडे, बदमाश व भू-माफियाओं के खिलाफ मुहिम चलाने के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों के गले की हड्डी बन गए हैं। अधिकारी कार्यवाही नहीं करते है तो वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी झेलना पड़ रही है। कार्यवाही करते है तो स्थानीय सत्तापक्ष के नेताओं की नाराजगी झेलना पड़ रही है। मुख्यमंत्री व स्थानीय नेताओं के बीच में अधिकारी पिसा रहे हैं। कलेक्टर ने भले ही डेढ़ माह पूर्व 12 अवैध कॉलोनी काटने वालो के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश नपा को दे दिए। इसमें भी वही हो रहा है। इसी के चलते 8 पर कार्यवाही नहीं हो पा रही है।

मुख्यमंत्री के आदेश की उड़ रही है धज्जियाँ :

जांच के दौरान 13 अवैध कॉलोनी काटने की रिपोर्ट तहसीलदार को दी थी। 5 जनवरी को तहसीलदार कार्यालय से प्रतिवेदन एसडीएम कार्यालय भेज दिया। 8 दिन बीत जाने के बाद भी एसडीएम कार्यालय से इनको नोटिस जारी नहीं हुए है। सूत्रों के अनुसार 13 अवैध कॉलोनी काटने के प्रतिवेदन में कुछ रसूखदार लोग होने के कारण एसडीएम कार्यवाही तो ठीक नोटिस देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। एसडीएम का कहना है की दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। जबकी पटवारी ने जांच कर अवैध कॉलोनी काटने की पुष्टि की है। इसके बाद भी दस्तावेजों का परीक्षण का बहाना कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव होने की पुष्टि कर रहा है।

इनका कहना :

प्रथम ट्रेडर्स की दुकान में कोई अतिक्रमण नहीं है। नपती दल की रिपोर्ट अभी मुझे मिली नहीं है। आरआई पटवारी को किसी भी प्रकार के कोई बयान देने का अधिकार नहीं है।

आर.के. गुहा, तहसीलदार, नागदा

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