ग्वालियर : स्वास्थ्य विभाग की टीम देख जूते हाथ में लेकर भागा झोलाछाप डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग की टीम देख जूते हाथ में लेकर भागा झोलाछाप डॉक्टरRaj Express

ग्वालियर : स्वास्थ्य विभाग की टीम देख जूते हाथ में लेकर भागा झोलाछाप डॉक्टर

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : मरीज का उपचार करने के नाम पर उसकी जान से खिलवाड़ कर रहे झोलाछाप डॉक्टर ने जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखा तो जूते हाथ में लेकर दौड़ लगा दी।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। मरीज का उपचार करने के नाम पर उसकी जान से खिलवाड़ कर रहे झोलाछाप डॉक्टर ने जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखा तो जूते हाथ में लेकर दौड़ लगा दी। टीम ने उसका पीछा भी किया, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। घटना मंगलवार शाम 3 बजे नदी पार टाल पर भार्गव क्लीनिक की है। जब क्लीनिक के अंदर टीम पहुंची तो एक मरीज भी भर्ती मिला है। आसपास के लोगों ने बताया कि यह डॉक्टर साहब घाव के बाद टांके लगाने से लेकर कोरोना तक का इलाज करते हैं। इसके बाद टीम ने क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की है। इसके पास ही राजेश्वरी क्लीनिक पर भी कार्रवाई की है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार शाम नोडल ऑफिसर डॉ. प्रतीक दुबे के नेतृत्व में झोलाछाप डॉक्टरों पर छापामार कार्रवाई की है। टीम सबसे पहले थाटीपुर नदी पार टाल स्थित भार्गव क्लीनिक पर पहुंची। यहां जैसे ही दरवाजे पर डॉक्टरों की टीम पहुंची है। वहां एक मरीज को ग्लूकोज की बोतल चढ़ा रहा युवक तत्काल दौड़ पड़ा। टीम के कुछ सदस्य उसके पीछे भागे, लेकिन वह इतनी तेजी से भागा कि कोई पीछा नहीं कर पाया। जब टीम अंदर पहुंची तो कैलाश नाम का युवक अंदर भर्ती मिला। टीम ने डॉक्टर के उपस्थित न होने पर पहले एसडीएम मुरार को सूचना दी। जब पटवारी मौके पर पहुंचे तब पूरे समान की गणना करने के बाद क्लीनिक को सील कर दिया।

दंत चिकित्सक को थमाया नोटिस :

भार्गव क्लीनिक के पास ही राजेश्वरी क्लीनिक के नाम से दांतों के डाक्टर राहुल शर्मा इलाज करते मिले। जब उनसे क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन मांगा गया तो उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन अभी नहीं कराया। इसके बाद नोडल ने उनकी डिग्री देखी और उन्हें रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही क्लीनिक खोलने के निर्देश दिए। उधर सीएमएचओ ने नोटिस जारी कर दिया।

क्लीनिक भार्गव के नाम से चला रहा था नेगी :

भार्गव क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा। क्लीनिक पर नीचे डॉ.एलएस भार्गव का नाम और मोबाइल नंबर लिखा था। डॉक्टर के भागने के बाद जब टीम ने बोर्ड पर लिखे नंबर पर कॉल किया तो वह बंद आ रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि जो युवक भागा है वही डॉक्टर है। उसका नाम नितिन नेगी है। भार्गव कोई डॉक्टर ही नहीं है।

टांके से लेकर करता था डेंगू-कोरोना का इलाज :

आसपास के लोगों से पता लगा है कि बिना डिग्री के यह नितिन नेगी घाव होने पर टांके लगाने से लेकर मलेरिया और डेंगू, कोरोना तक का उपचार कर रहा था। जैसा लोग बता रहे हैं उससे साफ है कि यह किस तरह लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा था।

इनका कहना है :

बिना डिग्री के मरीज देखना कनूनन अपराध है। यदि कोई भी इस तरह से इलाज करता मिलेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि मरीज के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों की जांच कर कार्रवाई करें।

डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ

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