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बड़े बांधो से निकाली जाएगी रेत, जारी होंगे नीलामी टेंडर
बड़े बांधो से निकाली जाएगी रेत, जारी होंगे नीलामी टेंडर|Social Media
मध्य प्रदेश

बड़े बांधो से निकाली जाएगी रेत, जारी होंगे नीलामी टेंडर

भोपाल, मध्यप्रदेश: प्रदेश के बड़े बांधों से रेत निकालने का सरकार ने लिया फैसला, क्या है सरकार के नए वैज्ञानिक पहलू।

Deepika Pal

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश में प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बड़े 4 बांधो से रेत निकालकर बेचने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है जिसके लिए सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया है। जिसके संबंध में कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही रेत की बिक्री के टेंडर जारी किए जाएंगे। साथ ही अनुमान लगाया जा रहा है कि, सरकार को इससे 210 करोड़ रुपए की सालाना आय होगी।

ई-रिवर्स नीलामी प्रक्रिया से होगें टेंडर जारी :

बता दें कि, इस प्रस्ताव को 27 नवंबर के आगामी कैबिनेट में पेश किया जाएगा जहां मंत्रिमंडल की सभी मंत्रियों की सहमति पर आगे बढ़ाया जा सकेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही ई- रिवर्स नीलामी की प्रक्रिया से पहली बार बांधो के टेंडर जारी किए जाएंगे। प्रदेश के चार बड़े बांधों रानी बरगी, तवा, इंदिरा सागर और बाणसागर को इस प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

मुख्य सचिव एसआर मोहंती की अध्यक्षता में इस संबंध में वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में बांधो की ड्रेजिंग कर रेत निकालने के प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है।

बांधो से 15 सालों में 1280 मिलियन घन मीटर गाद निकालने का आंकलन :

सूत्रों के मुताबिक इन बांधों से 15 सालों में 1280 मिलियन घन मीटर गाद निकलने का आंकलन सामने आया है, जिसमें 25 प्रतिशत के लगभग रेत होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। जिसकी माप 320 घन मीटर के करीब आकंलित की जा रही है। वहीं सरकार हर साल 20 मिलियन घनमीटर रेत निकलेगी जिससे 210 करोड़ रुपए की वार्षिक आय होने की संभावना है। रेत से जो भी गाद बचेगी उसे किसानों को मुफ्त में बांटने की योजना है जिससे किसानों की जमीन उपजाऊ हो सके।

बड़ी कंपनियों को मौका देगी सरकार :

बता दें कि, इस प्रस्ताव के अंतर्गत सरकार रेतों के ड्रेजिंग के संबंध में बड़ी कंपनियों को मौका दे सकती है जिसमें 3 वर्ष के अनुभव के साथ 500 करोड़ के टर्नओवर वाले कॉन्ट्रेक्टर को शामिल किया जा सकेगा। साथ ही जिसके पास 50 लाख टन गाद निकालने का अनुभव हो, प्राथमिकता के दायरे में आयेंगे। इस बार टेंडर की नीलामी प्रक्रिया को लेकर बदलाव किया गया है, जिसमें ई-रिवर्स प्रक्रिया को पहली बार सरकार उपयोग में ला रही है। इस प्रक्रिया में चयनित कॉन्ट्रेक्टर द्वारा ही खुली नीलामी में बोली लगाई जाएगी। साथ ही टेंडर के बाद ही कॉन्ट्रेक्टर दरें तय कर सकेगें।

सरकार लगा चुकी है विपक्ष पर आरोप :

इससे पहले प्रदेश सरकार रेत माफियों के बढ़ते अवैध कारोबार और बढ़ावा देने का आरोप विपक्ष की पूर्व सरकार पर लगा चुकी है लेकिन बांधो से रेत निकालने के पीछे सरकार के वैज्ञानिक पहलू सामने आ रहे हैं।

इस संबंध में कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि, बांध में एक्सेस रेट इकट्ठी हो जाती है जिससे सरकार को रॉयल्टी मिलेगी वहीं स्थिति बेहतर होगी यह एक वैज्ञानिक पहलू है।

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