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रेत माफिया, पर्यावरण व खनिज नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बरही
रेत माफिया, पर्यावरण व खनिज नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बरही |Sunil Yadav
मध्य प्रदेश

रेत माफिया, पर्यावरण व खनिज नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए

कटनी। जिले के बिजरावगढ़ क्षेत्र में रेत माफिया नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से अवैध रेत खनन कर रहे हैं। जेसीबी मशीन से सैकड़ों डंपर रेत निकाली जा रही है।

Sunil Yadav

राज एक्सप्रेस। बड़वारा साहित विजयराघवगढ़ क्षेत्र में अवैध रेत खनन कर रहे हैं। जेसीबी मशीन से नदियों का सीना चीर कर सैकड़ों डंपर रेत निकाली जा रही है और प्रशासन को इसकी जानकारी है, लेकिन इक्का-दुक्का वाहनों पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। उधर जिले के मुखिया का कहना है कि अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए संयुक्त टीम बनाई गई है। जो लगातार कार्यवाही करती है। साथ ही रिकवरी करते हुए जप्त वाहनों को राजसात किया भी किया जा रहा और वही माइनिंग अधिकारी संतोष बघेल का कहना है कि करोड़ो की अवैध रेत जप्त कर जुर्माना लगाया गया है। लेकिन अभी किसी भी वाहन को राजसात करने की कार्यवाही नही हुई है और नही वसूली हो पाई है।

इन दोनों बयानों को सुनने के बाद आप खुद ही समझ सकते हैं कि क्या हो रहा है कटनी जिले में क्योंकि कलेक्टर कह रहे है कि राजसात की कार्यवाही हो रही है और वही माइनिंग अधिकारी कह रहे है कि कोई राजसात की कार्यवाही नही हुई है। आप को बता दें कि राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त कंप्यूटर बाबा ने पर्यावरण नियमों के खिलाफ और अवैध खनन पर रोक लगाने के निर्देश दे रखे हैं लेकिन इस निर्देश का भी पालन नहीं हो रहा। जानकारी अनुसार सफेद रेत की कालाबाजारी को अंजाम देने वाले रेत माफिया द्वारा कटनी जिले के कई ठिकानों से माह नदी का सीना छल्ली कर अवैध रेत निकाल कर सरकार को प्रतिदिन लाखों का चूना लगाया जा रहा है।

सूत्रों अनुसार रेत माफिया जेसीबी से डंपर और ट्रैक्टर में रेत भरकर बाहर भेज रहे हैं। ऐसा नजारा गांव छिंदहाई पिपरिया के समीप खेतों ओर बरही वाले मार्ग पर अवैध रेत के ठिकानो से किया जा रहा है । साथ ही यहां जेसीबी से हरपल नदी व माह नदी में देर रात खुदाई की जाती है। जेसीबी पहले वहां जगह-जगह रेत के ढेर लगा देती है। उसके बाद उसे ट्रैक्टर में भर कर भेज दिया जाता है। खास बात यह है कि यह ट्रैक्टर व डंपर कई थानों व चौकियों के सामने से निकलते हैं, लेकिन पुलिस व खनिज विभाग को यह गाड़ियां नहीं दिखाई देतीं।