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शिक्षक के खाते से उड़ा दिए 16 लाख रुपए
शिक्षक के खाते से उड़ा दिए 16 लाख रुपए|Pankaj Yadav
मध्य प्रदेश

अलीपुर: एसबीआई के एजेंट ने शिक्षक के खाते से उड़ा दिए 16 लाख रुपए

अलीपुर, मध्य प्रदेश : एसबीआई लाइफ के एजेंट ने शिक्षक को एफडी कराने का प्रलोभन देकर बैंक के ब्रांच मैनेजर की मदद से बाउचर में दस्तखत करवाकर राशि को अपने खाते में ट्रांसफर करा ली।

Pankaj Yadav

राज एक्सप्रेस। सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षक को जो राशि मिली थी, उससे वह अपने बच्चों की बेहतरी के लिए उपाय खोज रहा था, तभी एसबीआई लाइफ के एजेंट ने उसे प्रलोभन देकर एफडी कराने के लिए राजी कर लिया और एफडी कराने के बाद स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर की मदद से बाउचर में दस्तखत करवाकर राशि को अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। जीवन भर की पूंजी को चालाक एजेंट ने एक झटके में ही साफ कर दिया। 15 दिन पहले से नौगांव थाने में शिकायत की गई थी, फिर भी टीआई राकेश साहू का गैर-जिम्मेदाराना बयान आ रहा है। उन्होंने यह कहा कि, थाने जाकर ही इस बारे में कुछ कह सकूंगा।

थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ागांव के रहने वाले मिहीलाल अहिरवार को सेवानिवृत्त होने के बाद शासन द्वारा राशि मिली थी। भारतीय स्टेट बैंक की नौगांव शाखा में उसका बचत खाता है। तत्कालीन एसअीआई के ब्रांच मैनेजर शिवेंद्र त्रिवेदी ने फरवरी 2018 में उनसे जबरन इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। शिक्षक के मना करने के बाद बड़ागांव उनके घर पहुंचे एसबीआई लाइफ इंश्यारेंस के एजेंट शिवकुमार वर्मा ने कई फायदे गिनाए। इसके अलावा दो लोग बैंक कर्मचारी बनकर शिवकुमार के साथ गए थे। एजेंट की बातों में आकर उन्होंने दो बच्चों के नाम 2-2 लाख की पॉलिसी ले ली। पॉलिसी भरने के दौरान एजेंट ने दो विथड्रॉवल फार्म में हस्ताक्षर कराए।

22 अगस्त को कराई पासबुक इंट्री :

मिही लाल अहिरवार 22 अगस्त को स्टेट बैंक अपने खाते से पैसे निकालने गए और अपनी पासबुक इंट्री कराई तो, उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। 7 फरवरी को 4 लाख रुपए, 8 फरवरी को 4 लाख रुपए, 4 मई को 4 लाख रुपए और 14 अगस्त को 4 लाख रुपए एजेंट शिवकुमार वर्मा ने खाता में ट्रांसफर कर लिए। जब उन्होंने बैंक मैनेजर से इस संबंध में बात की, तो मैनेजर का कहना था कि, यह बहुत बड़ी साजिश का मामला हो सकता है। 23 अगस्त को नौगांव थाने में शिकायत दी गई मगर पुलिस ने अब तक मामले में एक कदम भी नहीं बढ़ाया है। ऐसा संभव भी है कि, पुलिस ने अभी इतने बड़े ठगी के मामले में एफआईआर भी न की हो।

इनका कहना :

किसी भी खातेदार की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दी जा सकती। शिक्षक के खाते से राशि निकाले जाने के मामले से वरिष्ठ अधिकारी भी परिचित हैं, यदि पुलिस बैंक आकर कोई जांच करती है तो उनकी पूरी मदद की जाएगी और पीडि़त को भी हर संभव सहयोग देंगे।