ग्वालियर : कांग्रेस ने सिंधिया को वफादारी पर घेरते हुए लगाए आरोप

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : कांग्रेस ने सिंधिया को वफ़ादारी पर घेरते हुए कहा कि वफादार कुत्ते तक की समाधि की भूमि को जो बेंच सकता है वह वफादारी शब्द की परिभाषा कैसे जान सकता है।
ग्वालियर : कांग्रेस ने सिंधिया को वफादारी पर घेरते हुए लगाए आरोप
सिंधिया ने तो वफादार कुत्ते की समाधि की भूमि तक को बेंच दियाSocial Media

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। प्रदेश कांग्रेस द्वारा सिंधिया पर लगातार जमीन हड़पने के आरोप लगाने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस के इन आरोपो का सिंधिया ने गुरुवार को जब पहली बार जवाब देते हुए कमलनाथ को गद्दार कहा तो कांग्रेस ने शुक्रवार को एक बार फिर पत्रकारवार्ता बुलाकर सिंधिया को वफादारी शब्द से ही घेरने का काम करते हुए कहा कि वफादार कुत्ते तक की समाधि की भूमि को जो बेंच सकता है वह वफादारी शब्द की परिभाषा कैसे जान सकता है।

कांग्रेस सरकार गिराने के लिए भाजपा का दामन थामने के बाद से ही सिंधिया पर कांग्रेस हमलावर बनी हुई है। पहले भाजपा नेता सिंधिया पर शासकीय जमीन हड़पने के आरोप लगाते थे, लेकिन अब उनके भाजपा में आने से वहां के नेताओं की भाषा बदल गई है तो अब कांग्रेस नेताओं ने अपनी भाषा सिंधिया के प्रति बदल दी है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष मुरारीलाल दुबे एवं मीडिया प्रमुख (ग्वालियर-चम्बल संभाग) केके मिश्रा ने सिंधिया परिवार पर चौथे हमले में अपने वफादार कुत्ते की समाधि की भूमि को भी अवैध रूप से बेंच दिये जाने का गंभीर आरोप लगाया। इस मौके पर जबलपुर के विधायक विनय सक्सेना एवं पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी एवं प्रवक्ता धमेन्द्र शर्मा भी मौजूद थे।

मुरारीलाल दुबे ने कहा कि आजादी के संग्राम और राजनीति में गद्दारी के पर्याय बन चुके सिंधिया परिवार को वफादरी शब्द से कितनी नफरत है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस परिवार ने अपने वफादार कुत्ते की मौत के बाद बनवाई गई उसकी समाधि को भी बेंच दिया। अपने इस आरोप को स्पष्ट करते हुए दुबे ने कहा कि यह समाधि ग्राम महलगांव तहसील ग्वालियर के सर्वे क्रमांक 916 रकवा-293 (1 बीघा 8 बिस्वा) सन् 1996 तक राजस्व अभिलेखों में राजस्व विभाग, कदीम, आबादी, पटोर नजूल के तौर पर दर्ज थी। सन् 1996 के पश्चात् कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अवैधानिक तरीकों से तहसीलदार, ग्वालियर द्वारा बिना किसी वैधानिक आवेदन, बिना किसी प्रकरण दायर किये और शासन का पक्ष सुने स्व. माधवराव सिंधिया के नाम पर नामांतरित कर दी गई इस अवैध कार्य में तत्कालीन तहसीलदार ने उच्च न्यायालय, ग्वालियर की याचिका क्रमांक-61, 62, 63, 64/1969 के आदेश दिनांक-08 सितम्बर 1981 के एक आदेश की भी अनुचित/अवैधानिक व्याख्या का दुरूपयोग करते हुये इस काम को अंजाम दिया जो एक गंभीर अपराध है, क्योंकि तहसीलदार न्यायालय को यह अधिकार न होकर प्रकरण लैण्ड रेवेन्यू कोड की धारा-57(2) के तहत यह अधिकार उपखंड अधिकारी एसडीओ को प्रदत्त है? इस नामांतरण के बाद श्रीमती माधवीराजे सिंधिया ने अपने पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया व पुत्री चित्रांगदाराजे की सहमति के साथ इस भूमि का विक्रय कर दिया। दुबे ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास कई ऐसे दस्तावेज है जो अरबो रुपए की जमीन खुर्दबुर्द होने का पता चल जाएगा, लेकिन उनको वह समय के हिसाब से सभी के सामने रखूंगा। दुबे ने सीधा हमला करते हुए चुनैती दी कि अगर सिंधिया के पास कोई जवाब है तो वह सामने बैठकर हमसे बात क रें। कांग्रेस द्वारा एक के बाद एक जमीन से संबंधित आरोप सिंधिया पर लगातार लगाएं जा रहे है, लेकिन सवाल यह है कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब क्या उनके पास दस्तावेज नहीं थे?

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